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तुम्हारी भी जय-जय, हमारी भी जय-जय
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चित्रकूट। तुम्हारी भी जय-जय हमारी भी जय-जय न तुम जीते न हम हारे...का गाना तो सभी ने सुना होगा। अयोध्या मसले के फैसले के बाद जिस अंदाज में भगवान राम की तपोस्थली चित्रकूट ने अपना सैकड़ों साल पुराना इतिहास कायम रखा उसका असर शनिवार को मुस्लिम वर्ग के पर्व बारावफात से लेकर मंदिरों में दिखाई पड़ा। इस दौरान हर जगह बस इसी गाने के बोल सबकी होंठों पर आ रहे थे।
पहली बार ऐसा हुआ कि भगवान कामदनाथ मंदिर के प्रमुख संत मदनदास व स्वामी मत्यगयेंद्रनाथ मंदिर के प्रमुख पुजारी विपिन तिवारी मुस्लिम पर्व में शामिल होने के लिए सड़क पर उतरे। सभी ने यही कहा कि 9 नवंबर को हुए एतिहासिक फैसले का असर ही है जिसमें धर्मनगरी का पुराना सांप्रदायिक सद्भाव सड़कों पर उतर आया। इसी जुलूस में ऐसा भी नजारा आया जब बुंदेली सेना के जिलाध्यक्ष तिरंगा झंडा लेकर दोनों वर्ग के साथ चले। यहां तक कि पालिका चेयरमैन नरेंद्र गुप्ता ने सभी जुलूस में शामिल लोगों का स्वागत किया और सुरक्षा में तैनात अपर एसपी बलवंत चौधरी समेत अन्य पुलिसकर्मियों को भी माला पहनाकर इस पर्व की खुशी में शामिल किया गया। सभी ने बस यही कहा कि हर बार की तरह धर्मनगरी का सांप्रदायिक सद्भाव की जीत हुई।
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पहली बार ऐसा हुआ कि भगवान कामदनाथ मंदिर के प्रमुख संत मदनदास व स्वामी मत्यगयेंद्रनाथ मंदिर के प्रमुख पुजारी विपिन तिवारी मुस्लिम पर्व में शामिल होने के लिए सड़क पर उतरे। सभी ने यही कहा कि 9 नवंबर को हुए एतिहासिक फैसले का असर ही है जिसमें धर्मनगरी का पुराना सांप्रदायिक सद्भाव सड़कों पर उतर आया। इसी जुलूस में ऐसा भी नजारा आया जब बुंदेली सेना के जिलाध्यक्ष तिरंगा झंडा लेकर दोनों वर्ग के साथ चले। यहां तक कि पालिका चेयरमैन नरेंद्र गुप्ता ने सभी जुलूस में शामिल लोगों का स्वागत किया और सुरक्षा में तैनात अपर एसपी बलवंत चौधरी समेत अन्य पुलिसकर्मियों को भी माला पहनाकर इस पर्व की खुशी में शामिल किया गया। सभी ने बस यही कहा कि हर बार की तरह धर्मनगरी का सांप्रदायिक सद्भाव की जीत हुई।
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