{"_id":"583b3a954f1c1b5e290888cf","slug":"procession-brought-out-the-message-of-peace","type":"story","status":"publish","title_hn":"जुलूस निकाल शांति का दिया संदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जुलूस निकाल शांति का दिया संदेश
चंदौली ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Mon, 28 Nov 2016 01:27 AM IST
विज्ञापन
जुलूस निकाल शांति का दिया संदेश
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूरोपियन कालोनी स्थित बाल यीशु चर्च से रविवार को दोपहर दो बजे वार्षिक शांति जुलूस निकाला गया। जुलूस चर्च से शुरू होकर जीटी रोड, रोजा कालोनी और यूरोपियन कालोनी होते हुए पुन: चर्च में आकर समाप्त हुई। शांति जुलूस में देश के कोने-कोने से लोग शामिल हुए। चर्च में तमाम धार्मिक कार्यक्रम भी हुए। प्रार्थना सभा में नगर, प्रदेश और देश में शांति और सौहार्द कायम रहे इसकी कामना की गई। इसके बाद दूर दराज से आए लोगों ने वहां लगे मेले का भी लुत्फ उठाया।
नगर का चर्च बाल यीशु तीर्थ पूरे देश के तीन तीर्थों में एक है। वर्ष 1835 में बना कैथोलिक चर्च की तर्ज पर नासिक और बंगलुरू में ही बाल यीशु चर्च है। यही कारण है कि इस चर्च का महत्व पूरे देश में है। यहां से शोभायात्रा निकलने की कहानी भी दिलचस्प है। मसीही समुदाय के लिए दिसंबर माह महत्वपूर्ण होता है। बाल यीशु तीर्थ के फादर स्टैनले डिसूजा तीस वर्ष पहले नासिक में निकलने वाले बाल यीशु के महापर्व तीर्थ यात्रा में शामिल होने के लिए पहुंचे थे।
वहां पहुंची संत मदर टरेसा ने फादर स्टेनले डिसूजा को मसीही धर्म के प्रचार प्रसार के लिए वाराणसी में भी इस तरह के जुलूस निकालने का आह्वान किया। इसके बाद फादर ने तीस वर्ष पहले मुगलसराय में तीर्थ महापर्व पर जुलूस की शुरूआत की। बाल यीशु की शोभायात्रा में तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा भी शामिल हो चुके हैं। इस वर्ष तीन दिवसीय पर्व की शुरूआत 25 नवंबर से शुरू हुई। प्रतिदिन सुबह नौ बजे से रात आठ बजे करिश्माई चंगाई प्रार्थना हुई। रविवार को सुबह से ही शोभायात्रा की तैयारी शुरू हो गई। सुबह करिश्माई चंगाई प्रार्थना के बाद दोपहर दो बजे शोभायात्रा निकाली गई।
विज्ञापन
जुलूस के आगे मुख्य अतिथि गोरखपुर धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष थामस तुरुथिमट्टम रहे। सबसे आगे चर्च के फादर विपिन सीजे धर्म चिन्ह लेकर चल रहे थे।
विज्ञापन
नगर का चर्च बाल यीशु तीर्थ पूरे देश के तीन तीर्थों में एक है। वर्ष 1835 में बना कैथोलिक चर्च की तर्ज पर नासिक और बंगलुरू में ही बाल यीशु चर्च है। यही कारण है कि इस चर्च का महत्व पूरे देश में है। यहां से शोभायात्रा निकलने की कहानी भी दिलचस्प है। मसीही समुदाय के लिए दिसंबर माह महत्वपूर्ण होता है। बाल यीशु तीर्थ के फादर स्टैनले डिसूजा तीस वर्ष पहले नासिक में निकलने वाले बाल यीशु के महापर्व तीर्थ यात्रा में शामिल होने के लिए पहुंचे थे।
विज्ञापन
वहां पहुंची संत मदर टरेसा ने फादर स्टेनले डिसूजा को मसीही धर्म के प्रचार प्रसार के लिए वाराणसी में भी इस तरह के जुलूस निकालने का आह्वान किया। इसके बाद फादर ने तीस वर्ष पहले मुगलसराय में तीर्थ महापर्व पर जुलूस की शुरूआत की। बाल यीशु की शोभायात्रा में तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा भी शामिल हो चुके हैं। इस वर्ष तीन दिवसीय पर्व की शुरूआत 25 नवंबर से शुरू हुई। प्रतिदिन सुबह नौ बजे से रात आठ बजे करिश्माई चंगाई प्रार्थना हुई। रविवार को सुबह से ही शोभायात्रा की तैयारी शुरू हो गई। सुबह करिश्माई चंगाई प्रार्थना के बाद दोपहर दो बजे शोभायात्रा निकाली गई।
विज्ञापन
जुलूस के आगे मुख्य अतिथि गोरखपुर धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष थामस तुरुथिमट्टम रहे। सबसे आगे चर्च के फादर विपिन सीजे धर्म चिन्ह लेकर चल रहे थे।