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खुद की भूख मिटाने के साथ सच लिखने की है चुनौती : प्रो.मनोज सिंह
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हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर चंदौली प्रेस क्लब की ओर से शुक्रवार को निजी होटल में हिंदी पत्रकारिता की परंपरा, प्रगति और भविष्य पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया था। मुख्य अतिथि बीएचयू के हिंदी विभाग के वरिष्ठ प्रो. मनोज सिंह ने कहा कि आज पत्रकारों के लिए चुनौती का समय है। खुद की भूख मिटाने के साथ सच लिखने की चुनौती है।
विशिष्ट अतिथि व्योमेश शुक्ल ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत 19वीं शताब्दी में हुई थी, जब भारत में ब्रिटिश शासन था। इस दौरान, हिंदी पत्रकारिता ने देश की स्वतंत्रता की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हिंदी पत्रकारिता दिवस हिंदी पत्रकारिता की समृद्ध परंपरा को दर्शाता है। यह दिन हमें हिंदी पत्रकारिता के महत्व और इसके योगदान को पहचानने का अवसर प्रदान करता है। वरिष्ठ पत्रकार विजय विनीत ने कहा कि पत्रकारिता में आज भी वह ताकत है कि वह सबकुछ बदल सकती है। समाज के दबे-कुचले वर्ग की आवाज उठानी चाहिए। कहा कि हिंदी एआई जर्नलिज्म पर भविष्य में कई संभावनाएं और चुनौतियां हो सकती हैं। अध्यक्षता डॉ. अनिल यादव, मुख्य संयोजक डॉ. विनय वर्मा और संचालन डॉ. कमलेश तिवारी ने किया। आनंद सिंह सरदार महेंद्र सिंह, पवन तिवारी, बृजेश कुमार, संदीप निगम, कमलेश तिवारी, कृष्णमोहन गुप्ता, कार्तिकेय पांडेय रहे।
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विशिष्ट अतिथि व्योमेश शुक्ल ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत 19वीं शताब्दी में हुई थी, जब भारत में ब्रिटिश शासन था। इस दौरान, हिंदी पत्रकारिता ने देश की स्वतंत्रता की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हिंदी पत्रकारिता दिवस हिंदी पत्रकारिता की समृद्ध परंपरा को दर्शाता है। यह दिन हमें हिंदी पत्रकारिता के महत्व और इसके योगदान को पहचानने का अवसर प्रदान करता है। वरिष्ठ पत्रकार विजय विनीत ने कहा कि पत्रकारिता में आज भी वह ताकत है कि वह सबकुछ बदल सकती है। समाज के दबे-कुचले वर्ग की आवाज उठानी चाहिए। कहा कि हिंदी एआई जर्नलिज्म पर भविष्य में कई संभावनाएं और चुनौतियां हो सकती हैं। अध्यक्षता डॉ. अनिल यादव, मुख्य संयोजक डॉ. विनय वर्मा और संचालन डॉ. कमलेश तिवारी ने किया। आनंद सिंह सरदार महेंद्र सिंह, पवन तिवारी, बृजेश कुमार, संदीप निगम, कमलेश तिवारी, कृष्णमोहन गुप्ता, कार्तिकेय पांडेय रहे।
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