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फोटो नंबर- 2
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चित्रकूट। गुजरात के राजकोट में पेंटिंग का काम करने वाले भवान भाई ताक पत्नी व भतीजी के साथ धर्मनगरी की तीर्थयात्रा करने निकले थे। उन्हें इस बात का कतई आभास नहीं था कि वह देश में लॉकडाउन हो जाएगा और वापस घर नहीं पहुंच पाएंगे। अचानक लॉकडाउन से मानो उनका जीवन ठहर गया है। लगातार 24 दिन से वह यही सोचते हैं कि कैसे अपने शहर पहुंचेंगे। उनके रुपये खर्च हो गए हैं।
इसके चलते वह होटल का बिल नहीं भर पा रहे। वो तो भला हो कामदगिरी होटल का काम संभालने वाले समाजसेवी अरुण गुप्ता का, जिन्होंने इस परिवार को हर तरह की सुविधा निशुल्क दे रखी है। यह तीर्थयात्री कई बार स्थानीय प्रशासन व पुलिस से गुजरात भिजवाने की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहंी हो रही है।
राजकोट निवासी भवान भाई ताक पत्नी भावना बाई बेन व भतीजी अनुसूइयाबाई बेन के साथ 20 मार्च को तीर्थयात्रा पर चित्रकूट पहुंचे थे। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू लगने के बाद से वह यहीं फंसे हैं। जिस होटल में ठहरे थे। वहां रहने व खाने का बिल देना मुश्किल होने लगा। फिर अचानक लॉकडाउन होने से यहीं फंसे रह गए हैं। उन्होंने बताया कि कई बार स्थानीय पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं कि किसी तरह उन्हें और परिवार को राजकोट पहुंचा दिया जाए। वहीं पूरा किराया दे देंगे, लेकिन कोई उनकी सुनने वाला नहीं है। समाजसेवी अरुण गुप्ता के सेवाभाव से उनके ठहरने व भोजन का इंतजाम हो रहा है।
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इसके चलते वह होटल का बिल नहीं भर पा रहे। वो तो भला हो कामदगिरी होटल का काम संभालने वाले समाजसेवी अरुण गुप्ता का, जिन्होंने इस परिवार को हर तरह की सुविधा निशुल्क दे रखी है। यह तीर्थयात्री कई बार स्थानीय प्रशासन व पुलिस से गुजरात भिजवाने की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहंी हो रही है।
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राजकोट निवासी भवान भाई ताक पत्नी भावना बाई बेन व भतीजी अनुसूइयाबाई बेन के साथ 20 मार्च को तीर्थयात्रा पर चित्रकूट पहुंचे थे। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू लगने के बाद से वह यहीं फंसे हैं। जिस होटल में ठहरे थे। वहां रहने व खाने का बिल देना मुश्किल होने लगा। फिर अचानक लॉकडाउन होने से यहीं फंसे रह गए हैं। उन्होंने बताया कि कई बार स्थानीय पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं कि किसी तरह उन्हें और परिवार को राजकोट पहुंचा दिया जाए। वहीं पूरा किराया दे देंगे, लेकिन कोई उनकी सुनने वाला नहीं है। समाजसेवी अरुण गुप्ता के सेवाभाव से उनके ठहरने व भोजन का इंतजाम हो रहा है।
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