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रेलवे पुल में हर साल होती हैं बड़ी घटनाएं

Fri, 10 Sep 2021 11:33 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 10 Sep 2021 11:33 PM IST
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Big incidents happen every year in railway bridge
शहर के रेलवे पुल में बडी दुर्घटना के बाद भी पुल से गुजरते स्थानीय निवासी। संवाद - फोटो : CHITRAKOOT
चित्रकूट। शहर के मंदाकिनी नदी के ऊपर बने रेलवे पुल से आवागमन करने में हर साल कोई न कोई दुर्घटना होती रही है। जिसमेें ट्रेन की चपेट में आने से कई की मौत हो चुकी है। इसके बाद भी इस पुल से निकलने के लिए ऐसी कोई योजना नहीं बनाई जिससे घटना न हो। चार माह पूर्व पुरानी बाजार निवासी एक युवक भी ट्रेन की चपेट में आ गया था। जिससे उसकी मौत हो गई थी।
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नदी के उस पार कपसेठी, टिकुरा, चंद्रगहना के ग्रामीण, स्कूली बच्चे इसी पुल से दिन रात गुजरते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आवागमन की व्यवस्था की जाए। जिससे पुल से होकर न जाना पड़े। बताया कि इसके पहले रेलवे पुल के के दोनो ओर लोहे के पटरे लगे थे। ट्रेन के आने के समय लोग इन्हीं पटरों पर उतरकर बचते रहे हैं।
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केबिन तक पहुंच जाते तो बच जाते
चित्रकूट । मंदाकिनी नदी में बना रेलवे पुल काफी पुराना है। जिसमें रेल पटरियों के बीच रखे लोहे के लोहे की गाटरों के बीच से नदी पार करने के लिए आवागमन करते है। बीच मेें एक स्थान पर रुकने के लिए केबिल भी बना है। बीती रात ट्रेन आने के बाद तीनों ने केबिन तक पहुंचने के लिए दौड़ लगाई होगी लेकिन ट्रेन की रफ्तार के आगे वह हार गए और हादसा हो गया। केबिन तक पहुंच जाते तो शायद आज जीवित होते। रेलवे विभाग ने इस पुल पर आसपास कोई पटरे आदि नहीं लगाए हैं।
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सिग्नल न होने से बढ़ी दुर्घटनाएं
चित्रकूट। रेलवे पुल के पास एक जमाने में ट्रेनों के आवागमन करने के लिए सिग्नल लगा रहता था। जिसके गिरने से संकेत मिल जाता था कि ट्रेन आने वाली है। जब से यह प्रणाली हट गई तो दुर्घटनाएं अधिक होने लगी।
दुकान में काम कम होने पर गए थे पार्टी मनाने
चित्रकूट। मृतकों के परिजनों ने बताया कि बृहस्पतिवार को दुकान में काम कम था। इसीलिए दोपहर को ही तीनों ने अपने घरों में रात का खाना न बनाने का संदेश दिया था। रातभर घर नहीं लौटे तो चिंता हुई। शुक्रवार की सुबह पता चला कि रेलवे पुल पर तीन लोगों की ट्रेन से कटकर मौत हो गई।
तीनों में थी गहरी दोस्ती
चित्रकूट। एक ही दुकान में काम करते हुए तीनों गहरे दोस्त बन गए थे लेकिन किसी को यह अहसास नहीं था कि तीनों एक साथ ही दुनिया छोड़कर चले जाएंगे। चंदू अविवाहित था। मृतक संतोष साहू के एक पुत्री, पत्नी ललिता देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतक राम सिंह के तीन पुत्र, दो पुत्री, पत्नी बुधिया भी बेसुध हैं। मृतक चंदू अपनी मां रानी का इकलौता पुत्र था। पिता की पहले ही मृत्यु हो चुकी थी।

तैरना जानता था रामसिंह
ग्रामीणों ने बताया कि टिकुरा निवासी रामसिंह तैरना भी जानता था इसीलिए उसने ट्रेन को नजदीक आते देख नदी में छलांग लगाई लेकिन तबतक वह ट्रेन की चपेट में आ चुका था। ग्रामीणों की माने तो रामसिंह निषाद शराब नहीं पीता था लेकिन पार्टी में वह शामिल था। दोस्तों के लड़खड़ाने के कारण उन्हें पुल पार कराने आया होगा।

 शहर के रेलवे पुल में ट्रेन की चपेट में आने के बाद नदी में गिरे मजदूर का शव निकालने के बाद घाट पर लगी

शहर के रेलवे पुल में ट्रेन की चपेट में आने के बाद नदी में गिरे मजदूर का शव निकालने के बाद घाट पर लगी- फोटो : CHITRAKOOT

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