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Chandauli News: वन कानूनों की कड़ाई से वृक्षों की कटान में कमी
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वन कानूनों के संशोधन के बाद से वनों की अवैध कटाई में गिरावट दर्ज की गई है। वनों की सघनता की फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट को लेकर ऊहापोह की स्थिति बरकरार है। इस बाबत विभाग अपनी सफाई इंस्टीट्यूट को प्रेषित कर चुका है । लेकिन रिपोर्ट में अभी सुधार नहीं किया गया है।हर वर्ष बनो में हो रहे प्लांटेशन के बावजूद वन क्षेत्र की सघनता में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दे रहा है।
काशी वन्यजीव प्रभाग का वन क्षेत्र 74000 हेक्टेयर में फैला हुआ है। जिसमें अधिकांश क्षेत्र झाड़ियों और झाड़ी टाइप पेड़ से भरा पड़ा है। वन क्षेत्र की सघनता की रिपोर्ट हर 3 वर्ष पर भारतीय वन अनुसंधान और विकास संस्थान के द्वारा सैटेलाइट सर्वे के बाद रिपोर्ट जारी की जाती है । वर्ष 2022 में संस्थान द्वारा जारी रिपोर्ट में काशी वन्य जीव प्रभाग के वन क्षेत्रों में सघनता में कमी पाई गई है । जिसको लेकर प्रभाग के डीएफओ द्वारा वन क्षेत्र से लेण्टेना की झाड़ियों की सफाई को आधार बनाकर रिपोर्ट को चुनौती दी गई है। लेकिन अब तक संस्थान द्वारा अपनी रिपोर्ट में संशोधन नहीं किया गया है।
वैसे भी वन क्षेत्र में विगत 10 वर्षों में लाखों पौधों का रोपण किया गया है। और सैकड़ों हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई जा चुकी है। लेकिन वन क्षेत्र की सघनता को लेकर अभी संतोषजनक स्थिति नहीं है। और फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट भी इस खामी को दर्शा रही है। इसके पीछे वन क्षेत्र में बढ़ते जैविक दबाव को महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। हालांकि कड़े वन कानूनों के चलते वन क्षेत्र से अवैध कटान में कमी साफ दिखाई दे रही है। फिर भी सघनता न बढ़ने के कारणों को चिन्हित करने की जरूरत है।वन क्षेत्र के जानकार सूत्र बताते हैं कि वनों में रोपित किए जाने वाले पौधे और ट्रेंच में बीजों की बुवाई के बाद बरसात का भी योगदान महत्वपूर्ण होता है। और समय पर बरसात न होने पर पौधे सूख भी जाते हैं। जिससे वन क्षेत्र की सघनता प्रभावित हो रही है ।वहीं वन क्षेत्र में नए रोपे गए पौधों को काटकर वन भूमि पर कब्जे की घटनाएं भी होती रहती है। जिससे सघनता प्रभावित है।
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कोट-- -- -- -
वन क्षेत्र को सघन बनाने के लिए विभाग हर मानक को पूरा करता है और कटान पर रोक लगाने के भी प्रबंध किए गए हैं। वन के वृक्षों की अवैध कटान करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाती है।-दिनेश सिंह, डीएफओ, काशी वन्यजीव प्रभाग
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काशी वन्यजीव प्रभाग का वन क्षेत्र 74000 हेक्टेयर में फैला हुआ है। जिसमें अधिकांश क्षेत्र झाड़ियों और झाड़ी टाइप पेड़ से भरा पड़ा है। वन क्षेत्र की सघनता की रिपोर्ट हर 3 वर्ष पर भारतीय वन अनुसंधान और विकास संस्थान के द्वारा सैटेलाइट सर्वे के बाद रिपोर्ट जारी की जाती है । वर्ष 2022 में संस्थान द्वारा जारी रिपोर्ट में काशी वन्य जीव प्रभाग के वन क्षेत्रों में सघनता में कमी पाई गई है । जिसको लेकर प्रभाग के डीएफओ द्वारा वन क्षेत्र से लेण्टेना की झाड़ियों की सफाई को आधार बनाकर रिपोर्ट को चुनौती दी गई है। लेकिन अब तक संस्थान द्वारा अपनी रिपोर्ट में संशोधन नहीं किया गया है।
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वैसे भी वन क्षेत्र में विगत 10 वर्षों में लाखों पौधों का रोपण किया गया है। और सैकड़ों हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई जा चुकी है। लेकिन वन क्षेत्र की सघनता को लेकर अभी संतोषजनक स्थिति नहीं है। और फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट भी इस खामी को दर्शा रही है। इसके पीछे वन क्षेत्र में बढ़ते जैविक दबाव को महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। हालांकि कड़े वन कानूनों के चलते वन क्षेत्र से अवैध कटान में कमी साफ दिखाई दे रही है। फिर भी सघनता न बढ़ने के कारणों को चिन्हित करने की जरूरत है।वन क्षेत्र के जानकार सूत्र बताते हैं कि वनों में रोपित किए जाने वाले पौधे और ट्रेंच में बीजों की बुवाई के बाद बरसात का भी योगदान महत्वपूर्ण होता है। और समय पर बरसात न होने पर पौधे सूख भी जाते हैं। जिससे वन क्षेत्र की सघनता प्रभावित हो रही है ।वहीं वन क्षेत्र में नए रोपे गए पौधों को काटकर वन भूमि पर कब्जे की घटनाएं भी होती रहती है। जिससे सघनता प्रभावित है।
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वन क्षेत्र को सघन बनाने के लिए विभाग हर मानक को पूरा करता है और कटान पर रोक लगाने के भी प्रबंध किए गए हैं। वन के वृक्षों की अवैध कटान करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाती है।-दिनेश सिंह, डीएफओ, काशी वन्यजीव प्रभाग