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घर से निकलने वाले सीवेज शोधन के लिए बनेगा एफएसटीपी

Sun, 20 Dec 2020 12:32 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 20 Dec 2020 12:32 AM IST
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FSTP will be made in Guwas village for sewage treatment
पीडीडीयू नगर। नगरीय इलाकों के सीवेज ट्रीटमेंट के लिए जलकल विभाग एफएसटीपी (फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट) का निर्माण कराएगा। इसके लिए लगभग साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से हाईवे के समीप गुवास गांव के पास करीब 10 बिस्वा में इसका प्लांट लगेगा। सीवेज को शोधित कर जहां ठोस कचरे से जैविक खाद बनाई जाएगी वहीं शोधित पानी को नहरों में छोड़कर सिंचाई में इस्तेमाल किया जाएगा। अभी तक इसे गंगा जी में बहा दिया जाता है। प्लांट के बन जाने प्रदूषण कम होगा ही गंदगी भी कम होगी।
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नगर पालिका पीडीडीयू नगर क्षेत्र में कुल 25 वार्ड हैं। जहां डेढ़ लाख से अधिक की आबादी निवासी करती है। यहां कई घरों में सेफ्टी टैंक बने तो कई जगह मल सीधे नालियों में बहाया जाता है। इसके साथ ही नगर पालिका की ओर से सेफ्टी ट्रैंक से मल जल निकालने के लिए मशीने तो उपलब्ध है लेकिन उसे मशीन के जरिए मल को एक ट्रैंक में एकत्र किया जाता है और बाद में उसे किसी बड़ी नाले में गिरा दिया जाता है। इससे घरों से निकलने वाला मल-जल सीधे गंगा नदी में गिरता है। ऐसे में नगरीय क्षेत्र में निकलने वाले मल जल को शोधित करने के लिए एफएसटीपी लगाया जाना है। यह प्लांट लगभग 4.50 करोड़ रुपये की लागत से गुवास में 32 किलोलीटर डेली (केएलडी) का प्लांट तैयार किया जाएगा।
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एफएसटीपी के लिए जिला प्रशासन की ओर से गुवास गांव में जमीन मिल गई है। प्लांट तैयार करने की जिम्मेदारी पुणे की एक निजी संस्था को दिया गया है। उम्मीद है कि एक वर्ष के भीतर प्लांट बन कर तैयार हो जाएगा। हेमंत सिंह, एक्सईएन, जल निगम
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पीडीडीयू नगर। । जल मल शोधन के लिए तैयार होने वाले प्लांट में टाइगर बॉयो विधि का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके मल को एक टैंक के माध्यम से प्लांट तक लाया जाएगा। इसके बाद टैंकर से मल को जमीन के भीतर बने विभिन्न चेंबर में भेज दिया जाएगा। जहां मल व जल को अलग किया जाएगा। इसके बाद मल को टाइगर वार्म्स की मदद से खाद का रूप दिया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ जल को शोधित करने लिए उसे विभिन्न स्तर से गुजारा जाएगा। इसके बाद जल की अशुद्धियों को पौधों की जरिए शोधित किया जाएगा। इसके बाद आगे इसे और अधिक शोधित कर बाहर निकाला जाएग। जहां मल से खाद तैयार होगी वहीं शोधित जल खेती कार्य में इस्तेमाल हो सकेगा। यह पूरी प्रक्रिया जमीन के भीतर पूरी होगी। संवाद

पीडीडीयू नगर। नगरीय इलाकों के शौचालय की टंकी से निकलने वाले सीवेज को अब तक सीधे नाले में बहा दिया जा रहा था। इससे गंगा में प्रदूषण तो बढ़ ही रहा है साथ ही गंदगी भी फैलती है। अब इसे रोकने के लिए जलकल विभाग एफएसटीपी (फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट) का निर्माण कराएगा। लगभग साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से हाईवे के समीप गुवास गांव के पास करीब 10 बिस्वा में इसका प्लांट लगेगा। सीवेज को शोधित कर जहां ठोस कचरे से जैविक खाद बनाई जाएगी वहीं शोधित पानी को नहरों में छोड़कर सिंचाई में इस्तेमाल किया जाएगा
शौचालय की टंकी से निकले मल जल का होगा शोधन
रिपोर्ट- कमलजीत सिंह
बाइट - 2244
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