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Chandauli News: चार मकान गंगा में डूबे, अब तक 124 पक्के मकान समा चुके
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चक्की नौरंगा गांव में गंगा नदी की उतरती लहरों में समाहित होता मकान। जागरुक पाठक
मझौवां। गंगा के जलस्तर में कमी आ रही है लेकिन बैरिया तहसील क्षेत्र के चक्की नौरंगा गांव में कटान जारी है। शुक्रवार को चार और मकान गंगा में डूब गए।
चक्की नौरंगा में अब तक 133 मकानों का नामोनिशान मिट चुका है। जिसमें 124 पक्का व 9 कच्चा मकान शामिल हैं। इस साल चौथी पर गंगा में उफान देखने को मिला है। इसके चलते गांव के किसान और आम लोग काफी प्रभावित हुए हैं।
बाढ़ और कटान से अब तक कई एकड़ कृषि योग्य भूमि भी नदी में समाहित हो चुकी है, जिससे यहां के लोगों का जीवन संकट में घिर गया है। शुक्रवार की सुबह कटान में वेदप्रकाश चौबे, पारस चौबे, श्रीकृष्ण चौबे और नेभी चौबे का मकान विलीन हो गया। कटान से प्रभावित किसानों में दीनानाथ तिवारी, वीरेंद्र तिवारी, शंभू मिश्र, रवींद्र ठाकुर, अखिलेश ठाकुर, विनोद ठाकुर, संतोष ठाकुर ने कहा कि जलस्तर खिसकने पर भयंकर कटान होने लगा है। अभी गंगा नदी की उतरती लहरें अक्टूबर माह तक तबाही मचा सकती है।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गायघाट गेज पर शुक्रवार की शाम 4 बजे गंगा नदी का जलस्तर 57.900 मीटर दर्ज किया गया। इसके साथ ही एक सेमी प्रति घंटे की दर से जलस्तर में कमी दर्ज की जा रही है। गंगा अभी खतरे के निशान से 57.615 मीटर से 285 सेमी ऊपर बह रही है।
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चक्की नौरंगा में अब तक 133 मकानों का नामोनिशान मिट चुका है। जिसमें 124 पक्का व 9 कच्चा मकान शामिल हैं। इस साल चौथी पर गंगा में उफान देखने को मिला है। इसके चलते गांव के किसान और आम लोग काफी प्रभावित हुए हैं।
बाढ़ और कटान से अब तक कई एकड़ कृषि योग्य भूमि भी नदी में समाहित हो चुकी है, जिससे यहां के लोगों का जीवन संकट में घिर गया है। शुक्रवार की सुबह कटान में वेदप्रकाश चौबे, पारस चौबे, श्रीकृष्ण चौबे और नेभी चौबे का मकान विलीन हो गया। कटान से प्रभावित किसानों में दीनानाथ तिवारी, वीरेंद्र तिवारी, शंभू मिश्र, रवींद्र ठाकुर, अखिलेश ठाकुर, विनोद ठाकुर, संतोष ठाकुर ने कहा कि जलस्तर खिसकने पर भयंकर कटान होने लगा है। अभी गंगा नदी की उतरती लहरें अक्टूबर माह तक तबाही मचा सकती है।
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केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गायघाट गेज पर शुक्रवार की शाम 4 बजे गंगा नदी का जलस्तर 57.900 मीटर दर्ज किया गया। इसके साथ ही एक सेमी प्रति घंटे की दर से जलस्तर में कमी दर्ज की जा रही है। गंगा अभी खतरे के निशान से 57.615 मीटर से 285 सेमी ऊपर बह रही है।
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