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अफसरोें की सुस्ती ने रोकी विकास की रफ्तार
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चंदौली। अधिकारियों की लापरवाही और सुस्ती ने जिले के विकास कार्यों को रोक दिया है। इसमें 23 विभाग मुख्य हैं जिन्होंने जिला योजना के तहत प्रस्ताव देने के बाद भी बजट प्रस्तुत नहीं किया और धन नहीं लिया। जिससे उनके यहां प्रस्तावित विकास के कार्य नहीं हुए। चालू वित्त वर्ष में 265.84 करोड़ का प्रस्ताव था जिसमें से सिर्फ आठ विभागों को 36.28 करोड़ रुपये मिले।
वहीं जिन विभागों ने बजट बनाकर भेजा भी तो शासन से पूरी धनराशि अवमुक्त नहीं हो सकी है। इससे उन विभागों के विकास के कार्य भी प्रभावित हुए हैं। इसमें कृषि विभाग ने जिला योजना में 24 लाख का प्रस्ताव दिया था, लेकिन इसमें केवल 4.28 लाख ही शासन से अवमुक्त हुआ। इसी प्रकार पशुपालन विभाग को 360 लाख में 59.55 लाख, दुग्ध विकास को 455 लाख में 63.25 लाख, वन विभाग को 2407.93 में 451.80 लाख, खादी ग्रामोद्योग को 3.94 लाख में दो लाख, ग्रामीण आवास में 2567 में 2281 लाख, अनुसूचित जाति कल्याण में 615 लाख में 185.85 लाख, महिला कल्याण में 950 लाख में 576 लाख अवमुक्त हुए। बाकी 23 विभागों ने तो बजट में अपना प्रस्ताव दे दिया मगर शासन से धन की मांग ही अब तक नहीं की है।
चंदौली। जिला योजना में प्रस्तावित बजट में 23 ऐसे विभाग हैं जिन्हें विकास के नाम पर अब तक कुछ नहीं मिल सका है। जबकि मार्च में वित्तीय वर्ष समाप्त होने जा रहा है। इन विभागों के जिम्मेदारों ने बजट के लिए न तो प्रस्ताव दिया और न ही रुचि दिखाई। इसमें सहकारिता, ग्राम्य विकास के विशेष कार्यक्रम, सिंचाई एवं जल संसाधन, रोजगार कार्यक्रम, पंचायतीराज, सामुदायिक विकास, निजी लघु सिंचाई, राजकीय लघु सिंचाई, अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत , सड़क एवं पुल, पर्यावरण, पर्यटन, प्राथमिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, प्रादेशिक विकास दल, ऐलोपैथी, परिवार कल्याण, होम्योपैथी, आयुर्वेद, नगर विकास, पिछड़ी जाति कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण, शिल्पकार प्रशिक्षण, समाज कल्याण, विकलांग कल्याण, महिला कल्याण के लिए शासन से जिला योजना में कोई धनाराशि अवमुक्त नहीं हुई है।
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जिला योजना की बैठक में संबंधित विभागों के द्वारा विकास कार्यों के लिए प्रस्ताव दिया जाता है। इसमें शासन से बजट आवंटित कराने की जिम्मेदारी विभागीय अधिकारियों की होती है। लेकिन 23 विभागों को अभी तक कोई बजट नहीं मिला है। राजीव श्रीवास्तव, अर्थ संख्याधिकारी।
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वहीं जिन विभागों ने बजट बनाकर भेजा भी तो शासन से पूरी धनराशि अवमुक्त नहीं हो सकी है। इससे उन विभागों के विकास के कार्य भी प्रभावित हुए हैं। इसमें कृषि विभाग ने जिला योजना में 24 लाख का प्रस्ताव दिया था, लेकिन इसमें केवल 4.28 लाख ही शासन से अवमुक्त हुआ। इसी प्रकार पशुपालन विभाग को 360 लाख में 59.55 लाख, दुग्ध विकास को 455 लाख में 63.25 लाख, वन विभाग को 2407.93 में 451.80 लाख, खादी ग्रामोद्योग को 3.94 लाख में दो लाख, ग्रामीण आवास में 2567 में 2281 लाख, अनुसूचित जाति कल्याण में 615 लाख में 185.85 लाख, महिला कल्याण में 950 लाख में 576 लाख अवमुक्त हुए। बाकी 23 विभागों ने तो बजट में अपना प्रस्ताव दे दिया मगर शासन से धन की मांग ही अब तक नहीं की है।
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चंदौली। जिला योजना में प्रस्तावित बजट में 23 ऐसे विभाग हैं जिन्हें विकास के नाम पर अब तक कुछ नहीं मिल सका है। जबकि मार्च में वित्तीय वर्ष समाप्त होने जा रहा है। इन विभागों के जिम्मेदारों ने बजट के लिए न तो प्रस्ताव दिया और न ही रुचि दिखाई। इसमें सहकारिता, ग्राम्य विकास के विशेष कार्यक्रम, सिंचाई एवं जल संसाधन, रोजगार कार्यक्रम, पंचायतीराज, सामुदायिक विकास, निजी लघु सिंचाई, राजकीय लघु सिंचाई, अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत , सड़क एवं पुल, पर्यावरण, पर्यटन, प्राथमिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, प्रादेशिक विकास दल, ऐलोपैथी, परिवार कल्याण, होम्योपैथी, आयुर्वेद, नगर विकास, पिछड़ी जाति कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण, शिल्पकार प्रशिक्षण, समाज कल्याण, विकलांग कल्याण, महिला कल्याण के लिए शासन से जिला योजना में कोई धनाराशि अवमुक्त नहीं हुई है।
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जिला योजना की बैठक में संबंधित विभागों के द्वारा विकास कार्यों के लिए प्रस्ताव दिया जाता है। इसमें शासन से बजट आवंटित कराने की जिम्मेदारी विभागीय अधिकारियों की होती है। लेकिन 23 विभागों को अभी तक कोई बजट नहीं मिला है। राजीव श्रीवास्तव, अर्थ संख्याधिकारी।