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पहाड़ों पर पांच सौ और मैदानी क्षेत्र में 25 सेमी कम हो रहा जल स्तर
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चकिया / शिकारगंज। कृषि तथा उद्योगों में भूगर्भीय जल के प्रयोग तथा पानी की आवश्यकता पूरा करने के लिए भूगर्भीय जल के चौथे स्तर से पानी के दोहन से जल संकट गहराता जा रहा है। वहीं रेन वाटर हार्वेस्टिंग के प्रति जागरूकता का अभाव भी भूगर्भीय जल स्तर को सुधारने में बाधा बना हुआ है। आंकड़ों के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में प्रति वर्ष आधा मीटर तो मैदानी क्षेत्र में 25 सेमी जल स्तर खिसक रहा है।
सिंचाई और उद्योगों में प्रयोग के साथ ही पेयजल के इस्तेमाल के लिए सबमर्सिबल पंपों से भूगर्भीय जल के चौथे स्तर से पानी खींचा जा रहा है। इसके चलते भूमिगत जल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार चंदौली जनपद में पर्वतीय क्षेत्रों में पांच सौ सेमी और मैदानी क्षेत्रों में 25 सेमी तक हर वर्ष भूमिगत जल स्तर खिसकता जा रहा है। इससे गर्मी के मौसम में नौगढ़, शिकारगंज तथा वनगावा के क्षेत्र डार्क जोन में जाते रहे हैं। इन क्षेत्रों में मानव के अतिरिक्त पशु पेयजल की भी किल्लत होती रही है। हालांकि पिछले मानसून सत्र में हुई अच्छी बरसात तथा जाड़े के मौसम में भी कई अच्छी बरसात के कारण इस वर्ष भूमिगत जल स्तर बरकरार है। इससे लोगों की जरूरत पूरी हो सकती है लेकिन भूमिगत जल स्तर के निर्बाध दोहन भूमिगत जल स्तर को रिचार्ज करने में बरती जा रही लापरवाही से क्षेत्र में बड़ा जल संकट खड़ा हो सकता है। चकिया विकास खंड में कार्यरत एडीओ एमआई आगाज खां कहते हैं कि भूमिगत जल के चौथे स्तर से पानी के दोहन से भूमिगत जल स्तर में आ रही गिरावट अच्छे मानसून के कारण इस वर्ष कम है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में पांच सौ सेमी और मैदानी क्षेत्र में 25 सेमी गिरावट हुई है।
पर्वतीय वन क्षेत्रों में स्थित विशालकाय बांधों के जलाशय बंधिया ताल पोखरी भूगर्भ जल स्तर को रिचार्ज करने के प्रमुख स्रोत हैं। मैदानी क्षेत्रों में भी ताल पोखरे तालाब भूगर्भीय जलस्तर को मेंटेन करने में सहायक होते हैं। प्राचीन समय में बने ताल पोखर, तालाब, गढ़िया और पोखरिया पटते जा रहे है। मनरेगा के तहत खोदे गए तालाबों की संख्या उस कमी को पूरा नहीं कर पाई है। शहरों तथा कस्बों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग के प्रति जागरूकता का भी अभाव है। जिससे भूजल के स्तर को लगातार गिरावट आ रही है।
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पीडीडीयू नगर। हावड़ा दिल्ली रूट पर अति व्यस्त पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर पानी संरक्षण के पर्याप्त इंतजाम नहीं है। स्थिति यह है कि कभी वाटर पाइप से तो कभी ट्रेनों से पानी प्लेटफार्म पर बेकार में बहता है। हजारों लीटर पानी बेकार बहने से यात्रियों को भी दिक्कत होती है। ट्रेनों में पानी भरने के लिए स्टेशन पर वाटर हाइड्रेंट लगाए गए हैं। कर्मचारियों की लापरवाही से अक्सर इसका पानी बहता रहता है। यही नहीं अक्सर कर्मचारी ट्रेनों में पानी भरने के बाद भी पानी बंद नहीं करते हैं। इससे ट्रेनों से पानी बेवजह प्लेटफार्म पर बहता है।
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सिंचाई और उद्योगों में प्रयोग के साथ ही पेयजल के इस्तेमाल के लिए सबमर्सिबल पंपों से भूगर्भीय जल के चौथे स्तर से पानी खींचा जा रहा है। इसके चलते भूमिगत जल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार चंदौली जनपद में पर्वतीय क्षेत्रों में पांच सौ सेमी और मैदानी क्षेत्रों में 25 सेमी तक हर वर्ष भूमिगत जल स्तर खिसकता जा रहा है। इससे गर्मी के मौसम में नौगढ़, शिकारगंज तथा वनगावा के क्षेत्र डार्क जोन में जाते रहे हैं। इन क्षेत्रों में मानव के अतिरिक्त पशु पेयजल की भी किल्लत होती रही है। हालांकि पिछले मानसून सत्र में हुई अच्छी बरसात तथा जाड़े के मौसम में भी कई अच्छी बरसात के कारण इस वर्ष भूमिगत जल स्तर बरकरार है। इससे लोगों की जरूरत पूरी हो सकती है लेकिन भूमिगत जल स्तर के निर्बाध दोहन भूमिगत जल स्तर को रिचार्ज करने में बरती जा रही लापरवाही से क्षेत्र में बड़ा जल संकट खड़ा हो सकता है। चकिया विकास खंड में कार्यरत एडीओ एमआई आगाज खां कहते हैं कि भूमिगत जल के चौथे स्तर से पानी के दोहन से भूमिगत जल स्तर में आ रही गिरावट अच्छे मानसून के कारण इस वर्ष कम है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में पांच सौ सेमी और मैदानी क्षेत्र में 25 सेमी गिरावट हुई है।
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पर्वतीय वन क्षेत्रों में स्थित विशालकाय बांधों के जलाशय बंधिया ताल पोखरी भूगर्भ जल स्तर को रिचार्ज करने के प्रमुख स्रोत हैं। मैदानी क्षेत्रों में भी ताल पोखरे तालाब भूगर्भीय जलस्तर को मेंटेन करने में सहायक होते हैं। प्राचीन समय में बने ताल पोखर, तालाब, गढ़िया और पोखरिया पटते जा रहे है। मनरेगा के तहत खोदे गए तालाबों की संख्या उस कमी को पूरा नहीं कर पाई है। शहरों तथा कस्बों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग के प्रति जागरूकता का भी अभाव है। जिससे भूजल के स्तर को लगातार गिरावट आ रही है।
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पीडीडीयू नगर। हावड़ा दिल्ली रूट पर अति व्यस्त पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर पानी संरक्षण के पर्याप्त इंतजाम नहीं है। स्थिति यह है कि कभी वाटर पाइप से तो कभी ट्रेनों से पानी प्लेटफार्म पर बेकार में बहता है। हजारों लीटर पानी बेकार बहने से यात्रियों को भी दिक्कत होती है। ट्रेनों में पानी भरने के लिए स्टेशन पर वाटर हाइड्रेंट लगाए गए हैं। कर्मचारियों की लापरवाही से अक्सर इसका पानी बहता रहता है। यही नहीं अक्सर कर्मचारी ट्रेनों में पानी भरने के बाद भी पानी बंद नहीं करते हैं। इससे ट्रेनों से पानी बेवजह प्लेटफार्म पर बहता है।