इस वर्ष गर्मी ने पिछले 122 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। अप्रैल में ही तापमान 43 डिग्री पार कर गया है। सुबह से ही आसमान से मानों आग बरस रही हो। मुंह को झुलसाने वाले लू के थपेड़ों ने राह मुश्किल कर दिया है। सुबह के 10 बजे से ही सड़कों पर छाने वाला सन्नाटा सूर्यास्त के बाद ही टूट रहा है। गर्मी से पशु पक्षी भी बेहाल हैं। सोमवार को भी पारा 43 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा। ऐसे में लोग घरों से निकलने से बचते रहे।
इन दिनों गर्मी ऐसी पड़ रही है कि सुबह से ही सूरज के ताप को सहना मुश्किल हो जा रहा है। दोपहर में चिलचिलाती धूप व लू के थपेड़े लोगों के पांव थाम दे रहे हैं। छांव की तलाश में लोग इधर-उधर भटक रहे हैं। सड़कों पर दिन रात चक्रमण करने वाले छुट्टा पशु भी सुबह के नौ बजे के बाद गायब हो जा रहे हैं। वे छांव तलाशकर दोपहर बिताने के बाद ही सड़कों पर दिख रहे हैं। वहीं पक्षी भी सुबह से ही घोसलों व पेड़ों की झुरमुट में गुम हो जा रहे हैं। शाम के बाद ही आसमान पर उनकी परवाज दिख रही है। अप्रैल माह के दूसरे पखवारे में गर्मी ने प्रचंड रूप धारण कर लिया है। सुबह सूरज की किरणों के साथ गर्मी का असर शुरू हो जा रहा है, जो दिन चढ़ने के साथ तीखा होता जा रहा है। दिन चढ़ने के साथ ही गर्म हवा के झोकों से राह चलना मुश्किल हो जा रहा है। लू के थपेड़ों ने राहगीरों को परेशान कर दिया है। इससे कस्बा, बाजार में चहल-पहल कम दिख रही है। गर्मी से बचने के लिए लोग शीतल पेय व नीबू पानी का सेवन कर रहे हैं।