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राजपिपला से डेढ़ हजार श्रमिकों को लेकर पहुंची श्रमिक स्पेशल ट्रेन
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पीडीडीयू रेलवे स्टेशन पर श्रमिकों की सूचि तैयार करते एडीएम संजय कुमार।
- फोटो : CHANDAULI
पीडीडीयू नगर। कोविड 19 की वजह से देश मे लागू लॉक डाउन की वजह से गुजरात के राजपिपला में फंसे श्रमिकों को लेकर श्रमिक स्पेशल ट्रेन बृहस्पतिवार को स्थानीय स्टेशन पर शाम करीब सात बजे पहुंची। ट्रेन से आए 15 सौ श्रमिकों को रोडवेज की बसों से विभिन्न जिलों में पहुंचाया गया। इस दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम रहे। श्रमिकों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई और नाम पता लिखा गया। कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से देश में लागू लॉकडाउन की वजह से बड़ी संख्या में मजदूर, छात्र, पर्यटक जहां तहां फंस गए।
प्रदेश सरकार की पहल पर गुजरात के राजपिपला में फंसे प्रदेश के चंदौली सहित आजमगढ़, गोरखपुर, गाजीपुर, जौनपुर, बलिया, भदोही, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, बस्ती, मउ, मिर्जापुर, सोनभद्र, कुशीनगर सहित विभिन्न जनपदों के 1500 से अधिक श्रमिकों को लेकर श्रमिक स्पेशल ट्रेन बृहस्पतिवार की शाम सात बजे पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पहुंची। सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए ट्रेन से श्रमिकों को उतारा गया और जांच पड़ताल के बाद बाहर निकाला गया और बसों में बैठाया गया। एडीएम संजय कुमार, वरीय मंडल सुरक्षा आयुक्त आशीष मिश्र सहित अधिकारियों की टीम स्टेशन पर व्यवस्था संभालने में जुटी रही। देर रात तक श्रमिकों को बसों से रवाना करने का सिलसिला चलता रहा। इस दौरान आने वाले श्रमिकों को लेकर जाने वाली बस में जिन होमगार्ड की ड्यूटी लगी थी, उन्होंने जाने से मना कर दिया। इस पर अधिकारियों में खलबली मच गई। होमगार्डों का कहना था कि वापसी में बस उन्हें आधे रास्ते छोड़ देती है इससे घर पहुंचने में दिक्कत होती है। बाद में अधिकारियों ने समझाबुझाकर उन्हें बस के साथ भेजा। वहीं इस ट्रेन से कुछ यात्रियों को प्रयागराज में उतरना था लेकिन किन्हीं कारणों से वहां नहीं उतर सके। तो सभी लोगों को यहीं उतारना पड़ा। ऐसे में रोडवेज बस कम पड़ गई। तब प्रशासन ने निजी स्कूलों की बसों से उन्हें घरों के लिए रवाना किया।
पीडीडीयू नगर। बड़े अरमान लेकर प्रदेश में कमाने गए थे। कमाई हुई तो परिवार का संबल भी बने लेकिन लॉक डाउन ने सब कुछ छीन लिया। सब कुछ गंवा कर वापस लौटना पड़ा। कुछ इसी तरह की वेदना गुजरात से लौटे श्रमिकों ने व्यक्त की।
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वाराणसी निवासी किरण यादव और मुकेश यादव सूरत में निजी फैक्टरी में काम कर रहे थे। जिंदगी अच्छी चल रही थी। लॉक डाउन में काम बंद हो गया। तीस दिन तो बचे पैसे से जैसे तैसे गुजारा हुआ। इसके बाद एक एक दिन काटना मुश्किल हो गया। चंदौली निवासी कलामू ने बताया कि गुजरात कमाने के लिए गया था लेकिन लॉक डाउन ने दर दर की ठोकरे खाने पर मजबूर कर दिया। कानपुर निवासी राहुल ने बताया कि काम न होने की वजह से डेढ़ माह में वे पैसे पैसे के मोहताज हो गए।
दिल्ली से आए यात्री बिना जांच कराए गए घर
पीडीडीयू नगर। कोरोना वायरस के बाद लाकडाउन में फंसे लोग दिल्ली से अनुमति लेकर बृहस्पतिवार की शाम एक निजी बस से जिले के विभिन्न इलाकों के लोग पीडीडीयू नगर पहुंचे। बस में 17 लोग सवार थे। सभी लोग थर्मल स्क्रीनिंग के लिए नगर स्थित राजकीय महिला अस्पताल पहुंचे। वहां करीब दो घंटे इंतजार के बाद कहा गया कि स्टेशन पर उनकी जांच होगी। वहां पहुंचे तो जांच की कोई व्यवस्था ही नहीं थी। वहां भी काफी देर इंतजार के बाद 12 लोग बिना जांच कराए घर चले गए। जबकि पांच लोग इंतजार करते रहे। बाद में पहुुंचे कोतवाल शिवानंद मिश्रा से जांच की गुहार लगाई। इसके बाद किसी तरह इंतजाम कर जांच कराकर घर भेज दिया। साथ ही 14 दिन के लिए होम क्वारंटीन की हिदायत दी गई। वहीं चौकी इंचार्ज शिवाला को 12 लोगों का पता कर जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
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प्रदेश सरकार की पहल पर गुजरात के राजपिपला में फंसे प्रदेश के चंदौली सहित आजमगढ़, गोरखपुर, गाजीपुर, जौनपुर, बलिया, भदोही, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, बस्ती, मउ, मिर्जापुर, सोनभद्र, कुशीनगर सहित विभिन्न जनपदों के 1500 से अधिक श्रमिकों को लेकर श्रमिक स्पेशल ट्रेन बृहस्पतिवार की शाम सात बजे पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पहुंची। सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए ट्रेन से श्रमिकों को उतारा गया और जांच पड़ताल के बाद बाहर निकाला गया और बसों में बैठाया गया। एडीएम संजय कुमार, वरीय मंडल सुरक्षा आयुक्त आशीष मिश्र सहित अधिकारियों की टीम स्टेशन पर व्यवस्था संभालने में जुटी रही। देर रात तक श्रमिकों को बसों से रवाना करने का सिलसिला चलता रहा। इस दौरान आने वाले श्रमिकों को लेकर जाने वाली बस में जिन होमगार्ड की ड्यूटी लगी थी, उन्होंने जाने से मना कर दिया। इस पर अधिकारियों में खलबली मच गई। होमगार्डों का कहना था कि वापसी में बस उन्हें आधे रास्ते छोड़ देती है इससे घर पहुंचने में दिक्कत होती है। बाद में अधिकारियों ने समझाबुझाकर उन्हें बस के साथ भेजा। वहीं इस ट्रेन से कुछ यात्रियों को प्रयागराज में उतरना था लेकिन किन्हीं कारणों से वहां नहीं उतर सके। तो सभी लोगों को यहीं उतारना पड़ा। ऐसे में रोडवेज बस कम पड़ गई। तब प्रशासन ने निजी स्कूलों की बसों से उन्हें घरों के लिए रवाना किया।
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पीडीडीयू नगर। बड़े अरमान लेकर प्रदेश में कमाने गए थे। कमाई हुई तो परिवार का संबल भी बने लेकिन लॉक डाउन ने सब कुछ छीन लिया। सब कुछ गंवा कर वापस लौटना पड़ा। कुछ इसी तरह की वेदना गुजरात से लौटे श्रमिकों ने व्यक्त की।
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वाराणसी निवासी किरण यादव और मुकेश यादव सूरत में निजी फैक्टरी में काम कर रहे थे। जिंदगी अच्छी चल रही थी। लॉक डाउन में काम बंद हो गया। तीस दिन तो बचे पैसे से जैसे तैसे गुजारा हुआ। इसके बाद एक एक दिन काटना मुश्किल हो गया। चंदौली निवासी कलामू ने बताया कि गुजरात कमाने के लिए गया था लेकिन लॉक डाउन ने दर दर की ठोकरे खाने पर मजबूर कर दिया। कानपुर निवासी राहुल ने बताया कि काम न होने की वजह से डेढ़ माह में वे पैसे पैसे के मोहताज हो गए।
दिल्ली से आए यात्री बिना जांच कराए गए घर
पीडीडीयू नगर। कोरोना वायरस के बाद लाकडाउन में फंसे लोग दिल्ली से अनुमति लेकर बृहस्पतिवार की शाम एक निजी बस से जिले के विभिन्न इलाकों के लोग पीडीडीयू नगर पहुंचे। बस में 17 लोग सवार थे। सभी लोग थर्मल स्क्रीनिंग के लिए नगर स्थित राजकीय महिला अस्पताल पहुंचे। वहां करीब दो घंटे इंतजार के बाद कहा गया कि स्टेशन पर उनकी जांच होगी। वहां पहुंचे तो जांच की कोई व्यवस्था ही नहीं थी। वहां भी काफी देर इंतजार के बाद 12 लोग बिना जांच कराए घर चले गए। जबकि पांच लोग इंतजार करते रहे। बाद में पहुुंचे कोतवाल शिवानंद मिश्रा से जांच की गुहार लगाई। इसके बाद किसी तरह इंतजाम कर जांच कराकर घर भेज दिया। साथ ही 14 दिन के लिए होम क्वारंटीन की हिदायत दी गई। वहीं चौकी इंचार्ज शिवाला को 12 लोगों का पता कर जांच कराने के निर्देश दिए हैं।