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Chandauli News: बैराठ टीले के सर्वेक्षण में मिले मौर्यकालीन साक्ष्य
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ताराजीवनपुर। सकलडीहा के बैराठ के टीले के सर्वेक्षण में मौर्यकालीन साक्ष्य मिले हैं। यह कहना है बीएचयू के प्रोफेसर और शोध छात्रों का। प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक डॉ. विनय कुमार ने शोध छात्रा अनीता एवं छात्र दीपक पटेल के साथ माटीगांव स्थित पुरास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने उत्खनन में प्राप्त गुप्तकालीन शिव मंदिर की वर्तमान स्थिति को देखते हुए चिंता जाहिर की। कहा कि इसके संरक्षण की आवश्यकता है।
डॉ. विनय के निर्देशन में विगत वर्षों में माटीगांव पुरास्थल का उत्खनन हुआ था। उन्होंने जिले के विभिन्न पुरास्थलों इब्राहिमपुर, बैराठ, भोजापुर आदि का भी सर्वेक्षण किया। डॉ. विनय कुमार जिले के विभिन्न पुरास्थलों का सर्वेक्षण कार्य कर रहे हैं। उनके साथ इस सर्वेक्षण में उनकी शोध छात्रा अनीता जिले के स्थापत्य एवं मूर्तिकला के वैभव पर अपना शोध कार्य कर रही हैं। उन्होंने इब्राहिमपुर, सकलडीहा स्थित बैराठ, कालेश्वर महादेव मंदिर भिट्ठी का निरीक्षण किया। सर्वेक्षण के दौरान इब्राहिमपुर, सकलडीहा स्थित बैराठ, कालेश्वर महादेव मंदिर, भिट्ठी से प्राचीन काल की मूर्तियां प्राप्त हुईं हैं। इनमें दशावतार, सूर्य, उमा-माहेश्वर, विष्णु, कृष्ण-लीला स्तंभ आदि प्रमुख हैं। डॉ. विनय व उनकी शोधार्थी का मानना है कि इन प्रतिमाओं की प्राप्ति से चंदौली के स्थापत्य एवं मूर्तिकला की वैभव का प्रमाण मिलता है। बैराठ के टीले के सर्वेक्षण में मौर्यकालीन साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
रिपोर्ट- अजीत यादव
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डॉ. विनय के निर्देशन में विगत वर्षों में माटीगांव पुरास्थल का उत्खनन हुआ था। उन्होंने जिले के विभिन्न पुरास्थलों इब्राहिमपुर, बैराठ, भोजापुर आदि का भी सर्वेक्षण किया। डॉ. विनय कुमार जिले के विभिन्न पुरास्थलों का सर्वेक्षण कार्य कर रहे हैं। उनके साथ इस सर्वेक्षण में उनकी शोध छात्रा अनीता जिले के स्थापत्य एवं मूर्तिकला के वैभव पर अपना शोध कार्य कर रही हैं। उन्होंने इब्राहिमपुर, सकलडीहा स्थित बैराठ, कालेश्वर महादेव मंदिर भिट्ठी का निरीक्षण किया। सर्वेक्षण के दौरान इब्राहिमपुर, सकलडीहा स्थित बैराठ, कालेश्वर महादेव मंदिर, भिट्ठी से प्राचीन काल की मूर्तियां प्राप्त हुईं हैं। इनमें दशावतार, सूर्य, उमा-माहेश्वर, विष्णु, कृष्ण-लीला स्तंभ आदि प्रमुख हैं। डॉ. विनय व उनकी शोधार्थी का मानना है कि इन प्रतिमाओं की प्राप्ति से चंदौली के स्थापत्य एवं मूर्तिकला की वैभव का प्रमाण मिलता है। बैराठ के टीले के सर्वेक्षण में मौर्यकालीन साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
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रिपोर्ट- अजीत यादव