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विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासियों के अधिकार बताए
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पीडीडीयू नगर। विश्व आदिवासी दिवस पर विभिन्न संगठनों की ओर से कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसमें आदिवासी समाज के महत्व को बताया गया। देश के प्रति आदिवासी समाज के किये गये कार्यों के बारे में चर्चा की गई । गोष्ठी में आदिवासियों के अधिकारों के बारे में बताया गया।
गोंड वेलफेयर इंप्लाइज एसोसिएशन की ओर से गोधना तिराहा पर एक होटल के परिसर में आयोजित समारोह में आदिवासी समाज के लोगों को उनके अधिकार बताए गए। कार्यक्रम की शुरूआत आदिवासी समाज के महापुरुषों की पूजा अर्चना कर हुई। इस दौरान पांरपरिक वेश में आदिवासी समाज की झलक प्रस्तुत की गई। मुख्य अतिथि के रूप में आए मनोज धुर्वा ने आदिवासी समाज के वैधानिक अधिकारों के बारे में बताया। वहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को बधाई दी गई। इस मौके पर रामदुलारे, रमापति, विजय बार्डर, मनोज गोंड, धुरन, कैलाश खरवार, अनुप गोंड, अनिल कुमार साहू, गुलाब, सुरेश गोंड, निधि देवी, अरुण प्रकाश, रामसखी गोंड, सिद्धार्थ गोंड, कमलेश गोंड , रविकांत गोंड, संदीप गोंड, रमसुदंर गोंड रहे। अध्यक्षता श्रवण गोंड ने और संचालन संतोष गोंड ने की। इसी तरह भारतवर्षीय गोंड आदिवासी महासभा समिति की बैठक नगर के परशुरामपुर स्थित कैंप कार्यालय पर हुई। इसमें विश्व आदिवासी दिवस की महत्ता पर प्रकाश डाला गया। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि यूएनओ की नौ अगस्त 1982 को हुई बैठक में यूएनडब्लूजीईपी गठित हुई। इसके माध्यम से विश्व के सभी मूल निवासियों के जीवन शैली को विस्तृत रूप से अध्ययन किया गया। इसमें पाया कि आदिवासी गरीबी, अशिक्षा,बंधुआ मजदूरी, स्वास्थ्य, बेरोजगारी से ग्रसित हैं। इसके बाद से नौ अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाने की घोषणा की गई। कहा कि पूरे विश्व में आदिवासी समाज 70 प्रतिशत से अधिक है। 2011 के जनगणना के अनुसार 10 करोड़ 40 लाख आदिवासी 8.2 प्रतिशत भारत में ही रहते हैं। गोंड, खरवार,चेरी, मुंडा, उराव, जारवा, कोल, संथाल, मीना, होथारू, भोक्सा, जानसारी आदि आदिवासी भारतीय आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति शब्द को संबंधित करते हैं।सभा में राजकुमार गोंड, प्यारे लाल गोंड, श्रीकृष्ण गोंड, रमाशंकर प्रसाद, घुरहू प्रसाद, हरिशचंद, विजयी, अजय, सुरेश प्रसाद, रामअधार, मिठाई लाल, सुदामा रहे ।
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गोंड वेलफेयर इंप्लाइज एसोसिएशन की ओर से गोधना तिराहा पर एक होटल के परिसर में आयोजित समारोह में आदिवासी समाज के लोगों को उनके अधिकार बताए गए। कार्यक्रम की शुरूआत आदिवासी समाज के महापुरुषों की पूजा अर्चना कर हुई। इस दौरान पांरपरिक वेश में आदिवासी समाज की झलक प्रस्तुत की गई। मुख्य अतिथि के रूप में आए मनोज धुर्वा ने आदिवासी समाज के वैधानिक अधिकारों के बारे में बताया। वहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को बधाई दी गई। इस मौके पर रामदुलारे, रमापति, विजय बार्डर, मनोज गोंड, धुरन, कैलाश खरवार, अनुप गोंड, अनिल कुमार साहू, गुलाब, सुरेश गोंड, निधि देवी, अरुण प्रकाश, रामसखी गोंड, सिद्धार्थ गोंड, कमलेश गोंड , रविकांत गोंड, संदीप गोंड, रमसुदंर गोंड रहे। अध्यक्षता श्रवण गोंड ने और संचालन संतोष गोंड ने की। इसी तरह भारतवर्षीय गोंड आदिवासी महासभा समिति की बैठक नगर के परशुरामपुर स्थित कैंप कार्यालय पर हुई। इसमें विश्व आदिवासी दिवस की महत्ता पर प्रकाश डाला गया। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि यूएनओ की नौ अगस्त 1982 को हुई बैठक में यूएनडब्लूजीईपी गठित हुई। इसके माध्यम से विश्व के सभी मूल निवासियों के जीवन शैली को विस्तृत रूप से अध्ययन किया गया। इसमें पाया कि आदिवासी गरीबी, अशिक्षा,बंधुआ मजदूरी, स्वास्थ्य, बेरोजगारी से ग्रसित हैं। इसके बाद से नौ अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाने की घोषणा की गई। कहा कि पूरे विश्व में आदिवासी समाज 70 प्रतिशत से अधिक है। 2011 के जनगणना के अनुसार 10 करोड़ 40 लाख आदिवासी 8.2 प्रतिशत भारत में ही रहते हैं। गोंड, खरवार,चेरी, मुंडा, उराव, जारवा, कोल, संथाल, मीना, होथारू, भोक्सा, जानसारी आदि आदिवासी भारतीय आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति शब्द को संबंधित करते हैं।सभा में राजकुमार गोंड, प्यारे लाल गोंड, श्रीकृष्ण गोंड, रमाशंकर प्रसाद, घुरहू प्रसाद, हरिशचंद, विजयी, अजय, सुरेश प्रसाद, रामअधार, मिठाई लाल, सुदामा रहे ।
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