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अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर मांगी सुख-समृद्धि

Sun, 30 Oct 2022 09:00 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 30 Oct 2022 09:00 PM IST
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Seek happiness and prosperity by offering arghya to the setting sun
चकिया के जागेश्वरनाथ में सूर्य की उपासना करती व्रती महिलाएं। संवाद - फोटो : CHANDAULI
पीडीडीयू नगर। लोक आस्था के महापर्व डाला छठ पर रविवार की शाम गंगा नदी तट, सरोवर तटों पर आस्थावानों का रेला उमड़ा। व्रती महिलाओं और पुरुषों ने अस्ताचल गामी सूर्य को अर्घ्य दिया और सुख समृद्धि की कामना की। यहां खूब आतिशबाजी हुई और छठ मइया के गीत से इलाका गुंजायमान रहा। घरों और सरोवर तटों पर कांच ही बांस की बहंगिया, बहंगी लचकत जाय, मारबो रे सुगवा धनुष से, सुगा गिरहे मुर्छाए आदि पारंपरिक गीतों से गुलजार रहे। सुबह से ही अर्घ्य देने की तैयारी शुरू हो गई। घरों में सुबह से ही व्रती महिलाओं ने स्नान, ध्यान के बाद अर्घ्य देने के लिए सूप, दउरी तैयार की। इसमें पांच से सात प्रकार के फल, ठेकुआ, चावल से बनी मिठाई, फूल, माला, दीपक, रोरी, सिंदूर, कपूर, अगरबत्ती आदि को सजाया। दोपहर बाद महिलाएं और पुरुष नए वस्त्र पहन कर पूरे परिवार के साथ नंगे पैर सरोवर, नदी तटों की ओर चल पड़े। विभिन्न इलाकों से व्रती बैंडबाजा के साथ सरोवर पर पहुंचे तो कुछ महिला व्रती घाटों पर लेट कर पहुंची। घर के पुरुष सदस्य सिर पर फलों का दउरा लेकर चल रहे थे तो बच्चे किशोर कांधे पर गन्ना रख कर घाटों पर पहुंचे। महिलाएं, किशोरियां हाथों के कलश लेकर गीत गाते हुए घाटों पर पहुंचीं। नगर के दामोदरदास पोखरा, राम मंदिर, माल गोदाम पोखरा, मानस नगर स्थित मानसरोवर तालाब, सिकटिया, अलीनगर स्थित रामजानकी पोखरा पर अर्घ्य देने के लिए व्रती पहुंचे। यहां व्रतियों ने वेदी बनाकर पूजा-अर्चना की और कलश स्थापित किया। सरोवर में गन्ने का मंडप बनाया और धूप, दीप, फूल माला से पूजा अर्चना की। इसके बाद जल में उतरी और कमर भर पानी होने पर खड़े होकर भगवान भाष्कर के अस्त होने का इंतजार किया। जैसे ही सूर्य ने रूप बदल कर लालिमा बिखेरी और अंधकार का असर हुआ, वैैसे ही लोगों ने जयकारे के साथ दूध, जल आदि से अर्घ्य दिया। पूूजा समिति के सदस्यों ने भी घूम घूमकर व्रतियो को अर्घ्य के लिए दूध और जल उपलब्ध कराए। व्रतियों के परिवार वालों के साथ आस-पड़ोस के लोगों ने भी अर्घ्य दिलाकर पुण्य लाभ कमाया। अर्घ्य देने वालों को देखने के लिए लोगों की भीड़ रही। इस दौरान यहां मेला लगा रहा। सरोवर तटों पर मेले में चाट-पक़ौड़ी, गोलगप्पे, गुब्बारे, खिलौने, मोमोज, चाउमिन की दुकानें सजी रहीं। अर्घ्य देने के बाद युवाओं ने खूब आतिशबाजी की और बम पटाखे छुड़ाए। पूजन-अर्चन के बाद व्रती कलश लेकर गीत गाते हुए घर लौट आए। कुछ महिलाएं घाट पर ही सुबह अर्घ्य देने के लिए रुक गई। सोमवार की सुबह उदयाचल सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाएगा। इसके पूर्व घाटों पर विद्युत झालरों और ट्यूबलाइट की आकर्षक सजावट की गई थी। वहीं लाउडस्पीकरों पर छठ मइया के गीत बजाए जा रहे थे। इससे माहौल पूरी तरह भक्तिमय बना रहा ।

पीडीडीयू नगर में पूजा के बाद कलश लेकर जाती व्रती महिला। संवाद

पीडीडीयू नगर में पूजा के बाद कलश लेकर जाती व्रती महिला। संवाद- फोटो : CHANDAULI

इलिया में सूर्य की उपासना करतीं व्रती महिलाएं। संवाद

इलिया में सूर्य की उपासना करतीं व्रती महिलाएं। संवाद- फोटो : CHANDAULI

कंदवा के अमड़ा में छठ पूजा करती महिलाएं। संवाद

कंदवा के अमड़ा में छठ पूजा करती महिलाएं। संवाद- फोटो : CHANDAULI

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