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नमकीन, मिठाई और चिप्स बनाने का लाइसेंस मिलेगा जिले से
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पीडीडीयू नगर। नमकीन, मिठाई, चिप्स जैसे कन्फेक्शनरी फूड बनाने वाले खाद्य कारोबारियों के लिए खुशखबरी है। पहले जिस लाइसेंस को लेने के लिए दिल्ली तक कागज दौड़ाने व कई बार समस्या होने पर दिल्ली तक का सफर करना पड़ता था वह अब नहीं करना पड़ेगा। जिले में ही इसका लाइसेंस बन जाएगा। इसके लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की ओर से आदेश भी जारी कर दिया गया है।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के अनुसार, पहले छोटे निर्माणकर्ता से लेकर बड़े तक का लाइसेंस बनाने के लिए अलग-अलग व्यवस्था थी। बाद में करीब एक वर्ष पहले मिठाई, नमकीन, चिप्स या अन्य कन्फेशनरी फूड का लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया में थोड़ा बदलाव किया गया। इसके तहत सब कुछ केंद्रीय पोर्टल से लाइसेंस लेने की व्यवस्था की गई। कई बार नियम को समझने और सभी कागजात को ठीक कराने के लिए व्यापारियों को दिल्ली तक जाना पड़ता था। इसका विरोध व्यापारी संगठनों ने किया। ऐसे में अब फिर से नियम में बदलाव किया गया है। बदलाव के तहत जिनके यहां दो टन प्रतिदिन का उत्पादन होगा उनका लाइसेंस केंद्रीय पोर्टल से बनेगा। अन्य सभी का लाइसेंस जिले स्तर पर बन जाएगा।
पीडीडीयू नगर। केंद्रीय पोर्टल से कन्फेक्शनरी फूड का लाइसेंस लेने में सबसे ज्यादा दिक्कत छोटे कारोबारियों को थी। यानी इन्हीं को ज्यादा दिक्कत थी। पहले वाले नियम के तहत अगर किसी को दो किलोग्राम प्रतिदिन भी नमकीन बनानी है अथवा कम मिठाई भी बनाने का कारोबार करना है तो उसके लिए उसी पोर्टल से लाइसेंस मिलता था। इससेे व्यापारियों को काफी दिक्कत होती थी। अब जब जिले स्तर पर ही सबकुछ होगा तो आसानी से प्रक्रिया को समझकर लाइसेंस बनवाया जा सकता है।
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पीडीडीयू नगर। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के अनुसार लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया बेहद आसान है। बस जरूरी कागजात होने चाहिए और प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए। फास्कोस पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। उसमें कारोबार के हिसाब से जीएसटी नंबर, जहां कारोबार किया जा रहा है उसका मैप, चौहद्दी व अन्य कागजात लगाकार आवेदन करना होगा। निर्धारित फीस जमा करके लाइसेंस बनवाया जा सकता है।
कन्फेक्शनरी फूड के लाइसेंस के लिए छोटे कारोबारियों केे अब दिल्ली जाने की जरूरत नहीं है। उनकी सभी समस्याओं का समाधान जिले स्तर पर हो जाएगा। नए नियम के तहत स्थानीय स्तर पर ही लाइसेंस जारी करने का निर्देश प्राप्त हुआ है।
- राम आशीष यादव, जिला अभिहित अधिकारी-चंदौली
रिपोर्ट--- सुजीत शुक्ल
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खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के अनुसार, पहले छोटे निर्माणकर्ता से लेकर बड़े तक का लाइसेंस बनाने के लिए अलग-अलग व्यवस्था थी। बाद में करीब एक वर्ष पहले मिठाई, नमकीन, चिप्स या अन्य कन्फेशनरी फूड का लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया में थोड़ा बदलाव किया गया। इसके तहत सब कुछ केंद्रीय पोर्टल से लाइसेंस लेने की व्यवस्था की गई। कई बार नियम को समझने और सभी कागजात को ठीक कराने के लिए व्यापारियों को दिल्ली तक जाना पड़ता था। इसका विरोध व्यापारी संगठनों ने किया। ऐसे में अब फिर से नियम में बदलाव किया गया है। बदलाव के तहत जिनके यहां दो टन प्रतिदिन का उत्पादन होगा उनका लाइसेंस केंद्रीय पोर्टल से बनेगा। अन्य सभी का लाइसेंस जिले स्तर पर बन जाएगा।
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पीडीडीयू नगर। केंद्रीय पोर्टल से कन्फेक्शनरी फूड का लाइसेंस लेने में सबसे ज्यादा दिक्कत छोटे कारोबारियों को थी। यानी इन्हीं को ज्यादा दिक्कत थी। पहले वाले नियम के तहत अगर किसी को दो किलोग्राम प्रतिदिन भी नमकीन बनानी है अथवा कम मिठाई भी बनाने का कारोबार करना है तो उसके लिए उसी पोर्टल से लाइसेंस मिलता था। इससेे व्यापारियों को काफी दिक्कत होती थी। अब जब जिले स्तर पर ही सबकुछ होगा तो आसानी से प्रक्रिया को समझकर लाइसेंस बनवाया जा सकता है।
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पीडीडीयू नगर। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के अनुसार लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया बेहद आसान है। बस जरूरी कागजात होने चाहिए और प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए। फास्कोस पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। उसमें कारोबार के हिसाब से जीएसटी नंबर, जहां कारोबार किया जा रहा है उसका मैप, चौहद्दी व अन्य कागजात लगाकार आवेदन करना होगा। निर्धारित फीस जमा करके लाइसेंस बनवाया जा सकता है।
कन्फेक्शनरी फूड के लाइसेंस के लिए छोटे कारोबारियों केे अब दिल्ली जाने की जरूरत नहीं है। उनकी सभी समस्याओं का समाधान जिले स्तर पर हो जाएगा। नए नियम के तहत स्थानीय स्तर पर ही लाइसेंस जारी करने का निर्देश प्राप्त हुआ है।
- राम आशीष यादव, जिला अभिहित अधिकारी-चंदौली
रिपोर्ट--- सुजीत शुक्ल