सावित्री की तरह यमराज के हाथों से पति के प्राणों को वापस लेने का संकल्प लेते हुए सुहागिन महिलाओं ने शुक्रवार को वटवृक्ष की पूजा की। निराजल व्रत रहते हुए महिलाओं ने वट वृक्ष के नीचे सावित्री की पूजा की और कच्चे धागे का फेरा लगाया। इस दौरान पति के दीर्घायु की कामना की। सुबह से ही तेज धूप खिली होने के बाद भी वट वृक्ष के नीचे पूजा अर्चना करने और फेरे लगाने वालों को तांता लगा रहा। ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को वट वृक्ष की पूजा अर्चना करने और सावित्री के यमराज से लड़कर पति सत्यवान के प्राणों की रक्षा की कथा सुनने की मान्यता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से जिस तरह सत्यवान के प्राण यमराज ने सावित्री को वापस कर दिए थे। वे अखंड सौभाग्यवती होंगी। इसी मान्यता के चलते शुक्रवार की सुबह ही महिलाओं ने स्नान ध्यान के बाद सोलहों शृंगार किया और निराजल व्रत रहते हुए घर के समीप के वट वृक्ष के नीचे पहुंची। वटवृक्ष में विद्यमान देवी- देवताओं की पूजा अर्चना की। महिलाओं ने माता सावित्री को फल, फूल, पंखा, शृंगार वस्तु, वस्त्र, धूप, दीप, नवैद्य, पकवान आदि अर्पित किए। बाद में अखंड सौभाग्य की कामना से कच्चे धागे को पेड़ में बांधा और पुरोहितों से सावित्री, सत्यवान और यमराज की कथा सुनी। नगर के चतुर्भुजपुर, काली महाल, शाहकुटी, मैनातली, न्यू महाल , लाठ नंबर एक और दो, पराहपुर, अलीनगर, परशुरामपुर के साथ रेलवे के गया कॉलोनी, आरपीएफ कॉलोनी, शास्त्री कॉलोनी, डीजल कालोनी, मानसनगर, सेंट्रल कालोनी सहित विभिन्न कॉलोनियों में पूजन अर्चन करने वालों का तांता लगा रहा।