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लाइट गुल तो ठहर गई ‘जीवन रेखा’, जिला अस्पताल में बिजली जाने से 15 मिनट ठप रही ऑक्सीजन की सप्लाई, भरा सिलिंडर न मिलने से छटपटाता रहा इमरजेंसी में भर्ती इकलौता मरीज
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फोटो-16- अस्तपाल के इमर्जेंसीवार्ड में भर्ती मरीज को लगाई गई आक्सीज की नली। संवाद
- फोटो : CHITRAKOOT
चित्रकूट। जिला अस्पताल में गुरुवार की दोपहर अचानक बिजली जाने से ऑक्सीजन की सप्लाई बंद हो गई। इस बीच इमरजेंसी में भर्ती एक मरीज की जान पर बन आई। अस्पताल में रखे सिलिंडर भी खाली निकले। शुक्र है 15 मिनट में लाइट आ गई और मरीज की जान बच गई।
जिला अस्पताल में गुरुवार की दोपहर मुख्यालय के तरौंहा के राम नारायण (60) की हालत बिगड़ने पर भाई रामदास ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया। यहां डॉक्टरों ने गंभीर दशा के चलते रेफर कर दिया, लेकिन धनाभाव के चलते घरवाले मरीज को बाहर नहीं ले जा सके। इस पर चिकित्सालय में ही ऑक्सीजन लगा दिया गया। इस बीच अचानक बिजली गुल होने से ऑक्सीजन की आपूर्ति ठप पड़ गई। रामनारायण छटपटाने लगे। घरवालों ने देखा तो अस्पताल के स्टाफ को सूचना दी। इस पर स्टाफ के हाथपांव फूल गए। आननफानन ऑक्सीजन सिलिंडर लाने को कहा गया लेकिन इमरजेंसी में रखा सिलिंडर खाली निकला। इस पर तीमारदार अस्पताल की व्यवस्थाओं को कोसते रहे। करीब पंद्रह मिनट बाद लाइट आ गई और ऑक्सीजन की सप्लाई पुन: शुरू हो गई। इसके बाद सभी ने राहत की सांस ली। मरीज राम नारायण की भी जान बच गई।
वर्जन
ऑक्सीजन के भरे सिलिंडर इमरजेंसी वार्ड के बगल में ही गोदाम में रखे रहते हैं। तत्काल स्टाफ की जानकारी पर इसे निकाला गया लेकिन तब तक लाइट आ गई थी। मरीज की हालत बिगड़ने नहीं पाई। स्टाफ से कहा गया है कि वार्ड के अंदर रखे सिलिंडर को चेक कर लिया करें कि खाली है या भरा। भरा सिलिंडर ही वार्ड में रखा जाए। बिजली दो से तीन मिनट के लिए गई थी।
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डॉ. सुधीर शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल में गुरुवार की दोपहर मुख्यालय के तरौंहा के राम नारायण (60) की हालत बिगड़ने पर भाई रामदास ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया। यहां डॉक्टरों ने गंभीर दशा के चलते रेफर कर दिया, लेकिन धनाभाव के चलते घरवाले मरीज को बाहर नहीं ले जा सके। इस पर चिकित्सालय में ही ऑक्सीजन लगा दिया गया। इस बीच अचानक बिजली गुल होने से ऑक्सीजन की आपूर्ति ठप पड़ गई। रामनारायण छटपटाने लगे। घरवालों ने देखा तो अस्पताल के स्टाफ को सूचना दी। इस पर स्टाफ के हाथपांव फूल गए। आननफानन ऑक्सीजन सिलिंडर लाने को कहा गया लेकिन इमरजेंसी में रखा सिलिंडर खाली निकला। इस पर तीमारदार अस्पताल की व्यवस्थाओं को कोसते रहे। करीब पंद्रह मिनट बाद लाइट आ गई और ऑक्सीजन की सप्लाई पुन: शुरू हो गई। इसके बाद सभी ने राहत की सांस ली। मरीज राम नारायण की भी जान बच गई।
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वर्जन
ऑक्सीजन के भरे सिलिंडर इमरजेंसी वार्ड के बगल में ही गोदाम में रखे रहते हैं। तत्काल स्टाफ की जानकारी पर इसे निकाला गया लेकिन तब तक लाइट आ गई थी। मरीज की हालत बिगड़ने नहीं पाई। स्टाफ से कहा गया है कि वार्ड के अंदर रखे सिलिंडर को चेक कर लिया करें कि खाली है या भरा। भरा सिलिंडर ही वार्ड में रखा जाए। बिजली दो से तीन मिनट के लिए गई थी।
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डॉ. सुधीर शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल