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गलत कार्यों से होती है धर्म की हानि
चंदौली ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Fri, 28 Oct 2016 01:50 AM IST
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मानस एवं अध्यात्म प्रचार समिति की ओर से आयोजित श्रीराम कथा का बुधवार की रात समापन हुआ। इस दौरान कथावाचकों ने भक्तों को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन के विभिन्न प्रसंगों को सुनाया। भक्तों के जयकारे से पूरा मंदिर प्रांगण देर रात तक गूंजता रहा।
कथावाचक शैलेंद्रानन्द भारती ने कहा कि जब सामान्य लोग द्वारा अनैतिक व गलत कार्य किया जाता है तो उसे धर्म की हानि कहते हैं। पापाचार, अत्याचार, भ्रष्टाचार से भी धर्म हानि होती है, परन्तु यह कार्य किसी विशिष्ट या सगे द्वारा होता है इसे धर्म की ग्लानि कहते हैं। व्यक्तिचार सामान्य व्यक्ति द्वारा होती है तो धर्म की हानि होती है, परन्तु यही कुकर्म अपने खास द्वारा होता है तो इस धर्म की ग्लानि कहते हैं।
मानव जीवन मिला है तो ईश्वर का भजन करें। साध्वी जयंती ने कहा कि रामराज की स्थापना में सबकी भागीदारी जरूरी है। लंका में राक्षसों का नाश कर प्रभु श्रीराम ने सीता, लक्ष्मण व अपने सहयोगियों के साथ अयोध्या पुष्पक विमान से आते समय रणभूमि सीता जी को दिखाते हैं। अयोध्या आने पर सिंहासन पर आसीन होते हैं। प्रभु श्रीराम का तिलक होते ही पूरे राज्य में समता आ जाती है।
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इस दौरान मंदिर परिसर में दीपों को प्रकाशित किया गया था। समापन अवसर पर पूर्णाहुति व हवन भी किया गया। इस मौके पर जयशंकर द्विवेदी, भानु प्रताप शर्मा, शिव नारायण शास्त्री, मिठाई गिरि, अनिल कुमार पांडेय, संतोष कुमार सिंह, हरिहर विश्वकर्मा, विजयी सिंह, हरिद्वार सिंह राजेंद्र कुमार सिंह आदि उपस्थित रहे। संचालन मानस मयंक व धन्यवाद ज्ञापन हरिद्वार सिंह ने किया।
कथावाचक शैलेंद्रानन्द भारती ने कहा कि जब सामान्य लोग द्वारा अनैतिक व गलत कार्य किया जाता है तो उसे धर्म की हानि कहते हैं। पापाचार, अत्याचार, भ्रष्टाचार से भी धर्म हानि होती है, परन्तु यह कार्य किसी विशिष्ट या सगे द्वारा होता है इसे धर्म की ग्लानि कहते हैं। व्यक्तिचार सामान्य व्यक्ति द्वारा होती है तो धर्म की हानि होती है, परन्तु यही कुकर्म अपने खास द्वारा होता है तो इस धर्म की ग्लानि कहते हैं।
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मानव जीवन मिला है तो ईश्वर का भजन करें। साध्वी जयंती ने कहा कि रामराज की स्थापना में सबकी भागीदारी जरूरी है। लंका में राक्षसों का नाश कर प्रभु श्रीराम ने सीता, लक्ष्मण व अपने सहयोगियों के साथ अयोध्या पुष्पक विमान से आते समय रणभूमि सीता जी को दिखाते हैं। अयोध्या आने पर सिंहासन पर आसीन होते हैं। प्रभु श्रीराम का तिलक होते ही पूरे राज्य में समता आ जाती है।
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इस दौरान मंदिर परिसर में दीपों को प्रकाशित किया गया था। समापन अवसर पर पूर्णाहुति व हवन भी किया गया। इस मौके पर जयशंकर द्विवेदी, भानु प्रताप शर्मा, शिव नारायण शास्त्री, मिठाई गिरि, अनिल कुमार पांडेय, संतोष कुमार सिंह, हरिहर विश्वकर्मा, विजयी सिंह, हरिद्वार सिंह राजेंद्र कुमार सिंह आदि उपस्थित रहे। संचालन मानस मयंक व धन्यवाद ज्ञापन हरिद्वार सिंह ने किया।