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पूजन के लिए तैयार हैं प्रतिमाएं
ब्यूरो/अमर उजाला, चंदौली
Updated Wed, 10 Feb 2016 01:29 AM IST
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ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई
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है। तेरह फरवरी को जिले में तीन से चार सौ स्थानों पर पंडालों का निर्माण
कर मां सरस्वती की पूजा अर्चना की जाएगी।
नगर के नई बस्ती स्थित कुम्हार बस्ती में भी मूर्तियों का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच गया है। कलाकार दिन रात एक कर मूर्तियों को अंतिमटच देने में जुटे हैं। यहां सात सौ से अधिक मूर्तियों का निर्माण हुआ है। विद्या की देवी माने जाने वाली हंसवाहिनी, ज्ञानदायिनी, वीणा वादिनी, पद्मासना मां सरस्वती की पूजा इस वर्ष तेरह फरवरी को होगी। मां सरस्वती पूजा को लेकर विशेषकर युवाओं में विशेष उत्साह है।
मदनोत्सव और श्री पंचमी जैसे नामों से प्रसिद्ध मां सरस्वती की पूजा को लेकर जिले में तैयारियां अंतिम चरण मे हैं। जिले में सैकड़ों स्थानों पर पंडाल निर्माण कर मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित करने और पूजा अर्चन की तैयारियां हैं।
स्कूल कालेजों के इतर नगर में कैलाशपुरी, रविनगर, हनुमानपुर, पथरा, जायसवाल स्कूल, विकास नगर, शाहकुटी, मैनाताली, धर्मशाला रोड, कालीमहाल, चतुर्भुजपुर सहित रेलवे कालोनियों में युवा जगह जगह पंडाल बनाकर मूर्तियां स्थापित कर पूजा अर्चना करते हैं।
अत्यधिक महत्व की वजह से ही नगर के नई बस्ती स्थित मूर्ति कारखाना में मूर्तियों का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इस वर्ष तरह तरह की मूर्तियां बनायी जा रही है।
एक फूट से लेकर दस फूट तक की मूर्तियां यहां बनायी गई है। विशेष कर भगवान शंकर के चेहरे से निकलती मां सरस्वती, रथ पर सवार, पांच फनों वाले सर्प की छतरी ओढ़े और मंदिर में विराजमान मां सरस्वती की प्रतिमा विशेष आकर्षण का केंद्र है।
मूर्तियों को अंतिम टच दे रहे रोहित, संजय प्रजापति, मोनू, अनिल, चंदन, सोनू, हर्ष प्रजापति ने बताया कि यहां बनी मूर्तियां सिर्फ जिले ही नहीं बल्कि आसपास भी जाएंगी।
आर्डर के अलावा सरस्वती पूजा के एक दिन पहले भी दर्जनों मूर्तियां बिकती है।
नगर के नई बस्ती स्थित कुम्हार बस्ती में भी मूर्तियों का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच गया है। कलाकार दिन रात एक कर मूर्तियों को अंतिमटच देने में जुटे हैं। यहां सात सौ से अधिक मूर्तियों का निर्माण हुआ है। विद्या की देवी माने जाने वाली हंसवाहिनी, ज्ञानदायिनी, वीणा वादिनी, पद्मासना मां सरस्वती की पूजा इस वर्ष तेरह फरवरी को होगी। मां सरस्वती पूजा को लेकर विशेषकर युवाओं में विशेष उत्साह है।
मदनोत्सव और श्री पंचमी जैसे नामों से प्रसिद्ध मां सरस्वती की पूजा को लेकर जिले में तैयारियां अंतिम चरण मे हैं। जिले में सैकड़ों स्थानों पर पंडाल निर्माण कर मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित करने और पूजा अर्चन की तैयारियां हैं।
स्कूल कालेजों के इतर नगर में कैलाशपुरी, रविनगर, हनुमानपुर, पथरा, जायसवाल स्कूल, विकास नगर, शाहकुटी, मैनाताली, धर्मशाला रोड, कालीमहाल, चतुर्भुजपुर सहित रेलवे कालोनियों में युवा जगह जगह पंडाल बनाकर मूर्तियां स्थापित कर पूजा अर्चना करते हैं।
अत्यधिक महत्व की वजह से ही नगर के नई बस्ती स्थित मूर्ति कारखाना में मूर्तियों का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इस वर्ष तरह तरह की मूर्तियां बनायी जा रही है।
एक फूट से लेकर दस फूट तक की मूर्तियां यहां बनायी गई है। विशेष कर भगवान शंकर के चेहरे से निकलती मां सरस्वती, रथ पर सवार, पांच फनों वाले सर्प की छतरी ओढ़े और मंदिर में विराजमान मां सरस्वती की प्रतिमा विशेष आकर्षण का केंद्र है।
मूर्तियों को अंतिम टच दे रहे रोहित, संजय प्रजापति, मोनू, अनिल, चंदन, सोनू, हर्ष प्रजापति ने बताया कि यहां बनी मूर्तियां सिर्फ जिले ही नहीं बल्कि आसपास भी जाएंगी।
आर्डर के अलावा सरस्वती पूजा के एक दिन पहले भी दर्जनों मूर्तियां बिकती है।