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चित्रकूटः परंपरा व आधुनिक ज्ञान का समन्वय पर चिंतन जरूरी

Wed, 26 Feb 2020 08:54 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 26 Feb 2020 08:54 PM IST
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Chitrakoot: It is necessary to reflect on the coordination of tradition and modern knowledge
फोटो- 9- राष्ट्रीय संगोष्ठी में बोलते डीआरआई के प्रमुख सचिव अतुल जैन - फोटो : CHITRAKUTT
चित्रकूट/खोही। भारतरत्न नानाजी देशमुख की पुण्यतिथि पर बुधवार को उद्यमिता विद्यापीठ परिसर में पोषण एवं जल संस्कृति की राष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू हुई। जिसमें राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी ने कहा कि आधुनिक ज्ञान विज्ञान के साथ परंपरा का समन्वय जरूरी है। देश को ऊंचाई के रास्ते तक ले जाने के लिए सबको सहयोग करना होगा। आज पानी संरक्षण व पर्यावरण संतुलन बेहद अहम है। इस दिशा मेें अनदेखी से आगे वाली पीढ़ियां बेहद परेशान होंगी। संपूर्ण जीवन का आधार जल है। जल से जीवन है। इसके लिए जल की शुद्धता और संरक्षण जरूरी है। वैसे ही पोषण संस्कृति की जो बात है उसके लिए भूमि की शुद्धता और भूमि का संरक्षण होना चाहिए।
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दीनदयाल शोध संस्थान के तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ संघ के सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी, वरिष्ठ प्रचारक एवं दीनदयाल शोध संस्थान के संरक्षक मदन दास, अध्यक्ष वीरेंद्रजीत सिंह, प्रधान सचिव अतुल जैन, राज्य सभा सदस्य प्रभात झा, देवास सांसद महेंद्र सोलंकी, विधायक उज्जैन डा. मोहन यादव, ट्राईफेड के महानिदेशक प्रवीण कृष्ण ने भारतरत्न नानाजी देशमुख के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया। संघ के सह सरकार्यवाह ने कहा कि देश परंपरा एवं आधुनिक ज्ञान का समन्वय कैसे हो यह परिणाम इस सेमिनार के चिंतन में आना चाहिए। कहा कि पोषण का जो विविध आहार है उसकी शुद्धता पर विचार करने की जरूरत है। प्रधान सचिव ने कहा कि यहां तीन वर्षों से भारतीय संस्कृति में पोषण एवं जल की संस्कृति को संजोने का काम हो रहा है। जिसके आधार पर देश में परंपरागत तरीकों से मिलने वाले पोषण आहार की तरफ लोगों को ले जाने की जरूरत को महसूस किया गया और संस्थान द्वारा इसकी देशव्यापी पहल की गई है।
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इस मौके पर दस विश्व विद्यालयों के कुलपति एवं दस सामाजिक संस्थाओं के प्रमुख व्यक्तियों की भागीदारी रही। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में दो दिन तक जल प्रबंधन की भारतीय परंपराएं, जल प्रबंधन की आवश्यकता, स्वस्थ जीवन के लिए पोषकीय आहार, स्थानीय उपलब्ध अनाजों का पोषण में महत्व, आजीविका संवर्धन आदि विषयों पर विभिन्न विशेषज्ञ चिंतन करेंगें
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