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Chandauli News: मरम्मत की डेडलाइन बीती, फिर भी 300 से ज्यादा सड़कों के गड्ढे नहीं भरे गए
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तारापुर चौराहे से कैली शमशान घाट जाने वाला क्षतिग्रस्त मार्ग। संवाद
पीडीडीयू नगर। बारिश का मौसम शुरू होने से पहले जिले में सड़कों के गड्ढों को भरने का काम पूरा नहीं हो सका है। करीब 300 से अधिक सड़कों पर अब भी गड्ढे बने हुए हैं। कई विभागों की ओर से हर साल अक्टूबर से मार्च महीने तक गड्ढामुक्ति अभियान चलाकर सड़कों पर बने गड्ढों की मरम्मत कराई जाती है। लेकिन 2 महीने बीतने के बाद भी लगभग 300 सड़कों के गड्ढे नहीं भरे गए हैं। आने वाले दिनों में लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी भरने से जहां आवागमन में दिक्कत होगी, वहीं सड़कें और अधिक खराब हो सकती हैं। साथ ही हादसों का खतरा भी बना रहेगा। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ प्रमुख संपर्क मार्गों की सड़कें भी जर्जर स्थिति में हैं। इससे राहगीरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
जिले में करीब आठ हजार किलोमीटर सड़कें हैं। इनमें पीडब्ल्यूडी प्रांतीय व निर्माण खंड, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, सिंचाई विभाग सहित कुछ अन्य विभागों के जिम्मे सड़कों की मरम्मत व रखरखाव की जिम्मेदारी है। लोगों का आरोप है कि इसके बावजूद कार्यदायी संस्थाओं की लापरवाही के कारण कार्य में मात्र खानापूर्ति होती है। इससे पैचवर्क के कुछ दिन बाद ही सड़कों पर दोबारा गड्ढे बन जाते हैं।
जिम्मेदार विभागों की ओर से इन कार्यदायी संस्थाओं पर कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण हर साल सड़कों की मरम्मत करानी पड़ती है। सड़कों पर बने गड्ढों का खामियाजा राहगीरों को भुगतना पड़ता है। ग्रामीणों के विरोध और प्रदर्शन के बाद कुछ सड़कों की दोबारा मरम्मत की जाती है, लेकिन अधिकांश सड़कों पर गड्ढे बरकरार रहते हैं।
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इनसेट
चार वर्ष से बदहाल डेढ़ किमी लंबी सड़क
कंदवा।
बरिला गांव को कंदवा पिपरदहा मार्ग से जोड़ने वाली सड़क पिछले चार वर्षों से बदहाल है। सड़क पर इतने गड्ढे हैं कि इस पर पैदल चलना भी मुश्किल है। कई बार गुहार के बावजूद अब तक कोई मरम्मत कार्य नहीं कराया गया है, जिससे लोगों में आक्रोश है। यह सड़क पई, बहोरा चंदेल, सुढ़ना, बरिला, बरिली, कंदवा, पिपरदहा, कम्हरिया सहित एक दर्जन गांवों के आवागमन का माध्यम है। सड़क पर वर्ष 2021-22 में बिछाई गई तारकोल युक्त गिट्टियां भी गायब हो चुकी हैं और केवल गड्ढे ही बचे हैं।
तीन किलोमीटर मार्ग पर हैं 300 से अधिक गड्ढे
ताराजीवनपुर। क्षेत्र के तारापुर चौराहे से कैली शमशान घाट और चौराहे को जोड़ने वाला करीब तीन किलोमीटर लंबा मार्ग पर बने गड्ढे राहगीरों के लिए जोखिम बने हुए हैं। ग्रामीणों की शिकायत पर पीडब्ल्यूडी ने मरम्मत कराई थी, लेकिन सैयदपुरा से तारापुर चौराहे तक सड़क फिर से जर्जर हो गई है। 300 से अधिक गड्ढों के कारण आवागमन के दौरान लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं।
लोगों के कोट.....
यह सड़क एक दशक से अत्यंत खराब हो जाने के कारण लोगों को लंबी दूरी तय कर अन्य मार्गों से आवागमन करना पड़ रहा है। कभी-कभी विवशता में इस सड़क का सहारा भी लेना पड़ता है।-- रविशंकर यादव।
कैली से जिला मुख्यालय को जोड़ने वाली यह सड़क वर्षों से कई गांव के लोगों के आवागमन की मुख्य सड़क है। इस सड़क से दूर-दूर से लोग शमशान घाट पर शवों का अंतिम संस्कार करने आते हैं।-- जोगिंदर।
मात्र तीन किलोमीटर सड़क पर बने अनगिनत गड्ढे राहगीरों के लिए जोखिमभरा साबित हो रहे हैं । आवागमन करते समय लोग रात को तो छोड़िए, दिन के उजाले में भी गिरकर चोटिल हो जा रहे हैं।-- केदार यादव
विभागीय उदासीनता के कारण मात्र तीन किलोमीटर सड़क क्षेत्र के लोगों के लिए मुसीबत बनी हुई है। मार्ग पर बने 300 से अधिक गड्ढों के कारण आवागमन मुश्किलभरा साबित हो रहा है।-- विजय यादव
इनसेट...
सड़कों पर बह रहा नाबदान का पानी
दुलहीपुर। चंदासी कोल मंडी से हरिशंकरपुर गांव व बिजली उपकेंद्र से हिनौली गांव को जाने वाली सड़क वर्षों से बदहाल है। नाली न होने से घरों का गंदा पानी सड़क पर बहता रहता है, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है।
ग्रामीणों के अनुसार यह सड़क हरिशंकरपुर के लिए प्रमुख संपर्क मार्ग है। वर्ष 2005 के बाद इसकी मरम्मत नहीं हुई है। नाली न होने से स्थिति और खराब हो गई है।
बदहाल सड़कों से राहगीर बेहाल, जिम्मेदार मौन
टांडाकला। क्षेत्र के कई संपर्क मार्ग गड्ढों में तब्दील हो चुके हैं। पूरा गणेश गांव से टांडा कला जूड़ाहर्धन मार्ग पूरी तरह उखड़ चुका है। चकरा ग्राम सभा की पिच सड़कें भी खराब हैं। ग्रामीणों के अनुसार टांडाकला-मारूफपुर मुख्य मार्ग से हूसेपुर गांव को जोड़ने वाली सड़क भी जर्जर है।
छह माह पूर्व शिलान्यास के बावजूद नहीं बनी सड़क
बबुरी। धरौली मार्ग से बबुरी कस्बा को जोड़ने वाली मुख्य सड़क बारिश में कटकर जर्जर हो गई है। इससे आवागमन जोखिमभरा हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार करीब छह माह पहले सड़क निर्माण का शिलापट्ट लगाया गया था, लेकिन कार्य शुरू नहीं हुआ। बारिश में सड़क का एक हिस्सा धंस गया था। ग्रामीणों ने मिट्टी डालकर रास्ता चलने लायक बनाया है।
कोट....
पीडब्ल्यूडी की ओर से हर वर्ष अभियान चलाकर सड़कों को गड्ढामुक्त किया जाता है। यदि कहीं गड्ढे रह जाते हैं तो उनकी मरम्मत कराई जाती है। कुछ सड़कें प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनी हैं, जिन्हें अभी हैंडओवर नहीं किया गया है। हैंडओवर के बाद उनकी मरम्मत करा दी जाएगी।-- राजेश कुमार, अधिशासी अभियंता,
पीडब्ल्यूडी, प्रंतीय खंड।
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जिले में करीब आठ हजार किलोमीटर सड़कें हैं। इनमें पीडब्ल्यूडी प्रांतीय व निर्माण खंड, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, सिंचाई विभाग सहित कुछ अन्य विभागों के जिम्मे सड़कों की मरम्मत व रखरखाव की जिम्मेदारी है। लोगों का आरोप है कि इसके बावजूद कार्यदायी संस्थाओं की लापरवाही के कारण कार्य में मात्र खानापूर्ति होती है। इससे पैचवर्क के कुछ दिन बाद ही सड़कों पर दोबारा गड्ढे बन जाते हैं।
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जिम्मेदार विभागों की ओर से इन कार्यदायी संस्थाओं पर कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण हर साल सड़कों की मरम्मत करानी पड़ती है। सड़कों पर बने गड्ढों का खामियाजा राहगीरों को भुगतना पड़ता है। ग्रामीणों के विरोध और प्रदर्शन के बाद कुछ सड़कों की दोबारा मरम्मत की जाती है, लेकिन अधिकांश सड़कों पर गड्ढे बरकरार रहते हैं।
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इनसेट
चार वर्ष से बदहाल डेढ़ किमी लंबी सड़क
कंदवा।
बरिला गांव को कंदवा पिपरदहा मार्ग से जोड़ने वाली सड़क पिछले चार वर्षों से बदहाल है। सड़क पर इतने गड्ढे हैं कि इस पर पैदल चलना भी मुश्किल है। कई बार गुहार के बावजूद अब तक कोई मरम्मत कार्य नहीं कराया गया है, जिससे लोगों में आक्रोश है। यह सड़क पई, बहोरा चंदेल, सुढ़ना, बरिला, बरिली, कंदवा, पिपरदहा, कम्हरिया सहित एक दर्जन गांवों के आवागमन का माध्यम है। सड़क पर वर्ष 2021-22 में बिछाई गई तारकोल युक्त गिट्टियां भी गायब हो चुकी हैं और केवल गड्ढे ही बचे हैं।
तीन किलोमीटर मार्ग पर हैं 300 से अधिक गड्ढे
ताराजीवनपुर। क्षेत्र के तारापुर चौराहे से कैली शमशान घाट और चौराहे को जोड़ने वाला करीब तीन किलोमीटर लंबा मार्ग पर बने गड्ढे राहगीरों के लिए जोखिम बने हुए हैं। ग्रामीणों की शिकायत पर पीडब्ल्यूडी ने मरम्मत कराई थी, लेकिन सैयदपुरा से तारापुर चौराहे तक सड़क फिर से जर्जर हो गई है। 300 से अधिक गड्ढों के कारण आवागमन के दौरान लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं।
लोगों के कोट.....
यह सड़क एक दशक से अत्यंत खराब हो जाने के कारण लोगों को लंबी दूरी तय कर अन्य मार्गों से आवागमन करना पड़ रहा है। कभी-कभी विवशता में इस सड़क का सहारा भी लेना पड़ता है।
कैली से जिला मुख्यालय को जोड़ने वाली यह सड़क वर्षों से कई गांव के लोगों के आवागमन की मुख्य सड़क है। इस सड़क से दूर-दूर से लोग शमशान घाट पर शवों का अंतिम संस्कार करने आते हैं।
मात्र तीन किलोमीटर सड़क पर बने अनगिनत गड्ढे राहगीरों के लिए जोखिमभरा साबित हो रहे हैं । आवागमन करते समय लोग रात को तो छोड़िए, दिन के उजाले में भी गिरकर चोटिल हो जा रहे हैं।
विभागीय उदासीनता के कारण मात्र तीन किलोमीटर सड़क क्षेत्र के लोगों के लिए मुसीबत बनी हुई है। मार्ग पर बने 300 से अधिक गड्ढों के कारण आवागमन मुश्किलभरा साबित हो रहा है।
इनसेट...
सड़कों पर बह रहा नाबदान का पानी
दुलहीपुर। चंदासी कोल मंडी से हरिशंकरपुर गांव व बिजली उपकेंद्र से हिनौली गांव को जाने वाली सड़क वर्षों से बदहाल है। नाली न होने से घरों का गंदा पानी सड़क पर बहता रहता है, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है।
ग्रामीणों के अनुसार यह सड़क हरिशंकरपुर के लिए प्रमुख संपर्क मार्ग है। वर्ष 2005 के बाद इसकी मरम्मत नहीं हुई है। नाली न होने से स्थिति और खराब हो गई है।
बदहाल सड़कों से राहगीर बेहाल, जिम्मेदार मौन
टांडाकला। क्षेत्र के कई संपर्क मार्ग गड्ढों में तब्दील हो चुके हैं। पूरा गणेश गांव से टांडा कला जूड़ाहर्धन मार्ग पूरी तरह उखड़ चुका है। चकरा ग्राम सभा की पिच सड़कें भी खराब हैं। ग्रामीणों के अनुसार टांडाकला-मारूफपुर मुख्य मार्ग से हूसेपुर गांव को जोड़ने वाली सड़क भी जर्जर है।
छह माह पूर्व शिलान्यास के बावजूद नहीं बनी सड़क
बबुरी। धरौली मार्ग से बबुरी कस्बा को जोड़ने वाली मुख्य सड़क बारिश में कटकर जर्जर हो गई है। इससे आवागमन जोखिमभरा हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार करीब छह माह पहले सड़क निर्माण का शिलापट्ट लगाया गया था, लेकिन कार्य शुरू नहीं हुआ। बारिश में सड़क का एक हिस्सा धंस गया था। ग्रामीणों ने मिट्टी डालकर रास्ता चलने लायक बनाया है।
कोट....
पीडब्ल्यूडी की ओर से हर वर्ष अभियान चलाकर सड़कों को गड्ढामुक्त किया जाता है। यदि कहीं गड्ढे रह जाते हैं तो उनकी मरम्मत कराई जाती है। कुछ सड़कें प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनी हैं, जिन्हें अभी हैंडओवर नहीं किया गया है। हैंडओवर के बाद उनकी मरम्मत करा दी जाएगी।
पीडब्ल्यूडी, प्रंतीय खंड।