{"_id":"65e36b1ea4399992f60142e5","slug":"bjp-again-expressed-confidence-in-rk-patel-chitrakutt-news-c-215-1-sknp1043-105371-2024-03-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chitrakoot News: भाजपा ने आरके पटेल पर फिर जताया विश्वास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chitrakoot News: भाजपा ने आरके पटेल पर फिर जताया विश्वास
विज्ञापन
चित्रकूट। भाजपा ने लोकसभा चुनाव के लिए जारी पहली सूची में बांदा-चित्रकूट संसदीय सीट पर फिर आरके सिंह पटेल पर विश्वास जताया है। इससे समर्थकों में खुशी का माहौल है।
छात्र जीवन से ही राजनीति शुरू करने वाले पटेल ने सबसे पहले बसपा में शामिल हुए थे। इसके बाद समाजवादी पार्टी में भी रहे। 2017 में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। इसी से पहले विधायक बने अब सांसद हैं। लगातार दूसरी बार उन्हें भाजपा से टिकट मिला है।
मूल रूप से सदर ब्लाॅक के बालापुर खालसा गांव निवासी आरके सिंह पटेल ने कर्वी आकर कालीन बुनने का कारोबार शुरु किया। कांशीराम व मायावती की नीतियों से प्रभावित होकर बसपा में शामिल हुए। 1992 में पहला विधानसभा चुनाव कर्वी सीट से लड़े थे। वह भाजपा के भैरो प्रसाद से लगभग सवा सौ मतों से हार गए। इसके बाद 1996 में बसपा से ही विधायक बने। मायावती की सरकार में मंत्री भी रहे। टिकट कटा तो वह 2007 में समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। कर्वी चित्रकूट सीट से विधानसभा का चुनाव सपा से लड़े, लेकिन बसपा के दिनेश मिश्रा से हार गए थे। 2009 में सपा ने लोकसभा का प्रत्याशी बनाया, जिसमें वह विजयी हुए।
विज्ञापन
2014 में यह भाजपा के भैरो प्रसाद मिश्र से लोकसभा का चुनाव हार गए थे। इसके बाद 2017 में यह भाजपा में शामिल हुए। इन्हें मानिकपुर सीट से विधानसभा चुनाव भाजपा ने लड़ाया तो वह विजयी हुए। 2019 में लोकसभा सीट पर भाजपा ने आरके को ही प्रत्याशी बनाया और वह जीत गए। ऐसे में मानिकपुर सीट से इस्तीफा देना पड़ा और यहां उपचुनाव हुआ था। अब 2024 के लिए फिर से उन्हें भाजपा से टिकट मिला है।
विज्ञापन
छात्र जीवन से ही राजनीति शुरू करने वाले पटेल ने सबसे पहले बसपा में शामिल हुए थे। इसके बाद समाजवादी पार्टी में भी रहे। 2017 में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। इसी से पहले विधायक बने अब सांसद हैं। लगातार दूसरी बार उन्हें भाजपा से टिकट मिला है।
विज्ञापन
मूल रूप से सदर ब्लाॅक के बालापुर खालसा गांव निवासी आरके सिंह पटेल ने कर्वी आकर कालीन बुनने का कारोबार शुरु किया। कांशीराम व मायावती की नीतियों से प्रभावित होकर बसपा में शामिल हुए। 1992 में पहला विधानसभा चुनाव कर्वी सीट से लड़े थे। वह भाजपा के भैरो प्रसाद से लगभग सवा सौ मतों से हार गए। इसके बाद 1996 में बसपा से ही विधायक बने। मायावती की सरकार में मंत्री भी रहे। टिकट कटा तो वह 2007 में समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। कर्वी चित्रकूट सीट से विधानसभा का चुनाव सपा से लड़े, लेकिन बसपा के दिनेश मिश्रा से हार गए थे। 2009 में सपा ने लोकसभा का प्रत्याशी बनाया, जिसमें वह विजयी हुए।
विज्ञापन
2014 में यह भाजपा के भैरो प्रसाद मिश्र से लोकसभा का चुनाव हार गए थे। इसके बाद 2017 में यह भाजपा में शामिल हुए। इन्हें मानिकपुर सीट से विधानसभा चुनाव भाजपा ने लड़ाया तो वह विजयी हुए। 2019 में लोकसभा सीट पर भाजपा ने आरके को ही प्रत्याशी बनाया और वह जीत गए। ऐसे में मानिकपुर सीट से इस्तीफा देना पड़ा और यहां उपचुनाव हुआ था। अब 2024 के लिए फिर से उन्हें भाजपा से टिकट मिला है।