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Chandauli News: एमसीएच विंग में इलाज तो होगा, लेकिन खून की जांच और अल्ट्रासाउंड नहीं
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चंदौली। पं. कमलापति त्रिपाठी जिला अस्पताल के एमसीएच विंग में मरीजों का इलाज तो होता है लेकिन उन्हें न तो दवाएं मिलती हैं और न जांच हो पाती है। ओपीडी में 150 से ज्यादा मरीज आते हैं, जिन्हें खून और अल्ट्रासाउंड जांच बाहर करानी पड़ती है। दवाएं भी बाजार से खरीदनी पड़ती हैं। वहीं, रोज तीन से चार गर्भवती महिलाओं को रेफर कर दिया जाता है।
पं. कमलापति त्रिपाठी अस्पताल में बच्चों और गर्भवती महिलाओं के इलाज के लिए मातृ शिशु विंग बनाया गया है। यहां अस्पताल प्रशासन की लापरवाही और डॉक्टरों व कर्मचारियों की मनमानी के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भर्ती होने वाली मरीजों की जांच तो हो जाती है लेकिन ओपीडी के मरीजों को यह सुविधा नहीं मिलती। ऐसे में रोज 10 से 12 गर्भवती महिलाओं को बाहर जांच करानी पड़ती है। इसके अलावा डॉक्टर बाहर की दवाएं लिखते हैं। वहीं, तीन से चार गर्भवती महिलाओं को रोज रेफर कर दिया जाता है। लैब इंचार्ज राजेश कुमार ने बताया कि यहां उन्हीं मरीजों की जांच होती है, जो भर्ती होते हैं।
कोट-- -
शासन से मिलने वाली सभी सुविधाएं मरीजों को दी जाती हैं। ब्लड जांच की कुछ सामग्री नहीं है, जिसकी मांग की गई है। सभी दवाओं की उपलब्धता एक सप्ताह के अंदर हो जाएगी। इसके लिए शासन को डिमांड भेजी गई है। - डाॅ. केसी सिंह, सीएमएस, मातृ शिशु विंग, चंदौली।
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पं. कमलापति त्रिपाठी अस्पताल में बच्चों और गर्भवती महिलाओं के इलाज के लिए मातृ शिशु विंग बनाया गया है। यहां अस्पताल प्रशासन की लापरवाही और डॉक्टरों व कर्मचारियों की मनमानी के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भर्ती होने वाली मरीजों की जांच तो हो जाती है लेकिन ओपीडी के मरीजों को यह सुविधा नहीं मिलती। ऐसे में रोज 10 से 12 गर्भवती महिलाओं को बाहर जांच करानी पड़ती है। इसके अलावा डॉक्टर बाहर की दवाएं लिखते हैं। वहीं, तीन से चार गर्भवती महिलाओं को रोज रेफर कर दिया जाता है। लैब इंचार्ज राजेश कुमार ने बताया कि यहां उन्हीं मरीजों की जांच होती है, जो भर्ती होते हैं।
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कोट
शासन से मिलने वाली सभी सुविधाएं मरीजों को दी जाती हैं। ब्लड जांच की कुछ सामग्री नहीं है, जिसकी मांग की गई है। सभी दवाओं की उपलब्धता एक सप्ताह के अंदर हो जाएगी। इसके लिए शासन को डिमांड भेजी गई है। - डाॅ. केसी सिंह, सीएमएस, मातृ शिशु विंग, चंदौली।

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