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Chandauli News: आफताब के दिए ईंटों पर बनता है छठी मइया का प्रसाद
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पीडीडीयू नगर। छठ एक ऐसा महापर्व है जिसमें धर्म की दीवार भी टूट जाती है। लोग धर्म मजहब भूलकर बस छठी मइया के पूजा और सेवा में जुटे रहते हैं। नगर के कसाब महाल निवासी आफताब आलम पिछले सात वर्षों से छठी मइया की सेवा में अनवरत जुटे हुए हैं। आफताब छठ का व्रत रखने वाली महिलाओं में ईंट का वितरण करते हैं। इन्हीं ईंटों का चूल्हा बनाकर उसपर छठी मइया का पवित्र प्रसाद बनाया जाता है। हर वर्ष करीब दो हजार ईंट ले आकर व्रती महिलाओं को बांटते हैं। आफताब आजीवन छठी मइया के सेवा का संकल्प ले चुके हैं।
आफताब आलम ने बताया कि आज जो कुछ मेरे पास है जब छठी मइया की कृपा का फल है। सात साल पहले मन में विचार आया कि मैं छठ पूजा में क्या मदद कर सकता हूं। पता चला कि व्रती महिलाओं को सबसे ज्यादा दिक्कत ईंट को लेकर होती है। चूंकि छठ का व्रत काफी स्वच्छता और पवित्रता वाला व्रत होता है। इसमें सभी वस्तुएं नई और साफ-सुथरी प्रयोग की जाती हैं। ऐसे में व्रती माताएं प्रसाद के लिए जो चूल्हा तैयार करती हैं वो भी नई ईंटों का बना होता है। छठ पर्व की शुरुआत से लौकी भात, खीर और प्रसाद बनाने तक नई ईंटों का प्रयोग किया जाता है। लेकिन नई ईंटों की उपलब्धता सबसे बड़ी समस्या थी। मैने संकल्प लिया कि जब तक जीवन रहेगा,छठी मइया के प्रसाद के लिए माताओं और बहनों को ईंट उपलब्ध कराता रहूंगा। चाहें जितनी जरूरत होगी, चाहें जितने पैसे लगेंगे। तब से अब तक हर वर्ष दो हजार के करीब ईंट बंट जाती है।
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मजहब प्रेम बढ़ाता है घटाता नहीं
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आफताब आलम ने बताया कि मजहब दुराव के लिए नहीं बल्कि प्रेम बढ़ाने के लिए होता है। कहा कि छठ मइया को लेकर मन में काफी श्रद्धा है।छठी मइया हमे बहुत कुछ देती हैं आगे भी इस कार्य में अपनी सहभागिता निभाते रहेंगे। कहा कि मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है मानवता से बढ़कर इस दुनियां में और कुछ भी नहीं।
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रिपोर्ट-- अमरेंद्र पांडेय
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आफताब आलम ने बताया कि आज जो कुछ मेरे पास है जब छठी मइया की कृपा का फल है। सात साल पहले मन में विचार आया कि मैं छठ पूजा में क्या मदद कर सकता हूं। पता चला कि व्रती महिलाओं को सबसे ज्यादा दिक्कत ईंट को लेकर होती है। चूंकि छठ का व्रत काफी स्वच्छता और पवित्रता वाला व्रत होता है। इसमें सभी वस्तुएं नई और साफ-सुथरी प्रयोग की जाती हैं। ऐसे में व्रती माताएं प्रसाद के लिए जो चूल्हा तैयार करती हैं वो भी नई ईंटों का बना होता है। छठ पर्व की शुरुआत से लौकी भात, खीर और प्रसाद बनाने तक नई ईंटों का प्रयोग किया जाता है। लेकिन नई ईंटों की उपलब्धता सबसे बड़ी समस्या थी। मैने संकल्प लिया कि जब तक जीवन रहेगा,छठी मइया के प्रसाद के लिए माताओं और बहनों को ईंट उपलब्ध कराता रहूंगा। चाहें जितनी जरूरत होगी, चाहें जितने पैसे लगेंगे। तब से अब तक हर वर्ष दो हजार के करीब ईंट बंट जाती है।
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मजहब प्रेम बढ़ाता है घटाता नहीं
आफताब आलम ने बताया कि मजहब दुराव के लिए नहीं बल्कि प्रेम बढ़ाने के लिए होता है। कहा कि छठ मइया को लेकर मन में काफी श्रद्धा है।छठी मइया हमे बहुत कुछ देती हैं आगे भी इस कार्य में अपनी सहभागिता निभाते रहेंगे। कहा कि मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है मानवता से बढ़कर इस दुनियां में और कुछ भी नहीं।
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