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Chitrakoot News: खांचा पुरवा में विकास के दावे कीचड़ में
Fri, 09 Oct 2026 11:35 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Fri, 09 Oct 2026 11:35 PM IST
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फोटो 09 सीकेटीपी 07 खांचा पुरवा में कीचड़ के बीच निकलते बच्चे। संवाद
चित्रकूट। जिला मुख्यालय से महज 18 किलोमीटर दूर सेमरदहा पंचायत के मजरा खांचा पुरवा में विकास के सारे दावे घुटने भर कीचड़ में फंसे नजर आते हैं।
यहां 25 घरों में रहने वाले करीब 200 लोगों की जिंदगी आज भी एक 350 मीटर के कच्चे रास्ते पर टिकी है। यह 350 मीटर का टुकड़ा ही इस बस्ती को स्कूल, अस्पताल और मुख्य सड़क से जोड़ता है, लेकिन आज यही सबसे बड़ी बाधा बन गया है।
गांव के सामने ही जूनियर हाईस्कूल है, मगर वहां तक पहुंचना किसी जंग से कम नहीं है। टेकारी और खांचा पुरवा के दर्जनों बच्चे रोज बस्ता टांगकर इसी दलदल से होकर गुजरते हैं।
जरा सी बारिश होते ही यह रास्ता तालाब में तब्दील हो जाता है। बच्चे फिसलते हैं तो उनकी ड्रेस और किताबें कीचड़ में सन जाती हैं। कई बार तो बच्चे रोते हुए घर लौट आते हैं। इसी वजह से बरसात के दिनों में स्कूल में बच्चों की उपस्थिति आधी से भी कम रह जाती है।
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इस 350 मीटर के रास्ते ने पूरे गांव को बंधक बना रखा है। गांव के अंदर न तो एंबुलेंस आ पाती है, न ही कोई चार पहिया वाहन। अगर कोई बीमार पड़ जाए या किसी महिला को प्रसव पीड़ा हो तो उसे खाट पर लादकर या कंधे पर उठाकर कीचड़ भरा रास्ता पार कर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। कई बार मरीजों की हालत रास्ते में ही बिगड़ जाती है। रोजमर्रा का राशन, खाद, दवा लाना भी मुश्किल भरा काम है।
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बोले ग्रामीण-पक्की सड़क बन जाए
बुजुर्ग की आखिरी इच्छा
इस उम्र में बस एक आखिरी इच्छा है कि मरने से पहले गांव में एक पक्की सड़क देख लूं। सड़क बन जाती तो बेटियों को मायके आने में आसानी हो जाती।- केशनी प्रसाद मिश्र, ग्रामीण।
प्रधान से विधायक तक, बीडीओ से आला अधिकारियों तक कई बार लिखित व मौखिक शिकायत की। ज्ञापन दिया, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। जमीन पर एक ईंट तक नहीं रखी गई।- रमेश, ग्रामीण।
वर्जन
-खांचा पुरवा में सड़क निर्माण की कार्ययोजना तैयार की गई है। शासन की भेजी जा चुकी है। वहां से मंजूरी मिलने के बाद सड़क का निर्माण होगा। -चंद्रशेखर, एडीएम।
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यहां 25 घरों में रहने वाले करीब 200 लोगों की जिंदगी आज भी एक 350 मीटर के कच्चे रास्ते पर टिकी है। यह 350 मीटर का टुकड़ा ही इस बस्ती को स्कूल, अस्पताल और मुख्य सड़क से जोड़ता है, लेकिन आज यही सबसे बड़ी बाधा बन गया है।
गांव के सामने ही जूनियर हाईस्कूल है, मगर वहां तक पहुंचना किसी जंग से कम नहीं है। टेकारी और खांचा पुरवा के दर्जनों बच्चे रोज बस्ता टांगकर इसी दलदल से होकर गुजरते हैं।
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जरा सी बारिश होते ही यह रास्ता तालाब में तब्दील हो जाता है। बच्चे फिसलते हैं तो उनकी ड्रेस और किताबें कीचड़ में सन जाती हैं। कई बार तो बच्चे रोते हुए घर लौट आते हैं। इसी वजह से बरसात के दिनों में स्कूल में बच्चों की उपस्थिति आधी से भी कम रह जाती है।
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इस 350 मीटर के रास्ते ने पूरे गांव को बंधक बना रखा है। गांव के अंदर न तो एंबुलेंस आ पाती है, न ही कोई चार पहिया वाहन। अगर कोई बीमार पड़ जाए या किसी महिला को प्रसव पीड़ा हो तो उसे खाट पर लादकर या कंधे पर उठाकर कीचड़ भरा रास्ता पार कर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। कई बार मरीजों की हालत रास्ते में ही बिगड़ जाती है। रोजमर्रा का राशन, खाद, दवा लाना भी मुश्किल भरा काम है।
बोले ग्रामीण-पक्की सड़क बन जाए
बुजुर्ग की आखिरी इच्छा
इस उम्र में बस एक आखिरी इच्छा है कि मरने से पहले गांव में एक पक्की सड़क देख लूं। सड़क बन जाती तो बेटियों को मायके आने में आसानी हो जाती।- केशनी प्रसाद मिश्र, ग्रामीण।
प्रधान से विधायक तक, बीडीओ से आला अधिकारियों तक कई बार लिखित व मौखिक शिकायत की। ज्ञापन दिया, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। जमीन पर एक ईंट तक नहीं रखी गई।- रमेश, ग्रामीण।
वर्जन
-खांचा पुरवा में सड़क निर्माण की कार्ययोजना तैयार की गई है। शासन की भेजी जा चुकी है। वहां से मंजूरी मिलने के बाद सड़क का निर्माण होगा। -चंद्रशेखर, एडीएम।

फोटो 09 सीकेटीपी 07 खांचा पुरवा में कीचड़ के बीच निकलते बच्चे। संवाद

फोटो 09 सीकेटीपी 07 खांचा पुरवा में कीचड़ के बीच निकलते बच्चे। संवाद