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सरने में 49 साल बाद शुरू हुआ माइनर खोदाई का कार्य
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नियामताबाद । क्षेत्र के सरने स्थित माइनर की खोदाई का कार्य 49 साल बाद शनिवार को सिंचाई विभाग के अधिकारियों की देखरेख में शुरू किया गया। दो जेसीबी मशीन से नहर खोदाई का कार्य सुबह दस बजे शुरू हुआ।इस दौरान गांव के एक पक्ष द्वारा माइनर खोदाई का विरोध किया गया । उसने आरोप लगाया कि राजस्व विभाग पुराने नक्शे को बदलकर नये नक्शे के नापी कराने में जुट है जो कि गलत है।
नरायनपुर पंप कैनाल से जुड़ी सरने माइनर सरने गांव में 1973 में हाईकोर्ट से स्टे ले लिया गया। जिसके बाद महदेऊर तक जाने वाली माइनर की सरने गांव में 700 मीटर तक की खोदाई नहीं हो सकी। नहर को आगे व पीछे से खोदकर छोड़ दिया गया। किसानों ने लंबे संघर्ष के बाद न्यायालय में स्थगन आदेश निरस्त करवाया दिया। ग्रामीणों ने माइनर की खोदाई के लिए किसान संघ के कार्यकर्ताओं की सलाह पर मुख्यमंत्री के पोर्टल पर समस्या को डाला गया। तहसील दिवस पर भी इस समस्या को उठाया गया। इसमें सरने, रोहणा, धपरी, महदेऊर के किसान भी लगे। मुख्यमंत्री के निर्देशपर उप जिलाधिकारी मनोज पाठक ने राजस्व विभाग की टीम को भेजकर नहर की जमीन का सीमांकन किया गया। इसके बाद सिंचाई विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया गया। सिंचाई विभाग के अवर अभियंता सुनील कुमार गुप्ता, एसडीओ राकेश श्रीवास्तव ने जेसीबी मशीन से माईनर की खोदाई शुरू की। 49 साल बाद इस माइनर से जुड़े किसान जो कि पानी न मिलने से सिंचाई से वंचित थे उनके चेहरे पर खुशी है बिखर गई। वहीं गांव के ही एक पक्ष ने खोदाई का विरोध किया। उन्हेंने कहा कि राजस्व विभाग ने जो सीमाकन किया गया है यह पुराने नक्से सेनहीं किया गया है जो गलत है। वहीं इस संबंध में अवर अभियंता सुनील कुमार गुप्ता ने कहा कि सरने माइनर आगे व पीछे पहले से ही खोदी गई है । कहा कि बीच में 700मीटर पर अवरोध था, जिसका सीमांकन राजस्व विभाग ने कर दिया है। नहर की खोदाई हो रही है जिसको आपत्ति है वह राजस्व विभाग में जा सकता है।
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नरायनपुर पंप कैनाल से जुड़ी सरने माइनर सरने गांव में 1973 में हाईकोर्ट से स्टे ले लिया गया। जिसके बाद महदेऊर तक जाने वाली माइनर की सरने गांव में 700 मीटर तक की खोदाई नहीं हो सकी। नहर को आगे व पीछे से खोदकर छोड़ दिया गया। किसानों ने लंबे संघर्ष के बाद न्यायालय में स्थगन आदेश निरस्त करवाया दिया। ग्रामीणों ने माइनर की खोदाई के लिए किसान संघ के कार्यकर्ताओं की सलाह पर मुख्यमंत्री के पोर्टल पर समस्या को डाला गया। तहसील दिवस पर भी इस समस्या को उठाया गया। इसमें सरने, रोहणा, धपरी, महदेऊर के किसान भी लगे। मुख्यमंत्री के निर्देशपर उप जिलाधिकारी मनोज पाठक ने राजस्व विभाग की टीम को भेजकर नहर की जमीन का सीमांकन किया गया। इसके बाद सिंचाई विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया गया। सिंचाई विभाग के अवर अभियंता सुनील कुमार गुप्ता, एसडीओ राकेश श्रीवास्तव ने जेसीबी मशीन से माईनर की खोदाई शुरू की। 49 साल बाद इस माइनर से जुड़े किसान जो कि पानी न मिलने से सिंचाई से वंचित थे उनके चेहरे पर खुशी है बिखर गई। वहीं गांव के ही एक पक्ष ने खोदाई का विरोध किया। उन्हेंने कहा कि राजस्व विभाग ने जो सीमाकन किया गया है यह पुराने नक्से सेनहीं किया गया है जो गलत है। वहीं इस संबंध में अवर अभियंता सुनील कुमार गुप्ता ने कहा कि सरने माइनर आगे व पीछे पहले से ही खोदी गई है । कहा कि बीच में 700मीटर पर अवरोध था, जिसका सीमांकन राजस्व विभाग ने कर दिया है। नहर की खोदाई हो रही है जिसको आपत्ति है वह राजस्व विभाग में जा सकता है।
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