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चित्रकूटःमहंत के घायल शिष्य की ओर घूमी शक की सुई
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फोटो- 5- महंत के साथ घटना के दौरान घायल महंत का शिष्य आशीष तिवारी
- फोटो : CHITRAKUTT
चित्रकूट। बालाजी मंदिर के महंत की गोली मारकर हत्या के मामले में नया मोड़ आता दिख रहा है। घटना के दौरान महंत के साथ बाइक चला रहा शिष्य आशीष तिवारी भी अब संदेह के घेरे में आ गया है। पहले पकड़े गए नामजद दो मंगलदास व आलोक पांडेय से पूछताछ के दौरान मिली कई अहम जानकारी व घटनाक्रम पर पूरी नजर दौड़ाने पर शक की सुई महंत के शिष्य की ओर घूम रही है। अब घायल शिष्य की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। उधर पकड़े गए दोनों नामजदों को पुलिस ने रविवार को अदालत में पेश किया।
सदर कोतवाली क्षेत्र के सीतापुर उतारा बाजार के पास बालाजी मंदिर के महंत अर्जुनदास की 16 जनवरी की रात गोली मारकर हत्या की गई थी। उनके साथ मौजूद बाइक चालक शिष्य आशीष तिवारी के कंधे में गोली लगी थी। जिसे इलाज के बाद खतरे से बाहर होने पर पुलिस सुरक्षा में बाला मंदिर में रखा गया है। शिष्य आशीष की ही तहरीर पर मंगलदास, आलोक पांडेय व राजू मिश्रा समेत दो अज्ञात के खिलाफ महंती पाने व संपत्ति हथियाने का मामला बताकर रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मंगलदास व आलोक को पकड़ भी लिया। 48 घंटे तक इन दोनों से पूछताछ के बाद कई अहम सुराग मिलने पर पुलिस की जांच कई अन्य दिशा की ओर भी घूम र्गई है। जिसमें सबसे पहले फरार राजू मिश्रा व दो अज्ञात की तलाश की जा रही है। जिसके लिए चार पुलिस टीमें कई जिलों में रवाना हो चुकी हैं।
रविवार को नामजद मंगलदास व आलोक का मेडिकल परीक्षण कराकर पुलिस ने जेल भेजने के लिए अदालत में पेश किया। इसी दौरान इन दोनों से बातचीत में मंगलदास ने बताया कि वह तो पन्ना के पास एक छोटे से आश्रम में रहकर जीवन यापन करता है। महंती व संपत्ति का विवाद है जो अदालत में विचाराधीन है। घटना के दिन से लेकर उसके पहले से वह वहीं पन्ना के मंदिर में ही था। दूसरे नामजद आलोक पांडेय ने बताया कि अभी वह छह माह पूर्व ही इस मंदिर में आया था। इसके पूर्व वह दूसरे आश्रम में रहता था। वह बहराइच का निवासी है और एमए आचार्य की डिग्री है। चित्रकूट संतों के बीच संस्कृत गीत व संगीत सीखने चला आया था। इन दोनों ने कई अन्य पर शक जताया है और कहा कि इसकी गहन जांच होनी चाहिए।
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उधर, घटना क्रम को शुुरू से अब पुलिस महंत के साथ रह रहे शिष्य आशीष तिवारी की भूमिका को भी इन पकड़े गए आरोपियों के बयान से जोड़कर देख रही है। काल डिटेल खंगाली जा रही है। घटना स्थल पर नजदीक से गोली मारने के दौरान महंत के कनपटी से सटाकर गोली मारी जबकि हमलावरोें ने आशीष के सिर्फ कंधे में ही गोली मारी और फिर भाग निकले। इसके बाद से उसके बयानों को भी पुलिस आपस में जोड़ रही है। कोतवाल अनिल कुमार सिंह ने बताया कि संदेह सभी पर है। पुलिस शिष्य से भी पूछताछ कर रही है। उसकी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है। इसके अलावा इन नामजद समेत अन्य फरार को भी जल्द पकड़ कर पूरा खुलासा किया जाएगा। घटना के पीछे मूल कारण तो मंदिर की संपत्ति व महंती पद ही है।
कुछ दिन पूर्व मंदिर में हुआ था विवाद
चित्रकूट। बालाजी मंदिर में 16 जनवरी के पूर्व कुछ रुपये के लेनदेन को लेकर कुछ लोग महंत के पास आए थे। मंदिर में रहने वाले कुछ किराएदारों ने बताया कि छह लोग असलहा लेकर आए थे। महंत से काफी देरतक रुपये के लेनदेन की बात कर रहे थे इसके बाद धमकी देते हुए वह सब गए थे। इस दौरान महंत के शिष्य आशीष व आलोक भी मंदिर में मौजूद थे। इस मामले में यह भी संदेह जताया गया है कि कुछ माह पूर्व संस्कृत विद्यालय में नियुक्ति होनी थी। जिसमें नियुक्ति कराने को लेकर दो दर्जन लोगों ने महंत व मंदिर के अन्य लोगों की मदद से लाखों रुपये एडवांस जमा किया था। नियुक्ति में देरी होने पर कई लोग अपने रुपये भी लौटाने के लिए मंदिर के चक्कर लगा रहे थे।
4 फरवरी को महंती व संपत्ति मामले की तारीख
चित्रकूट। बालाजी मंदिर के महंती समेत संस्कृत विद्यालय और 285 बीघे जमीन की संपत्ति को लेकर मामला अदालत में है। विवाद होने पर प्रशासन ने तहसीलदार को पावर आफ एटर्नी बना रखा है। अदालत में अगस्त, सितंबर व दिसंबर माह में तारीख थी। जिसमें मंगलदास अदालत में पेश हुआ था। अब अगली तारीख चार फरवरी बताई जा रही है।
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सदर कोतवाली क्षेत्र के सीतापुर उतारा बाजार के पास बालाजी मंदिर के महंत अर्जुनदास की 16 जनवरी की रात गोली मारकर हत्या की गई थी। उनके साथ मौजूद बाइक चालक शिष्य आशीष तिवारी के कंधे में गोली लगी थी। जिसे इलाज के बाद खतरे से बाहर होने पर पुलिस सुरक्षा में बाला मंदिर में रखा गया है। शिष्य आशीष की ही तहरीर पर मंगलदास, आलोक पांडेय व राजू मिश्रा समेत दो अज्ञात के खिलाफ महंती पाने व संपत्ति हथियाने का मामला बताकर रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मंगलदास व आलोक को पकड़ भी लिया। 48 घंटे तक इन दोनों से पूछताछ के बाद कई अहम सुराग मिलने पर पुलिस की जांच कई अन्य दिशा की ओर भी घूम र्गई है। जिसमें सबसे पहले फरार राजू मिश्रा व दो अज्ञात की तलाश की जा रही है। जिसके लिए चार पुलिस टीमें कई जिलों में रवाना हो चुकी हैं।
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रविवार को नामजद मंगलदास व आलोक का मेडिकल परीक्षण कराकर पुलिस ने जेल भेजने के लिए अदालत में पेश किया। इसी दौरान इन दोनों से बातचीत में मंगलदास ने बताया कि वह तो पन्ना के पास एक छोटे से आश्रम में रहकर जीवन यापन करता है। महंती व संपत्ति का विवाद है जो अदालत में विचाराधीन है। घटना के दिन से लेकर उसके पहले से वह वहीं पन्ना के मंदिर में ही था। दूसरे नामजद आलोक पांडेय ने बताया कि अभी वह छह माह पूर्व ही इस मंदिर में आया था। इसके पूर्व वह दूसरे आश्रम में रहता था। वह बहराइच का निवासी है और एमए आचार्य की डिग्री है। चित्रकूट संतों के बीच संस्कृत गीत व संगीत सीखने चला आया था। इन दोनों ने कई अन्य पर शक जताया है और कहा कि इसकी गहन जांच होनी चाहिए।
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उधर, घटना क्रम को शुुरू से अब पुलिस महंत के साथ रह रहे शिष्य आशीष तिवारी की भूमिका को भी इन पकड़े गए आरोपियों के बयान से जोड़कर देख रही है। काल डिटेल खंगाली जा रही है। घटना स्थल पर नजदीक से गोली मारने के दौरान महंत के कनपटी से सटाकर गोली मारी जबकि हमलावरोें ने आशीष के सिर्फ कंधे में ही गोली मारी और फिर भाग निकले। इसके बाद से उसके बयानों को भी पुलिस आपस में जोड़ रही है। कोतवाल अनिल कुमार सिंह ने बताया कि संदेह सभी पर है। पुलिस शिष्य से भी पूछताछ कर रही है। उसकी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है। इसके अलावा इन नामजद समेत अन्य फरार को भी जल्द पकड़ कर पूरा खुलासा किया जाएगा। घटना के पीछे मूल कारण तो मंदिर की संपत्ति व महंती पद ही है।
कुछ दिन पूर्व मंदिर में हुआ था विवाद
चित्रकूट। बालाजी मंदिर में 16 जनवरी के पूर्व कुछ रुपये के लेनदेन को लेकर कुछ लोग महंत के पास आए थे। मंदिर में रहने वाले कुछ किराएदारों ने बताया कि छह लोग असलहा लेकर आए थे। महंत से काफी देरतक रुपये के लेनदेन की बात कर रहे थे इसके बाद धमकी देते हुए वह सब गए थे। इस दौरान महंत के शिष्य आशीष व आलोक भी मंदिर में मौजूद थे। इस मामले में यह भी संदेह जताया गया है कि कुछ माह पूर्व संस्कृत विद्यालय में नियुक्ति होनी थी। जिसमें नियुक्ति कराने को लेकर दो दर्जन लोगों ने महंत व मंदिर के अन्य लोगों की मदद से लाखों रुपये एडवांस जमा किया था। नियुक्ति में देरी होने पर कई लोग अपने रुपये भी लौटाने के लिए मंदिर के चक्कर लगा रहे थे।
4 फरवरी को महंती व संपत्ति मामले की तारीख
चित्रकूट। बालाजी मंदिर के महंती समेत संस्कृत विद्यालय और 285 बीघे जमीन की संपत्ति को लेकर मामला अदालत में है। विवाद होने पर प्रशासन ने तहसीलदार को पावर आफ एटर्नी बना रखा है। अदालत में अगस्त, सितंबर व दिसंबर माह में तारीख थी। जिसमें मंगलदास अदालत में पेश हुआ था। अब अगली तारीख चार फरवरी बताई जा रही है।