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Chandauli News: 11 साल पहले 44.5 लाख से बने तीन शवदाह गृह हुए खंडहर, दो में नहीं हुआ एक भी शवदाह

Thu, 24 Sep 2026 01:58 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 24 Sep 2026 01:58 AM IST
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Three crematoriums built 11 years ago at a cost of 44.5 lakh have turned into ruins; not a single cremation has taken place at two of them.
झाड़ झंखाड़ से पटा नरौली का शवदाह गृह। संवाद - फोटो : credit
पीडीडीयू नगर। ग्रामीणों की सहूलियत और गंगा को प्रदूषण से बचाने के लिए करीब 11 साल पहले जिले में तीन शवदाह गृह का निर्माण कराया गया था। 44.50 लाख रुपये करने के बाद भी योजना का उद्देश्य पूरा नहीं हो सका। तीनों शवदाह गृह खंडहर में तब्दील हो गए हैं। कहीं जाने का रास्ता नहीं है तो कहीं कब्जा हो गया है। धानापुर क्षेत्र के नरौली और पंच गंगापुर-मेढ़वा में 14-14 लाख रुपये से बने दो अंत्येष्टि स्थलों पर अब तक एक भी शवदाह नहीं हुआ। वहीं, 16.50 लाख रुपये से बने बलुआ घाट पर बने शवदाह में गंदगी है और उसका चेंबर खराब है। ऐसे में गंगा किनारे खुले में लोग अंतिम संस्कार करते हैं।
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तीनों अन्त्येष्टि स्थलों का निर्माण वर्ष 2015-16 में कराया गया था। सबसे गंभीर स्थिति नरौली के शवदाह गृह की है। 11 साल बाद भी यहां तक पहुंचने के लिए रास्ते की समस्या का समाधान नहीं हो सका। इसके चलते गांव के लोग इसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। आसपास झाड़ियां उगी हैं और भवन खंडहर बन चुका है। वहीं, पंच गंगापुर-मेढ़वा स्थित शवदाह गृह पर अतिक्रमण हो गया है। परिसर में पांटून पुल की लकड़ी, रस्सियां समेत अन्य सामान रखे हुए हैं। आसपास झाड़ियां उगी हैं और गंदगी फैली हुई है।
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इनसेट-
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ग्रामीण बोले, गंगा किनारे खुले में अंतिम संस्कार करना मजबूरी
शवदाह गृहों के निर्माण का एक प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में अंतिम संस्कार के लिए व्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराने के साथ गंगा को प्रदूषण से बचाना भी था। लेकिन बलुआ में शवदाह चेंबर के इस्तेमाल में नहीं आने और नरौली में पहुंच मार्ग न होने के कारण लोग खुले गंगा घाट पर ही अंतिम संस्कार करते हैं। इससे सरकारी योजना की उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बने हुए शवदाह गृहों को उपयोग लायक बनाया जाए तो लोगों को सुविधा मिलने के साथ नदी किनारे खुले में होने वाले अंतिम संस्कार को भी कम किया जा सकता है।
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कोट-

जहां रास्ता ही नहीं था, वहां शवदाह गृह बनाना गलत है। सभी शवदाह गृहों की जांच कराई जाएगी और उसके बाद व्यवस्थाएं दुरुस्त कराने के साथ कार्रवाई भी की जाएगी। - आकांक्षा सिंह, एसडीएम

झाड़ झंखाड़ से पटा नरौली का शवदाह गृह। संवाद

झाड़ झंखाड़ से पटा नरौली का शवदाह गृह। संवाद- फोटो : credit

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