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किसानों पर एक और आफत, धान में चिल्ली रोग
अमर उजाला ब्यूरो, चित्रकूट
Updated Sat, 24 Sep 2016 11:53 PM IST
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प्रतीकात्मक।
- फोटो : अमर उजाला
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इस बार अधिक बारिश होने से जिले में किसानों ने धान की ज्यादा बुआई की है। उम्मीद थी कि इस बार अच्छी पैदावार होगी, लेकिन अब खेतों मेें धान के पौधों मेें चिल्ली रोग (शीथ ब्लाइट) लग गया है। कृषि अधिकारियों ने बताया कि शीथ ब्लाइट नहीं बल्कि बैक्टीरिया ब्लाइट का प्रकोप है। जिसके लिए किसानों को दवाएं दी जा रही हैं। इसे बुंदेलखंडी भाषा में चिल्ली, रंगा, खैरा व गंधी रोग के नाम से भी जाना जाता है।
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इस बार जिले में 13100 हेक्टेयर में धान की फसल रोपी गई है। जिन क्षेत्रों में पानी की कमी ज्यादा है, वहां पर ये रोग तेजी से फैल रहा है। कुछ अन्य रोगों का भी प्रभाव देखा जा रहा है। पाठा क्षेत्र के जिन स्थानों में ज्यादा बारिश हुई है, वहां तो स्थिति ठीक है। लेकिन गढचपा, माराचंद्रा आदि क्षेत्रों की धान की फसल में रोग लगने लगे हैं। इसी प्रकार भरतकूप क्षेत्र में भी धान की फसल पर संकट दिखाई दे रहा है।
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पत्तियों पर पड़ रही हैं झुर्रियां
चित्रकूट। कृषि विभाग के पीपीएस अधिकारी रमेश कुशवाहा ने बताया कि बैक्टीरिया ब्लाइट रोग से धान के पौधे की पत्ती मुड़ने लगती हैं। पत्तियों में झुरियां पड़ जाती हैं। दवा और पानी अगर समय से न मिले तो पौधे सूख जाते हैं। ताम्रबनी गांव के गनेश सिंह ने बताया कि धान के पौधे में खैरा रोग लगा हुआ है। इससे पत्ती पीली पड़ गई हैं। खोह के रघुवीर नाथ ने बताया कि गंधी कीड़े लग जाने से डंठल टूट रहे हैं। भानपुर गांव के संजय कुमार व मंगलराम पनौटी ने बताया कि बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए जिंक खाद डाल रहे हैं।
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रसायनिक दवाओं को मिलाकर करें छिड़काव
चित्रकूट। जिला कृषि अधिकारी तुलसीराम ने बताया कि बैक्टीरिया ब्लाइट रोग से धान के पौधे से को बचाने के लिए कॉपर 500 ग्राम, डाइमेथस 500 ग्राम, स्टोसाइकिल 3 ग्राम को 100 लीटर पानी में डाल कर शाम को खेत में डालने से यह रोग दूर हो जाएगा। यह दवा कृषि विभाग में उपलब्ध है। इसे किसान विशेषज्ञों की सलाह पर प्रयोग कर सकते हैं।