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Chandauli News: 85 समितियाें के बीच सिर्फ 41 सचिव, आधे केंद्रों पर लटके ताले, खाद के इंतजार में किसान

Thu, 16 Jul 2026 01:07 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jul 2026 01:07 AM IST
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Only 41 secretaries for 85 societies; half the centers are locked, and farmers are waiting for fertilizer.
बरहनी साधन सहकारी समिति पर लटका ताला। संवाद
पीडीडीयू नगर। धान की रोपाई के सीजन में डीएपी, यूरिया और एनपीएस की मांग भी तेजी से बढ़ गई है। जिले में 10,136 मीट्रिक टन खाद आ चुकी है, फिर भी किसान भटक रहे हैं। जिले की 85 साधन सहकारी समितियों और उर्वरक बिक्री केंद्रों का संचालन महज 41 सचिवों के भरोसे है। एक-एक सचिव तीन से चार समितियों का प्रभार संभाल रहा है। ऐसे में ज्यादातर समितियां सप्ताह में चार से पांच दिन बंद रहती हैं। ऐसे में किसान कभी घंटों कतार में खड़े रहते हैं तो कई बार बिना खाद के लौट जाते हैं।
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धान की फसल के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण समय है। ऐसे में एक-दो दिन की देरी भी किसानों की लागत और उत्पादन दोनों को प्रभावित करती है। जिले में सहकारी समितियों के माध्यम से खाद वितरण के लिए पीओएस (बायोमीट्रिक) व्यवस्था लागू है। किसानों को आधार कार्ड, खतौनी और किसान क्रेडिट कार्ड के आधार पर खाद दी जा रही है, लेकिन सचिवों की कमी व्यवस्था की सबसे बड़ी कमजोरी बन गई है।
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सहकारी विभाग के अनुसार जिले में 5313 मीट्रिक टन यूरिया तथा 4823 मीट्रिक टन डीएपी एवं एनपीएस उपलब्ध है। इनमें से अब तक 1378 मीट्रिक टन यूरिया तथा 2295 मीट्रिक टन डीएपी व एनपीएस किसानों को वितरित की जा चुकी है। विभाग का दावा है कि खाद की कोई कमी नहीं है, लेकिन कई समितियों पर सचिव की अनुपस्थिति किसानों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बनी हुई है।
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इनसेट-
कई किलोमीटर दूर दूसरे केंद्र का चक्कर लगाते हैं किसान
जिले में खाद वितरण के लिए 85 समितियां और बिक्री केंद्र संचालित हैं, लेकिन इनके संचालन के लिए सिर्फ 41 सचिव तैनात हैं। कई सचिवों को तीन से चार समितियों का प्रभार दिया गया है। परिणामस्वरूप जिस दिन सचिव एक केंद्र पर खाद वितरण करते हैं, उस दिन बाकी समितियों पर ताला लटका रहता है। किसानों को कई किलोमीटर दूर दूसरे केंद्र का चक्कर लगाना पड़ता है या अगले दिन आने को कहा जाता है। सहकारी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नए सचिवों की तैनाती का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।



इनसेट
सरेसर में बना रैक बेकार, वाराणसी से आ रही खाद
जिले के सरेसर में खाद उतारने के लिए रेलवे रैक बनाया गया था, लेकिन सड़क और परिवहन व्यवस्था विकसित नहीं होने से इसका उपयोग लगभग बंद है। एक बार खाद उतरने के बाद यहां दोबारा रैक नहीं लगी। वर्तमान में जिले की अधिकांश खाद वाराणसी के शिवपुर रेलवे रैक से ट्रकों के जरिये लाई जा रही है, जिससे परिवहन लागत और समय दोनों बढ़ रहे हैं।



इनसेट
14 जुलाई को पहुंची 1600 एमटी डीएपी
सहकारी विभाग के अनुसार 14 जुलाई को इफको की बड़ी रैक के माध्यम से 1600 मीट्रिक टन डीएपी जिले में पहुंची है। इसके अलावा पीएफसी की छोटी-छोटी रैक लगातार आ रही हैं। विभाग ने कृभको की यूरिया रैक की भी मांग की है, जो शीघ्र मिलने की उम्मीद है।







किसानों के कोट....
समिति पर खाद तो रहती है लेकिन कई बार सचिव के दूसरे केंद्र पर होने से घंटों इंतज़ार करना पड़ता है या बिना खाद के ही लौटना पड़ता है। - नरेंद्र प्रताप सिंह, कम्हरिया।

धान की खेती के लिए किसानों को एक-एक दिन की देरी नुकसान पहुंचाती है। हर समिति पर नियमित रूप से सचिव की तैनाती होनी चाहिए। - मृत्युंजय नागवंशी, चिरईगांव।
बार-बार समिति का चक्कर लगाने से किसानों का समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है। रोस्टिंग व्यवस्था किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। - केदार सिंह, पिपरदहा।
सचिवों पर अतिरिक्त प्रभार के चलते खाद उपलब्ध होने के बाद भी किसानों को भी तत्काल नहीं मिलती। सरकार को इस व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत है। - देवेंद्र राय, पई।




कोट.....
धान की खेती के लिए खाद की उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया गया है ताकि किसानों को परेशानी न हो। पिछले वर्ष की तुलना में अधिक खाद की मांग की गई है। जिले में खाद का स्टॉक भरपूर है। अभी किसी केंद्र से कोई गड़बड़ी की सूचना नहीं मिली है। - अरुण सिंह, अपर जिला सहकारी अधिकारी, चंदौली।

बरहनी साधन सहकारी समिति पर लटका ताला। संवाद

बरहनी साधन सहकारी समिति पर लटका ताला। संवाद

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