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रामचरितमानस लौकिक और पारलौकिक दोनों प्रकार के सुख प्रदान करने वाला ग्रंथ : सिया जी

Sat, 31 Oct 2026 01:04 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 31 Oct 2026 01:04 AM IST
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The Ramcharitmanas is a text that bestows both worldly and transcendental happiness: Siya Ji
पीडीडीयू नगर। चंदौली नगर पंचायत स्थित श्रीराम जानकी शिव मठ मंदिर परिसर में आयोजित 40वें मानस सम्मेलन के दूसरे दिन बृहस्पतिवार की रात श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर रहे। मानस एवं आध्यात्म प्रचार समिति की ओर से आयोजित सम्मेलन में कथावाचकों ने संगीतमय कथा के माध्यम से रामचरितमानस की महिमा, भगवान श्रीराम के आदर्शों और मानव जीवन में मर्यादा व कर्तव्य के महत्व का वर्णन किया। मानस कोकिला सिया जी ने कहा कि रामचरितमानस लौकिक और पारलौकिक, दोनों प्रकार के सुख प्रदान करने वाला ग्रंथ है।
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मानस कोकिला सिया जी ने रामचरितमानस की व्याख्या करते हुए कहा कि मानस एक धार्मिक संविधान है, जिसमें गवाही से नहीं, बल्कि आह से विजय प्राप्त होती है। शबरी की पुकार पर भगवान श्रीराम उसकी कुटिया में पहुंचे तो माता जानकी की पुकार पर मिथिला गए। कहा कि रामचरितमानस लौकिक और पारलौकिक, दोनों प्रकार के सुख प्रदान करने वाला ग्रंथ है। राम नाम कल्पतरु के समान है जो भक्तों की कामनाएं पूर्ण करता है। उन्होंने कहा कि स्वर्ग का कल्प वृक्ष केवल सांसारिक सुख देता है, जबकि राम नाम लौकिक सुख के साथ पारलौकिक आनंद भी प्रदान करता है। जौनपुर से आए कथावाचक वशिष्ठ नारायण उपाध्याय ने संगीतमय कथा और भक्ति गीतों के माध्यम से भगवान श्रीराम की महिमा का बखान किया। वहीं, कथावाचक चंद्रमणि दास ने रामचरितमानस की रचना के उद्देश्य और भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला।
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उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम का जीवन मर्यादा, त्याग, सेवा और कर्तव्य निष्ठा का आदर्श है। उनके आदर्शों को अपनाकर मनुष्य अपना जीवन सार्थक बना सकता है। कथावाचक कुमकुम मिश्रा ने भगवान की महिमा का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति, प्रेम और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। इस दौरान मुख्य यजमान जयशंकर द्विवेदी, समिति के संस्थापक हरिद्वार सिंह, कोषाध्यक्ष शिव बच्चन सिंह, आशुतोष द्विवेदी उर्फ सोनू, पंकज तिवारी, राज नारायण विश्वकर्मा और मीडिया प्रभारी गणेश अग्रहरि आदि मौजूद रहे।
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