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Chandauli News: खान-पान की गड़बड़ी से हर पांचवीं गर्भवती लिवर की समस्या से पीड़ित
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पीडीडीयू नगर। खान-पान में गड़बड़ी के कारण गर्भवती महिलाओं में लिवर की समस्या बढ़ रही है। राजकीय महिला अस्पताल में रोज 30 गर्भवती महिलाओं का लिवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी) कराया जाता है। इनमें पांच से छह महिलाओं का एसजीओटी और एसजीपीटी स्तर बढ़ा हुआ मिलता है। चिकित्सकों के अनुसार लिवर की गड़बड़ी का असर गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत पर भी पड़ सकता है।
नगर स्थित राजकीय महिला चिकित्सालय में रोज 250 से 300 की ओपीडी होती है। इसमें गर्भवती महिलाओं और बच्चों के अलावा सामान्य बीमारियों से पीड़ित पुरुष और महिलाएं भी शामिल होते हैं। रोज 80 से 90 गर्भवती महिलाएं नियमित जांच के लिए पहुंचती हैं। इनमें से 30 के लिवर की स्थिति की जांच के लिए एलएफटी कराया जाता है। अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, इनमें हर पांचवीं महिला में लिवर की समस्या मिल रही है।
चिकित्सकों के अनुसार इसके लिए असंतुलित खान-पान के अलावा कई अन्य कारण भी जिम्मेदार हैं। लिवर में गड़बड़ी का असर गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत पर पड़ सकता है। राजकीय महिला चिकित्सालय के प्रभारी डॉ. एसके चतुर्वेदी ने गर्भवती महिलाओं को बेहतर आहार लेने, तनाव से दूर रहने और पर्याप्त नींद लेने की सलाह दी है।
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यह होता है एसजीओटी, एसजीपीटी
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डॉ. एसके चतुर्वेदी ने बताया कि एसजीपीटी को सीरम ग्लूटामेट पाइरूवेट ट्रांसएमिनेस कहते हैं। यह मुख्य रूप से लिवर में पाया जाता है। इसका स्तर बढ़ना लिवर की क्षति का संकेत हो सकता है। वहीं, एसजीओटी को सीरम ग्लूटामेट ऑक्सालोएसीटेट ट्रांसएमिनेस कहते हैं। यह लिवर के अलावा हृदय, मांसपेशियों, गुर्दे और मस्तिष्क में भी मौजूद होता है। इसका स्तर बढ़ना शरीर के कई हिस्सों में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है।
गर्भ में शिशु पर पड़ सकता है असर
डॉ. एसके चतुर्वेदी ने बताया कि लिवर की परेशानी से गर्भवती महिलाओं में समय पूर्व प्रसव की आशंका बढ़ सकती है। यह नवजात के लिए उचित नहीं होता। एंजाइम का स्तर अत्यधिक बढ़ना लिवर में गंभीर सूजन या उसकी कार्यप्रणाली में बाधा का संकेत हो सकता है। गंभीर मामलों में बच्चे को ऑक्सीजन की कमी या अन्य अंदरूनी परेशानियां हो सकती हैं।
कोट-
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अस्पताल में रोज 30 गर्भवती महिलाओं का लिवर फंक्शन टेस्ट कराया जाता है। इनमें पांच से छह महिलाओं का एसजीओटी और एसजीपीटी बढ़ा हुआ मिलता है, जो लिवर की समस्या का संकेत है। गर्भवती महिलाओं को अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
- डॉ. एसके चतुर्वेदी, प्रभारी चिकित्साधिकारी, राजकीय महिला अस्पताल, पीडीडीयू नगर
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नगर स्थित राजकीय महिला चिकित्सालय में रोज 250 से 300 की ओपीडी होती है। इसमें गर्भवती महिलाओं और बच्चों के अलावा सामान्य बीमारियों से पीड़ित पुरुष और महिलाएं भी शामिल होते हैं। रोज 80 से 90 गर्भवती महिलाएं नियमित जांच के लिए पहुंचती हैं। इनमें से 30 के लिवर की स्थिति की जांच के लिए एलएफटी कराया जाता है। अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, इनमें हर पांचवीं महिला में लिवर की समस्या मिल रही है।
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चिकित्सकों के अनुसार इसके लिए असंतुलित खान-पान के अलावा कई अन्य कारण भी जिम्मेदार हैं। लिवर में गड़बड़ी का असर गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत पर पड़ सकता है। राजकीय महिला चिकित्सालय के प्रभारी डॉ. एसके चतुर्वेदी ने गर्भवती महिलाओं को बेहतर आहार लेने, तनाव से दूर रहने और पर्याप्त नींद लेने की सलाह दी है।
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यह होता है एसजीओटी, एसजीपीटी
डॉ. एसके चतुर्वेदी ने बताया कि एसजीपीटी को सीरम ग्लूटामेट पाइरूवेट ट्रांसएमिनेस कहते हैं। यह मुख्य रूप से लिवर में पाया जाता है। इसका स्तर बढ़ना लिवर की क्षति का संकेत हो सकता है। वहीं, एसजीओटी को सीरम ग्लूटामेट ऑक्सालोएसीटेट ट्रांसएमिनेस कहते हैं। यह लिवर के अलावा हृदय, मांसपेशियों, गुर्दे और मस्तिष्क में भी मौजूद होता है। इसका स्तर बढ़ना शरीर के कई हिस्सों में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है।
गर्भ में शिशु पर पड़ सकता है असर
डॉ. एसके चतुर्वेदी ने बताया कि लिवर की परेशानी से गर्भवती महिलाओं में समय पूर्व प्रसव की आशंका बढ़ सकती है। यह नवजात के लिए उचित नहीं होता। एंजाइम का स्तर अत्यधिक बढ़ना लिवर में गंभीर सूजन या उसकी कार्यप्रणाली में बाधा का संकेत हो सकता है। गंभीर मामलों में बच्चे को ऑक्सीजन की कमी या अन्य अंदरूनी परेशानियां हो सकती हैं।
कोट-
अस्पताल में रोज 30 गर्भवती महिलाओं का लिवर फंक्शन टेस्ट कराया जाता है। इनमें पांच से छह महिलाओं का एसजीओटी और एसजीपीटी बढ़ा हुआ मिलता है, जो लिवर की समस्या का संकेत है। गर्भवती महिलाओं को अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
- डॉ. एसके चतुर्वेदी, प्रभारी चिकित्साधिकारी, राजकीय महिला अस्पताल, पीडीडीयू नगर