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बरसात ने मनरेगा कार्य पर लगाया ब्रेक, कामगार चिंतित
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बरसात ने मनरेगा कार्य पर लगाया ब्रेक, कामगार चिंतित
प्रवासी कामगारों के साथ गांवों के मनरेगा मजदूरों के सामने गहराया संकट
संवाद न्यूज एजेंसी
सकलडीहा। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने आमजन की रोजी-रोटी पर काफी असर डाला है। कोरोना कर्फ्यू के कारण नौकरी जाने के बाद प्रवासी कामगार अपने गांव लौट आए। उन्हें उम्मीद थी कि वह गांव पहुचेंगे तो उनके जख्मों पर मनरेगा योजना से मरहम लगेगी लेकिन बारिश ने मनरेगा के कार्यों पर भी ब्रेक लगा दिया है।
कोरोना वायरस को लेकर घर लौटे प्रवासी कामगार और पहले से यहां रह रहे कामगारों के जीने का एक मात्र सहारा मनरेगा ही है। लेकिन बारिश ने इनसे यह भी छीन लिया है। बारिश से खेत-खलिहान पानी से भर गए हैं। मौसम सही होने पर भी मिट्टी का कार्य अगले 15 दिन तक नहीं शुरू हो पाएगा। 15 जून से मानसून भी शुरू हो जाएगा। इस परिस्थिति में मनरेगा कामगारों के सामने संकट के बादल मंडराने लगे हैं। वहीं कुछ ऐसे भी युवा गांव की ओर लौटे हैं जो पढ़.लिखकर नौकरी करने परदेस गए थे। इनकी भी नौकरी कोरोना वायरस के कहर ने समाप्त कर दी। कामगार गोपाल राय, संदीप, ध्रुव, आकाश, रोहित कुमार, रामजी, शिवपूजन ने बताया कि इन विषम परिस्थितियों में अब तो चूल्हे भी नहीं जल पाएंगे। मनरेगा के कार्यों से घर का खर्चा चल रहा था। अब इस बारिश से शहरों की चुनौती गांवों में पहुंच गई है। सफाई और तालाबों की खोदाई में कामगार फावड़ा और टोकरी लेकर रोजगार में जुटे थे। बारिश ने इन कामगारों की मजदूरी पर भी ब्रेक लगा दिया है।
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प्रवासी कामगारों के साथ गांवों के मनरेगा मजदूरों के सामने गहराया संकट
संवाद न्यूज एजेंसी
सकलडीहा। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने आमजन की रोजी-रोटी पर काफी असर डाला है। कोरोना कर्फ्यू के कारण नौकरी जाने के बाद प्रवासी कामगार अपने गांव लौट आए। उन्हें उम्मीद थी कि वह गांव पहुचेंगे तो उनके जख्मों पर मनरेगा योजना से मरहम लगेगी लेकिन बारिश ने मनरेगा के कार्यों पर भी ब्रेक लगा दिया है।
कोरोना वायरस को लेकर घर लौटे प्रवासी कामगार और पहले से यहां रह रहे कामगारों के जीने का एक मात्र सहारा मनरेगा ही है। लेकिन बारिश ने इनसे यह भी छीन लिया है। बारिश से खेत-खलिहान पानी से भर गए हैं। मौसम सही होने पर भी मिट्टी का कार्य अगले 15 दिन तक नहीं शुरू हो पाएगा। 15 जून से मानसून भी शुरू हो जाएगा। इस परिस्थिति में मनरेगा कामगारों के सामने संकट के बादल मंडराने लगे हैं। वहीं कुछ ऐसे भी युवा गांव की ओर लौटे हैं जो पढ़.लिखकर नौकरी करने परदेस गए थे। इनकी भी नौकरी कोरोना वायरस के कहर ने समाप्त कर दी। कामगार गोपाल राय, संदीप, ध्रुव, आकाश, रोहित कुमार, रामजी, शिवपूजन ने बताया कि इन विषम परिस्थितियों में अब तो चूल्हे भी नहीं जल पाएंगे। मनरेगा के कार्यों से घर का खर्चा चल रहा था। अब इस बारिश से शहरों की चुनौती गांवों में पहुंच गई है। सफाई और तालाबों की खोदाई में कामगार फावड़ा और टोकरी लेकर रोजगार में जुटे थे। बारिश ने इन कामगारों की मजदूरी पर भी ब्रेक लगा दिया है।
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