{"_id":"612a4a6b8ebc3ec63542e10d","slug":"shrimad-bhagavatam-is-the-form-of-lord-shri-hari-chandauli-news-vns6084136196","type":"story","status":"publish","title_hn":"साक्षात श्रीहरि का रूप है श्रीमद्भागवत: जीयर स्वामी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
साक्षात श्रीहरि का रूप है श्रीमद्भागवत: जीयर स्वामी
विज्ञापन
चंदौली के धानापुर में सत्संग व कथा के माध्यम से ही मनुष्य भगवान की शरण में पहुंचता है अन्यथा वह मोह माया के चक्कर में पड़ कर जीवन भर भटकता रहता है। इसलिए समय निकालकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए। साथ ही बच्चों को संस्कारवान बनाकर सत्संग व कथा के लिए प्रेरित करना चाहिए।
यह बातें क्षेत्र के बूढ़ेपुर गांव में चल रहे चतुर्मास यज्ञ के दौरान शनिवार को जीयर स्वामी ने कहीं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला में भगवान शिव ने गोपी का रूप धारण कर दर्शन किए। कलयुग में भागवत साक्षात श्रीहरि का रूप है। पावन हृदय से इसका स्मरण मात्र करने पर करोड़ों पुण्य का फल प्राप्त हो जाता है। इस कथा को सुनने के लिए देवी-देवता भी तरसते हैं। दुर्लभ मानव को ही इस कथा के श्रवण का लाभ प्राप्त होता है। श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से ही प्राणी का कल्याण संभव है।
श्रीस्वामी ने कहा कि कथा की सार्थकता तभी है जब इसे भाव से सुनने के बाद व्यवहार रूप में धारण किया जाए। कहा कि भागवत कथा सुनने से मन का शुद्धिकरण होता है। इसलिए सद्गुरु की पहचान कर उनका अनुकरण करना चाहिए। अंत में कहा कि भगवान की विभिन्न कथाओं का सार श्रीमद्भागवत मोक्षदायिनी है। इसके श्रवण से परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई और कलियुग में आज भी इसका प्रत्यक्ष प्रमाण देखने को मिलते हैं। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से प्राणी को मुक्ति मिलती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
यह बातें क्षेत्र के बूढ़ेपुर गांव में चल रहे चतुर्मास यज्ञ के दौरान शनिवार को जीयर स्वामी ने कहीं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला में भगवान शिव ने गोपी का रूप धारण कर दर्शन किए। कलयुग में भागवत साक्षात श्रीहरि का रूप है। पावन हृदय से इसका स्मरण मात्र करने पर करोड़ों पुण्य का फल प्राप्त हो जाता है। इस कथा को सुनने के लिए देवी-देवता भी तरसते हैं। दुर्लभ मानव को ही इस कथा के श्रवण का लाभ प्राप्त होता है। श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से ही प्राणी का कल्याण संभव है।
विज्ञापन
श्रीस्वामी ने कहा कि कथा की सार्थकता तभी है जब इसे भाव से सुनने के बाद व्यवहार रूप में धारण किया जाए। कहा कि भागवत कथा सुनने से मन का शुद्धिकरण होता है। इसलिए सद्गुरु की पहचान कर उनका अनुकरण करना चाहिए। अंत में कहा कि भगवान की विभिन्न कथाओं का सार श्रीमद्भागवत मोक्षदायिनी है। इसके श्रवण से परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई और कलियुग में आज भी इसका प्रत्यक्ष प्रमाण देखने को मिलते हैं। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से प्राणी को मुक्ति मिलती है।
विज्ञापन