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शिवशंकर खेलत फाग गौरा संग लिए...
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शिवशंकर खेलत फाग गौरा संग लिए...
अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। धर्मनगरी में पहली बार भजन गायकी प्रस्तुत करने वाली लखनऊ की शुचिता पांडेय ने कहा कि बुंदेलखंड का आल्हा गायन से वह बेहद प्रभावित हैं। राई व दीवारी नृत्य के बारे में सीखने का प्रयास कर रहीं हैं। अवधी समेत गायन की कई शैलियों में पारंगत श्रीमती पांडेय ने सूफी कजरी भोजपुरी गीतों के दो दर्जन मंचों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
पागल कहेला ना रे लोगवा पागल कहेला ना, के हम त नइहर के बानी रसीला के लोगवा पागल कहेला ना की तान के अलावा फाल्गुन माह के शिवशंकर खेलत फाग गौरा संग लिए... के गीतों में उन्हें कई बार पुरस्कार मिला। उन्होंने चित्रकूट में बताया कि बुंदेली विद्या की वह दीवानी हैं यहां इतने बडे़ मंच पर भगवान श्रीराम की कृपा से ही मौका मिला है यह उनके लिए प्रसाद के रूप में है। इस मंच पर लोगों के बैठने की और कई अन्य नामी कलाकारों को बुलाने की जरूरत है। इसके पूर्व वह झांसी, अवध, प्रयाग, ताज, लखनऊ, उत्तर मध्य क्षेत्र, इटावा, बिठूर गंगा, गोरखपुर, कुंभ मेला व अलीगढ़ महोत्सव में प्रस्तुति कर चुकी हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। धर्मनगरी में पहली बार भजन गायकी प्रस्तुत करने वाली लखनऊ की शुचिता पांडेय ने कहा कि बुंदेलखंड का आल्हा गायन से वह बेहद प्रभावित हैं। राई व दीवारी नृत्य के बारे में सीखने का प्रयास कर रहीं हैं। अवधी समेत गायन की कई शैलियों में पारंगत श्रीमती पांडेय ने सूफी कजरी भोजपुरी गीतों के दो दर्जन मंचों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
पागल कहेला ना रे लोगवा पागल कहेला ना, के हम त नइहर के बानी रसीला के लोगवा पागल कहेला ना की तान के अलावा फाल्गुन माह के शिवशंकर खेलत फाग गौरा संग लिए... के गीतों में उन्हें कई बार पुरस्कार मिला। उन्होंने चित्रकूट में बताया कि बुंदेली विद्या की वह दीवानी हैं यहां इतने बडे़ मंच पर भगवान श्रीराम की कृपा से ही मौका मिला है यह उनके लिए प्रसाद के रूप में है। इस मंच पर लोगों के बैठने की और कई अन्य नामी कलाकारों को बुलाने की जरूरत है। इसके पूर्व वह झांसी, अवध, प्रयाग, ताज, लखनऊ, उत्तर मध्य क्षेत्र, इटावा, बिठूर गंगा, गोरखपुर, कुंभ मेला व अलीगढ़ महोत्सव में प्रस्तुति कर चुकी हैं।
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