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चार वर्षों में मात्र तीन बार ही रैक प्वाइंट पर उतरी है खाद

Fri, 04 Feb 2022 12:00 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 04 Feb 2022 12:00 AM IST
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Manure has landed at rack point only thrice in four years
ताराजीवनपुर। जनपद के किसानों तक समय से खाद पहुंचाने के लिए सरेसर में खाद उतारने के लिए रैक प्वाइंट बनवाया गया था। बावजूद इसके यह रैक प्वाइंट शो पीस बनकर रह गया है। विडंबना यह है कि अब तक चार वर्षों में मात्र तीन बार ही इस रैक प्वाइंट पर खाद उतारी गई है।
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कृषि प्रधान जनपद में संसाधनों की कमी के कारण किसानों की खेती प्रभावित हो रही है। सरेसर में बना रैक प्वाइंट्स शो पीस बना हुआ है। खाद बीज के संकट के साथ ही माइनरों व नहरों की सफाई भी मानक के अनुरूप नहीं होने से सिंचाई की समस्या भी बनी हुई है। कृषि प्रधान जनपद में खाद की कमी को देखते हुए करीब चार वर्ष पूर्व रैक प्वाइंट बनाया गया। उस समय किसानों को उम्मीद जगी कि अब उन्हें खाद की कमी की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा लेकिन स्थिति यह है कि चार साल में सिर्फ तीन बार ही सरेसर में खाद की रैक लगी है। खाद की अधिकांश रैक पहले की तरह वाराणसी के शिवपुर में ही लगती है। वहां से ही जनपद के किसानों को खाद उपलब्ध हो रही है। ऐसे में खाद आने में कई समस्याएं उत्पन्न होती हैं जिनका खामियाजा जिले के किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
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सरेसर में खाद उतारने के लिए बने रैक प्वाइंट पर खाद उतारने की बजाए ठेकेदार द्वारा सुविधा के अनुसार शिवपुर भेज दी जाती है। वहीं से चंदौली के लिए आवंटित खाद आती है। अजय कुमार मौर्य, सहायक निबंधक।
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किसान राम नगीना शर्मा बताते हैं कि कृषि प्रधान जनपद होने के बावजूद संसाधन की कमी के कारण गैर जनपदों के सहारे चंदौली के किसानों की खेती होती है। किसानों को हमेशा खाद, बीज, बिजली व पानी की समस्या से दो-चार होना पड़ता है।
किसान केदार यादव ने कहा कि रैक प्वाइंट पर खाद उतरने का ढिंढोरा तो जमकर पीटा गया लेकिन खाद शिवपुर में ही उतर रही है। इससे होता यह है कि वाराणसी जनपद के किसानों को खाद उपलब्ध कराने के बाद ही चंदौली के किसानों तक खाद पहुंच पाती है। वह भी ऊंट के मुंह में जीरा के समान साबित होती है।
किसान परशुराम विश्वकर्मा ने बताया कि किसानों की समस्या दूर करने के लिए रैक प्वाइंट का उद्घाटन किया गया। बावजूद इसके यहां पर खाद न उतारना किसानों की समझ से परे है। किसान विवशता में निजी दुकानों से महंगे दर पर खाद खरीदते हैं जो काफी महंगा होता है।

किसान नगीना यादव ने बताया कि इस समय सरेसर में खाद की रैक न लगने से किसानों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। खाद न मिलने से किसानों में हमेशा खेती के पिछड़ने का भय बना रहता है।
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