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छह माह में 44 से सिमटकर 11 करोड़ पर पहुंचा फर्नीचर कारोबार

Mon, 03 Aug 2020 11:42 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 03 Aug 2020 11:42 PM IST
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Furniture business shrinks to Rs 11 crore from 44 in six months
पीडीडीयू नगर। कोरोना काल में लगभग सभी व्यवसायों पर संकट आया हुआ है। बिक्री घटने व अन्य खर्चे जारी रहने से व्यवसायियों को दिक्कत हो रही है। कोरोना के कारण हुई बाजार बंदी का फर्नीचर व्यापार पर भी व्यापक प्रभाव पड़ा है। फर्नीचर कोरोबारियों के अनुसार जिले में वर्ष में लगभग 88 करोड़ फर्नीचर का कारोबार होता है। छह माह में होने वाला लगभग 44 करोड़ का कारोबार घटकर कोरोना काल में मात्र11 करोड़ का हुआ है। इससे फर्नीचर कारोबारियों के लिए दुकान व स्टाफ का खर्च संभालना कठिन हो गया है।
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जिले में छोटी-बड़ी लगभग 200 फर्नीचर की दुकानें हैं। लॉकडाउन लगने के पहले सामान्य दिनों में प्रत्येक महीने एक शोरूम व्यवसायी तकरीबन साढ़े तीन लाख रुपये का कारोबार करता था। इसके अलावा छोटे दुकानदार भी अच्छा-खासा व्यापार कर लिया करते थे। लॉकडाउन व अनलॉक काल में दुकानों को बंद रखने या सप्ताह के तीन दिन ही खोलने के नियम से भी कारोबार को झटका लगा है। लेकिन इन छह महीनों में करीब 11 करोड़ का ही कारोबार हुआ है। सोमवार से सप्ताह में पांच दिन सुबह के नौ से शाम के पांच बजे तक दुकानों को खोलने की अनुमति मिलने के बाद फर्नीचर कारोबारियों को कारोबार बढ़ने की उम्मीद जगी है। दुकानदारों का कहना है कि व्यवसाय को सबसे ज्यादा झटका सीमित संख्या में शादियों के होने से भी लगा है। लगन के समय पलंग, सोफा, ड्रेसिंग टेबल सहित अन्य फर्नीचरों की जमकर बिक्री होती है। इस वर्ष पूरा सीजन बेकार बीत गया है। अब दुकानों को खोलने की इजाजत मिलने के बाद कारोबार में सुधार की उम्मीद जगी है।
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पटेल नगर स्थित पाल फर्नीचर घर के संचालक अशोक पाल ने बताया कि कोरोना के कारण व्यवसाय घटा है। पिछले छह माह में केवल 20 से 25 प्रतिशत ही कारोबार हुआ है। इससे दुकान चलाते रहना काफी कठिन हो गया है। सैयदराजा के फर्नीचर व्यापारी इम्तियाज खान पप्पू ने बताया कि शादी-विवाह नहीं के बराबर होने के कारण व्यवसाय काफी कम हुआ है। पिछले छह माह से व्यापार की हालत खराब है। दुकान में स्टाफ की संख्या भी घटाने के निर्देश दिए गए हैं लेकिन वेतन सभी को देना पड़ रहा है। जनता फर्नीचर के संचालक आलमगीर खान का कहना है कि बाहर से लकड़ियों के आने में कमी होने का भी व्यवसाय पर असर पड़ा है। इससे नए फर्नीचर काफी कम संख्या में बन पा रहे हैं। वहीं शादी-विवाह न होने से पुराने फर्नीचर भी दुकानों की शोभा ही बने हुए हैं। वहीं फर्नीचर व्यवसायी हिमांशु ने कहा कि लॉकडाउन के कारण स्टाफ का खर्च संभालना भी मुश्किल हो गया है। वहीं दुकान का बिजली का बिल सहित अन्य खर्चे भी जस के तस बने हुए हैं। व्यवसायी ने प्रदेश सरकार से बिजली बिल में राहत दिए जाने की मांग की है।
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