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धान के कटोरे में जल्द लहलहाएगी स्ट्राबेरी की फसल, होगा दोगुना मुनाफा

Sat, 29 Oct 2022 01:00 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 29 Oct 2022 01:00 AM IST
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Strawberry crop will flourish in the district soon
पीडीडीयू नगर। धान के कटोरे में जल्द ही स्ट्राबेरी की फसल लहलहाने वाली है। स्ट्राबेरी की खेती कर किसान दोगुना लाभ कमाएंगे। इस वर्ष चंदौली के कृषि विज्ञान केंद्र में दो बिस्वा में इसकी खेती कराई जा रही है। इसको दिखाकर किसानों को खेती के लिए उत्साहित और प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके लिए पूना से प्लांट मंगाए गए हैं। एक पौधे से आठ सौ से डेढ़ किलोग्राम तक का फल निकलेगा।
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कृषि विज्ञान के प्रक्षेत्र में चालू सीजन में दो बिस्वा में स्ट्राबेरी की खेती कराई जा रही है। इसका किसानों के समक्ष प्रदर्शन कराया जाएगा। साथ ही विज्ञानी किसानों को खेती के बाबत प्रशिक्षित भी करेंगे । सरकार की ओर से किसानों की आय दोगुनी करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसके मद्देनजर किसानों का रुझान व्यवसायिक खेती की ओर किया जा रहा, ताकि किसान धान व गेहूं के अतिरिक्त अन्य प्रकार की खेती कर मुनाफा कमा सके। इसके तहत केविके के विज्ञानियों की ओर से प्रक्षेत्र में चालू सीजन में स्ट्रा बेरी की खेती कराई जा रही है। खेती के लिए पूना महाराष्ट्र से विंटर डाउन प्रजाति का पौधा मंगाया गया है। एक पौधे की कीमत नौ रुपये है।
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केविके प्रभारी डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि स्ट्राबेरी की खेती 15 सितंबर से 25 अक्टूबर के मध्य करनी चाहिए। इसके लिए पहले खेत की जोताई कर मिट्टी में यूरिया, डीएपी व पोटाश का मिश्रण किया जाता है।
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इसके बाद मल्चिंग विधि से एक फीट के आसपास बेड बनाकर पौधे से पौधे की दूरी एक फीट पर प्लांट लगाया जाता है। वहीं पौधा लगाने के पहले दिन रिडोमिल दवा एक ग्राम प्रति लीटर की दर से दी जाती है। अगले दिन इतनी ही मात्रा में ह्यूमिक एसीड, तीसरे दिन 19-19 एन पीके व चौथे दिन कैल्सियम नाइट्रेट का छिड़काव किया जाता है। 21 दिन तक इस ट्रीटमेंट को अपनाया जाता है, ताकि पौधे का विकास बेहतर हो सके। दो माह बाद पौधों में फल निकलने लगते हैं। एक पौधे से आठ सौ से डेढ़ किलोग्राम तक फल निकलते हैं। कहा कि हर तीसरे दिन पानी देना जरूरी है, ताकि पौधे सूखने न पाएं।
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