{"_id":"5eba89738ebc3e90966504a6","slug":"he-body-of-the-soldier-was-handed-over-in-the-atmosphere-of-gum-chandauli-news-vns5244746198","type":"story","status":"publish","title_hn":"गम के माहौल में फौजी के शव को किया गया सुपुर्द ए खाक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गम के माहौल में फौजी के शव को किया गया सुपुर्द ए खाक
विज्ञापन
जफरुद्दीन खान, फौजी (फाइल फोटो)
- फोटो : CHANDAULI
धीना। स्थानीय थाना के गोपालपुर निवासी फौजी जफरुद्दीन खान (44) के शव को मंगलवार की सुबह 10 बजे गांव के कब्रिस्तान में सुपुर्द ए खाक किया गया। फौजी सोमवार को बाइक से लखनऊ जा रहा था। जौनपुर में सड़क हादसे में जफरूद्दीन की मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम के बाद देर रात फौजी का शव गांव में पहुंचा। शव पहुंचते ही गांव में कोहराम मच गया।
गांव निवासी जफरुद्दीन लखनऊ हेड क्वार्टर पर तैनात थे। होली से दो दिन पहले आठ मार्च को एक महीने की छुट्टी पर वह घर आए थे। लाक डाउन के चलते एक माह की छूट्टी और बढ़ गई। इसी बीच लखनऊ हेड क्वार्टर से जेसीओ का ड्यूटी पर आने का फोन आया। जफरुद्दीन जाने की तैयारी करने लगे तो पत्नी सहित दोनों बेटियां रोकने लगी लेकिन वह नहीं माने और सोमवार की भोर में ही बाइक से लखनऊ जाने के लिए निकल गये। दिन में 11 बजे मड़ियाहूं जौनपुर से आई फोन काल से पता चला कि सड़क हादसे में फौजी की मौत हो चुकी है। इस घटना के बाद जफरुद्दीनी की पत्नी शबाना बेगम अचेत हो गई। जफरुद्दीन के साले बड़गांवां निवासी फिरोज खान ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद वहां से लाश लेकर रात 10 बजे गोपालपुर पहुंचे। घटना की जानकारी सभी नजदीकी रिश्तेदारों को दे दी गई। जफरुद्दीन खान सेना में हवलदार के पद पर थे। इकलौता बेटा साहिल खान 20 वर्ष भी सेना में एक वर्ष पहले भर्ती हुआ है और नासिक में ट्रेनिंग ले रहा है। बड़ी बेटी सबरीन (18) इंटरमीडिएट की परीक्षा दी है। छोटी बेटी सुहाना (10 ) चौथी कक्षा में पढ़ती है।
इनसेट-
इकलौता बेटा नहीं दे पाया कंधा
धीना। फौजी पिता जफरुद्दीन खान कि जौनपुर के मड़ियाहूं में हुई दुर्घटना में दर्दनाक मौत की सूचना इकलौते बेटे साहिल खान को सोमवार 11 मई को ही दे दी गई, लेकिन लॉकडाउन की वजह से वही नहीं आ पाया। ऐसे में अंतिम सफर में पिता को बेटे का कंधा नसीब नहीं हो सका।
विज्ञापन
विज्ञापन
गांव निवासी जफरुद्दीन लखनऊ हेड क्वार्टर पर तैनात थे। होली से दो दिन पहले आठ मार्च को एक महीने की छुट्टी पर वह घर आए थे। लाक डाउन के चलते एक माह की छूट्टी और बढ़ गई। इसी बीच लखनऊ हेड क्वार्टर से जेसीओ का ड्यूटी पर आने का फोन आया। जफरुद्दीन जाने की तैयारी करने लगे तो पत्नी सहित दोनों बेटियां रोकने लगी लेकिन वह नहीं माने और सोमवार की भोर में ही बाइक से लखनऊ जाने के लिए निकल गये। दिन में 11 बजे मड़ियाहूं जौनपुर से आई फोन काल से पता चला कि सड़क हादसे में फौजी की मौत हो चुकी है। इस घटना के बाद जफरुद्दीनी की पत्नी शबाना बेगम अचेत हो गई। जफरुद्दीन के साले बड़गांवां निवासी फिरोज खान ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद वहां से लाश लेकर रात 10 बजे गोपालपुर पहुंचे। घटना की जानकारी सभी नजदीकी रिश्तेदारों को दे दी गई। जफरुद्दीन खान सेना में हवलदार के पद पर थे। इकलौता बेटा साहिल खान 20 वर्ष भी सेना में एक वर्ष पहले भर्ती हुआ है और नासिक में ट्रेनिंग ले रहा है। बड़ी बेटी सबरीन (18) इंटरमीडिएट की परीक्षा दी है। छोटी बेटी सुहाना (10 ) चौथी कक्षा में पढ़ती है।
विज्ञापन
इनसेट-
इकलौता बेटा नहीं दे पाया कंधा
धीना। फौजी पिता जफरुद्दीन खान कि जौनपुर के मड़ियाहूं में हुई दुर्घटना में दर्दनाक मौत की सूचना इकलौते बेटे साहिल खान को सोमवार 11 मई को ही दे दी गई, लेकिन लॉकडाउन की वजह से वही नहीं आ पाया। ऐसे में अंतिम सफर में पिता को बेटे का कंधा नसीब नहीं हो सका।
विज्ञापन