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Chandauli News: सकलडीहा में मुंसफी न्यायालय शुरू होने की जगी उम्मीद
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तहसील में मुंसफी न्यायालय शुरू कराने की लंबे समय से चली आ रही मांग अब पूरी होने की उम्मीद जगी है। जिला जज दिवाकर प्रसाद चतुर्वेदी ने पिछले दिनों ही तहसील परिसर स्थित भवन और कमरों का निरीक्षण किया था।
न्यायालय शुरू होने से तहसील क्षेत्र के 441 गांवों के ग्रामीणों, वादकारियों और अधिवक्ताओं को न्यायिक कार्यों के लिए जिला मुख्यालय की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। गौरतलब है कि तहसील भवन का शिलान्यास 20 अक्तूबर 1994 को हुआ था। वर्ष 2001 में नवनिर्मित भवन से तहसील का संचालन शुरू हुआ।
इसके बाद से ही अधिवक्ता सकलडीहा में मुंसफी न्यायालय स्थापित करने की मांग कर रहे हैं। इसको लेकर कई बार धरना-प्रदर्शन करने के साथ अधिकारियों और जिला जज से भी गुहार लगाई गई। बार एसोसिएशन के प्रयासों के बाद जिला जज ने भवन का निरीक्षण किया था।
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इस दौरान न्यायालय कक्ष, नजारत, बाथरूम और अतिरिक्त कमरों की उपलब्धता का जायजा लिया गया था।
छोटे मुकदमों की होगी सुनवाई : बार एसोसिएशन सकलडीहा के अध्यक्ष अशोक यादव और महामंत्री रामराज यादव ने बताया कि मुंसफी न्यायालय शुरू होने पर जमीन-मकान के बंटवारे, गांव की आबादी से जुड़े विवाद, चेक संबंधी मामलों और तीन साल से कम सजा वाले अपराधों से संबंधित मुकदमों की सुनवाई में सहूलियत मिलेगी।
इससे वादकारियों को छोटी-छोटी कानूनी प्रक्रियाओं के लिए जिला मुख्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।
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न्यायालय शुरू होने से तहसील क्षेत्र के 441 गांवों के ग्रामीणों, वादकारियों और अधिवक्ताओं को न्यायिक कार्यों के लिए जिला मुख्यालय की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। गौरतलब है कि तहसील भवन का शिलान्यास 20 अक्तूबर 1994 को हुआ था। वर्ष 2001 में नवनिर्मित भवन से तहसील का संचालन शुरू हुआ।
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इसके बाद से ही अधिवक्ता सकलडीहा में मुंसफी न्यायालय स्थापित करने की मांग कर रहे हैं। इसको लेकर कई बार धरना-प्रदर्शन करने के साथ अधिकारियों और जिला जज से भी गुहार लगाई गई। बार एसोसिएशन के प्रयासों के बाद जिला जज ने भवन का निरीक्षण किया था।
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इस दौरान न्यायालय कक्ष, नजारत, बाथरूम और अतिरिक्त कमरों की उपलब्धता का जायजा लिया गया था।
छोटे मुकदमों की होगी सुनवाई : बार एसोसिएशन सकलडीहा के अध्यक्ष अशोक यादव और महामंत्री रामराज यादव ने बताया कि मुंसफी न्यायालय शुरू होने पर जमीन-मकान के बंटवारे, गांव की आबादी से जुड़े विवाद, चेक संबंधी मामलों और तीन साल से कम सजा वाले अपराधों से संबंधित मुकदमों की सुनवाई में सहूलियत मिलेगी।
इससे वादकारियों को छोटी-छोटी कानूनी प्रक्रियाओं के लिए जिला मुख्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।