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चित्रकूट के रामायण मेले में दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का मनोबल बढ़ाया
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चित्रकूट। राष्ट्रीय रामायण मेले में कई संस्कृतियों की झलक एक ही मंच पर देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। रातभर शिवतांडव के बाद भजन संध्या व मणिपुर संस्कृति के गीत संगीत ने खूब शमा बांधी।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में द्वितीय दिवस श्री रघुबीर सिंह यादव व कल्पना चौहान एंड पार्टी ने भजन प्रस्तुत किये। इसका दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से मनोबल बढ़ाया। इसके बाद प्रयागराज की श्रीमती उर्मिला शर्मा ने शिव तांडव और शास्त्रीय नृत्य का मंचन किया। जवाहरलाल नेहरु मणिपुर डांस अकादमी इम्फ ाल के कलाकारों ने अपने लोकनृत्य से दर्शकों का मनमोह लिया। इसके बाद प्रिया रघुवंशी एवं साथी लखनऊ द्वारा शास्त्रीय नृत्य का अभिनय प्रस्तुत किया।
देर रात को कोलकाता की केया चंदा एवं साथी ने नृत्य नाटिका प्रस्तुत की इसे दर्शकों ने भूरि-भूरि सराहा और तालियां बजाकर उनका मनोबल बढ़ाया। रामायण मेला के महामंत्री करुणा शंकर द्विवेदी ने संचालन किया। इस मौके पर रामायण मेले के अध्यक्ष राजेश करवरिया ने सभी का स्वागत किया। प्रद्युम्न कुमार दुबे (लालू भैया), जितेन्द्र गोस्वामी, पूर्व नगरपालिका चेयरमैन नीलम करवरिया, शिवमंगल शास्त्री, मोहम्मद युसूफ सिद्दीकी, कलीमुद्दीन बेग, घनश्याम अवस्थी, हरिप्रसाद दुबे अयोध्या, ज्ञानचंद्र गुप्ता, मंसूर अली, मनोज मोहन गर्ग, प्रिंस करवरिया, इंतियाज, पंकज अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
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तुलसी कथा...मुरझाती धर्म बेल को रसमाल कर गई
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। डा. राममनोहर लोहिया प्रेक्षागृह में चल रहे रामायण मेले के प्रथम सत्र में छिंदवाड़ा के सीताराम रामयणी ने कहा राम नाम लेत भव सिंधु सुखाहीं, भगवान राम के नाम में इतनी अपार ऊर्जा है कि बड़े से बड़े संकट का स्वत: निदान होता है। भगवान शंकर की कृपा के बगैर भगवान श्रीराम के दर्शन नहीं हा पाते। झांसी के लोक गायक रघुबीर यादव ने भगवान राम की महिमा का वर्णन भजनों के माध्यम से करते हुए कहा कि ‘हे कामदगिरि हमें शक्ति दो, तुमको राम दुहाई, लंका जाने से पहले राम यही पर आये थे... के गीत सुनाए। झांसी की लोकगायिका सुशीला ने हनुमान द्वारा सीता को अंगूठी देने का प्रसंग ‘ये अंगूठी नहीं मेरे पति की निशानी है’ भजन के माध्यम से सुनाकर दर्शकों को आनंदित किया। डॉ. तीरथदीन पटेल ने ‘राम नाम गंगा अगम गहरी’ भजन द्वारा राम की महिमा का बखान किया। रामभरोसे तिवारी रामकथा व्यास ने श्रद्धा और विश्वास को जीवन की सफलता के लिए आवश्यक बताया। डबरा ग्वालियर के श्रीलाल पचौरी ने गीत के माध्यम से बताया कि लेखनी तुलसी की कथा कमाल कर गई, मुरझाती धर्म बेल को रसमाल कर गई। महाराष्ट्र के पं. वीरेन्द्र प्रसाद रामायणी ने बताया कि मानस में सुखी मीन जहं नीर अगाधा, जिमि हरि शरण न एकौ बाधा’ प्रमाण देते हुए कहा कि जिस प्रकार जल पर मीन (मछली) आनंदित रहती है उसी प्रकार भगवान के चरणों का आश्रय मिल जाने पर उनका भक्त सुखी और प्रफु ल्लित रहता है। प्रथम सत्र का संचालन करते हुए प्रयागराज के डा सीताराम सिंह ‘विश्वबंधु’ ने रामचरितमानस के संदेशों को जीवन में उतारने का आह्वान किया।
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विश्व को विविधता में एकता का संदेश देता मेला
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। रामायण मेले में शनिवार की शाम को विद्वत गोष्ठी की अध्यक्षता प्रयागराज के डॉ. सभापति मिश्र ने की। उन्होंने कहा कि चित्रकूट ऋ षि संस्कृति और कृषि संस्कृति का कें द्र है। यहां के कण-कण में भगवान राम का दिव्य स्वरुप विराजमान है। आंध्र प्रदेश तिरुपति के स्वामी प्रो. आरएस त्रिपाठी ने कहा कि लंका के राक्षस रुपी आतंक के उपसंहार की कथा ‘रामराज्य’ की अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनने पर संपन्न हो जायेगा । रांची (बिहार) के कवि जंग बहादुर पांडेय ने कविता के माध्यम से रामकथा पर विस्तृत विचार व्यक्त किये। चेन्नई के डा अशोक कुमार द्विवेदी ने बताया कि आज श्रीराम जैसे राजनायकों की आवश्यकता है जो देश व आम जनमानस को सर्वोपरि समझता हो।सुल्तानपुर के डा सुशील कुमार पाण्डेय ने कहा कि समाज के सभी वर्गाें में समरसता बढ़ाने के लिए रामकथा को अनेक स्तरों पर उपयोग किया जाना चाहिये। साहित्य जगत के ख्यातिलब्ध अनुसंधानकर्ता डॉ चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ‘ललित’ ने संवत 1732 में लिखी गई रामकथा मर्मज्ञ संत लालदास द्वारा अवधी भाषा में रचित ‘अवध विलास’ की चर्चा की। उन्होंने बताया कि रामकथा के साथ-साथ राम जन्मभूमि विवरण भी इस रामायण में मिला। इस महाकाव्य की दूसरी विशेषता यह है कि महाकवि संत लाल दास ने अयोध्या में रहकर जन्मभूमि को देखा और उसका वर्णन किया। इसमें प्रमुख स्थानों से रामजन्मभूमि की दूरी भी बताई। इस दूरी को धनुष के नाप से बताया गया है।
अयोध्या केे डा हरिप्रसाद दुबे ने बताया कि राम लोक संस्कृति के शिखर हैं। लोक मर्यादा के प्रति वे जागरुक हैं। यह मेला विश्व को विविधता में एकता का संदेश देकर भारतीय लोक परंपरा का संवर्धन कर रहा है। जलपाईगुड़ी के कवि मोहन दुखुन व मुजफ्फरपुर बिहार के डॉ. संजय पंकज ने बताया कि राम हमारे सांस्कृतिक वैभव की विराट पहचान हैं।
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सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में द्वितीय दिवस श्री रघुबीर सिंह यादव व कल्पना चौहान एंड पार्टी ने भजन प्रस्तुत किये। इसका दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से मनोबल बढ़ाया। इसके बाद प्रयागराज की श्रीमती उर्मिला शर्मा ने शिव तांडव और शास्त्रीय नृत्य का मंचन किया। जवाहरलाल नेहरु मणिपुर डांस अकादमी इम्फ ाल के कलाकारों ने अपने लोकनृत्य से दर्शकों का मनमोह लिया। इसके बाद प्रिया रघुवंशी एवं साथी लखनऊ द्वारा शास्त्रीय नृत्य का अभिनय प्रस्तुत किया।
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देर रात को कोलकाता की केया चंदा एवं साथी ने नृत्य नाटिका प्रस्तुत की इसे दर्शकों ने भूरि-भूरि सराहा और तालियां बजाकर उनका मनोबल बढ़ाया। रामायण मेला के महामंत्री करुणा शंकर द्विवेदी ने संचालन किया। इस मौके पर रामायण मेले के अध्यक्ष राजेश करवरिया ने सभी का स्वागत किया। प्रद्युम्न कुमार दुबे (लालू भैया), जितेन्द्र गोस्वामी, पूर्व नगरपालिका चेयरमैन नीलम करवरिया, शिवमंगल शास्त्री, मोहम्मद युसूफ सिद्दीकी, कलीमुद्दीन बेग, घनश्याम अवस्थी, हरिप्रसाद दुबे अयोध्या, ज्ञानचंद्र गुप्ता, मंसूर अली, मनोज मोहन गर्ग, प्रिंस करवरिया, इंतियाज, पंकज अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
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तुलसी कथा...मुरझाती धर्म बेल को रसमाल कर गई
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। डा. राममनोहर लोहिया प्रेक्षागृह में चल रहे रामायण मेले के प्रथम सत्र में छिंदवाड़ा के सीताराम रामयणी ने कहा राम नाम लेत भव सिंधु सुखाहीं, भगवान राम के नाम में इतनी अपार ऊर्जा है कि बड़े से बड़े संकट का स्वत: निदान होता है। भगवान शंकर की कृपा के बगैर भगवान श्रीराम के दर्शन नहीं हा पाते। झांसी के लोक गायक रघुबीर यादव ने भगवान राम की महिमा का वर्णन भजनों के माध्यम से करते हुए कहा कि ‘हे कामदगिरि हमें शक्ति दो, तुमको राम दुहाई, लंका जाने से पहले राम यही पर आये थे... के गीत सुनाए। झांसी की लोकगायिका सुशीला ने हनुमान द्वारा सीता को अंगूठी देने का प्रसंग ‘ये अंगूठी नहीं मेरे पति की निशानी है’ भजन के माध्यम से सुनाकर दर्शकों को आनंदित किया। डॉ. तीरथदीन पटेल ने ‘राम नाम गंगा अगम गहरी’ भजन द्वारा राम की महिमा का बखान किया। रामभरोसे तिवारी रामकथा व्यास ने श्रद्धा और विश्वास को जीवन की सफलता के लिए आवश्यक बताया। डबरा ग्वालियर के श्रीलाल पचौरी ने गीत के माध्यम से बताया कि लेखनी तुलसी की कथा कमाल कर गई, मुरझाती धर्म बेल को रसमाल कर गई। महाराष्ट्र के पं. वीरेन्द्र प्रसाद रामायणी ने बताया कि मानस में सुखी मीन जहं नीर अगाधा, जिमि हरि शरण न एकौ बाधा’ प्रमाण देते हुए कहा कि जिस प्रकार जल पर मीन (मछली) आनंदित रहती है उसी प्रकार भगवान के चरणों का आश्रय मिल जाने पर उनका भक्त सुखी और प्रफु ल्लित रहता है। प्रथम सत्र का संचालन करते हुए प्रयागराज के डा सीताराम सिंह ‘विश्वबंधु’ ने रामचरितमानस के संदेशों को जीवन में उतारने का आह्वान किया।
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विश्व को विविधता में एकता का संदेश देता मेला
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। रामायण मेले में शनिवार की शाम को विद्वत गोष्ठी की अध्यक्षता प्रयागराज के डॉ. सभापति मिश्र ने की। उन्होंने कहा कि चित्रकूट ऋ षि संस्कृति और कृषि संस्कृति का कें द्र है। यहां के कण-कण में भगवान राम का दिव्य स्वरुप विराजमान है। आंध्र प्रदेश तिरुपति के स्वामी प्रो. आरएस त्रिपाठी ने कहा कि लंका के राक्षस रुपी आतंक के उपसंहार की कथा ‘रामराज्य’ की अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनने पर संपन्न हो जायेगा । रांची (बिहार) के कवि जंग बहादुर पांडेय ने कविता के माध्यम से रामकथा पर विस्तृत विचार व्यक्त किये। चेन्नई के डा अशोक कुमार द्विवेदी ने बताया कि आज श्रीराम जैसे राजनायकों की आवश्यकता है जो देश व आम जनमानस को सर्वोपरि समझता हो।सुल्तानपुर के डा सुशील कुमार पाण्डेय ने कहा कि समाज के सभी वर्गाें में समरसता बढ़ाने के लिए रामकथा को अनेक स्तरों पर उपयोग किया जाना चाहिये। साहित्य जगत के ख्यातिलब्ध अनुसंधानकर्ता डॉ चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ‘ललित’ ने संवत 1732 में लिखी गई रामकथा मर्मज्ञ संत लालदास द्वारा अवधी भाषा में रचित ‘अवध विलास’ की चर्चा की। उन्होंने बताया कि रामकथा के साथ-साथ राम जन्मभूमि विवरण भी इस रामायण में मिला। इस महाकाव्य की दूसरी विशेषता यह है कि महाकवि संत लाल दास ने अयोध्या में रहकर जन्मभूमि को देखा और उसका वर्णन किया। इसमें प्रमुख स्थानों से रामजन्मभूमि की दूरी भी बताई। इस दूरी को धनुष के नाप से बताया गया है।
अयोध्या केे डा हरिप्रसाद दुबे ने बताया कि राम लोक संस्कृति के शिखर हैं। लोक मर्यादा के प्रति वे जागरुक हैं। यह मेला विश्व को विविधता में एकता का संदेश देकर भारतीय लोक परंपरा का संवर्धन कर रहा है। जलपाईगुड़ी के कवि मोहन दुखुन व मुजफ्फरपुर बिहार के डॉ. संजय पंकज ने बताया कि राम हमारे सांस्कृतिक वैभव की विराट पहचान हैं।