{"_id":"6345c6637227371f4572e766","slug":"eyes-of-deceived-devotees-seeing-bharat-milap-chandauli-news-vns6784820174","type":"story","status":"publish","title_hn":"गेम खेलने पर मां की डांट से क्षुब्ध किशोर ने लगाई थी गंगा में छलांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गेम खेलने पर मां की डांट से क्षुब्ध किशोर ने लगाई थी गंगा में छलांग
विज्ञापन
पीडीडीयू नगर। मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत सहजौर गांव स्थित गंगा नदी में डूबे नौवीं के छात्र अभय यादव(15) का दूसरे दिन मंगलवार को भी कहीं पता नहीं चल सका। पता चला कि फ्री फायर गेम खेलने पर मां की डांट से क्षुब्ध होकर किशोर ने गंगा में छलांग लगाई थी। घटना से मुहल्ले में मातम पसरा है। 20 घरों का चूल्हा सोमवार से नहीं जला है। मां रोते-रोते बेसुध हो जा रही है। वहीं परिजन सोमवार शाम से ही गंगा किनारे खड़े हैं।
मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र के चतुर्भुजपुर निवासी राजेश यादव के दो पुत्र हैं-आदर्श यादव (18) और अभय यादव (15)। सोमवार की सुबह मां चंद्रावती देवी सब्जी बना रही थी। इस दौरान कुछ काम के लिए बाहर गई और पास में ही बैठे अभय से सब्जी देखने को कहा। जब वापस लौटीं तो देखा कि सब्जी जल चुकी है और अभय फ्री फायर गेम खेल रहा था। मां ने इसपर उसको डांट लगाई। जिससे क्षुब्ध होकर वह साइकिल से घर से निकल गया।
शाम लगभग चार बजे तक जब वह घर नहीं लौटा तो परिवार वालों ने उसकी खोजबीन शुरू की। इस दौरान उसकी साइकिल सहजौर गांव स्थित एक मंदिर के पास खड़ी मिली। गांव के चरवाहों ने किशोर को गंगा में छलांग लगाते देखा था। पुलिस ने पहले मल्लाहों की मदद से उसे ढूंढने का प्रयास किया फिर गोताखोर बुलाए गए। सोमवार पूरे दिन और मंगलवार को भी देर शाम तक खोजबीन चलती रही पर किशोर का कहीं पता नहीं चल पाया। किशोर के परिजनों के साथ मुहल्ले के सौ से ज्यादा लोग गंगा तट पर सोमवार से खोजबीन मेें जुटे हैं। किशोर के मिलने की आस में लोग मंगलवार की शाम तक गंगा घाट पर खड़े रहे।
विज्ञापन
मुगलसराय कोतवाली प्रभारी निरीक्षक संतोष श्रीवास्तव ने बताया कि काफी खोजबीन के बाद भी नदी में अभय का कहीं भी पता नहीं चल सका है। अभय की फोटो युक्त पंपलेट को आसपास के थानों पर भिजवा दिया गया है। वहीं लोगों से भी अपील की गई है कि अभय के बारे में जानकारी होते ही इसकी सूचना पुलिस को दें।
पीडीडीयू नगर। एक वर्ष पूर्व चार सितंबर 2021 को धीना थाना क्षेत्र के एक किशोर ने गेम खेलने से मना करने पर ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी थी। इमीलिया गांव निवासी इस्माइल के तीन पुत्रों में सबसे छोटा 17 वर्षीय कुतुबुद्दीन मोबाइल पर दिनभर पब्जी गेम खेलता था। किशोर को गेम खेलने से पिता ने नाराजगी जताई। इससे नाराज किशोर धीना रेलवे स्टेशन के पश्चिम की ओर स्थित डैना गांव के सामने अप लाइन पर ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी। संवाद
पीडीडीयू नगर। बदलते वक्त के साथ बच्चों का खेल खेलने का तरीका भी बदल गया। जहां आज से कुछ साल पहले तक बच्चे बाहर जाकर खेल खेलना पसंद करते थे। वहीं आजकल के बच्चों को फोन, कंप्यूटर पर वीडियो गेम खेलना ज्यादा पसंद होता है। कई बच्चों को वीडियो गेम खेलते खेलते इसकी लत लग जाती है और वो घंटों तक इसमें अपना समय बिताते हैं। वहीं कोरोना काल में ये समस्या और बढ़ गई। स्कूल बंद थे, बच्चे बाहर नहीं जा सकते थे। ऐसे में वो ज्यादा समय वीडियो गेम पर बिताने लगे। ऐसा ही एक वीडियो गेम है फ्री फायर । ये गेम देश में कई बच्चों की मौत का कारण तक बन रहा है। दरअसल, इस गेम की जाल में कुछ बच्चे इस तरह फंस जाते है कि वो अपनी जान तक दे देते हैं। इस खेल में वे इतने तल्लीन हो जाते हैं कि किसी की दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं करते।संवाद
इंटरनेट पर तमाम तरह की गेम अपलोड किए जा रहे हैं जिससे बच्चों को उसकी लत लग जा रही है। जैसे कोई नशे का आदी होता है वैसे बच्चे इसके आदि हो जा रहे हैं। वे सामाज से कट जा रहे हैैं और उनमें इससे बर्दाश्त करने की क्षमता भी कम हो जा रही है। गेम खेलने के दौरान रूकावट पर वे ऐसे खतरनाक कदम उठा रहे हैं। माता-पिता को काफी पहले ही बच्चों को इससे रोकना चाहिए। जब लत पड़ जाए तो डांटकर नहीं बल्कि धीरे-धीरे समझाकर और अन्य कोई मनोरंजक कार्य देकर इसे छुड़ाया जा सकता है।-
-डॉ. नितेश सिंह, मनोचिकित्सक, जिला अस्पताल, चंदौली
विज्ञापन
मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र के चतुर्भुजपुर निवासी राजेश यादव के दो पुत्र हैं-आदर्श यादव (18) और अभय यादव (15)। सोमवार की सुबह मां चंद्रावती देवी सब्जी बना रही थी। इस दौरान कुछ काम के लिए बाहर गई और पास में ही बैठे अभय से सब्जी देखने को कहा। जब वापस लौटीं तो देखा कि सब्जी जल चुकी है और अभय फ्री फायर गेम खेल रहा था। मां ने इसपर उसको डांट लगाई। जिससे क्षुब्ध होकर वह साइकिल से घर से निकल गया।
विज्ञापन
शाम लगभग चार बजे तक जब वह घर नहीं लौटा तो परिवार वालों ने उसकी खोजबीन शुरू की। इस दौरान उसकी साइकिल सहजौर गांव स्थित एक मंदिर के पास खड़ी मिली। गांव के चरवाहों ने किशोर को गंगा में छलांग लगाते देखा था। पुलिस ने पहले मल्लाहों की मदद से उसे ढूंढने का प्रयास किया फिर गोताखोर बुलाए गए। सोमवार पूरे दिन और मंगलवार को भी देर शाम तक खोजबीन चलती रही पर किशोर का कहीं पता नहीं चल पाया। किशोर के परिजनों के साथ मुहल्ले के सौ से ज्यादा लोग गंगा तट पर सोमवार से खोजबीन मेें जुटे हैं। किशोर के मिलने की आस में लोग मंगलवार की शाम तक गंगा घाट पर खड़े रहे।
विज्ञापन
मुगलसराय कोतवाली प्रभारी निरीक्षक संतोष श्रीवास्तव ने बताया कि काफी खोजबीन के बाद भी नदी में अभय का कहीं भी पता नहीं चल सका है। अभय की फोटो युक्त पंपलेट को आसपास के थानों पर भिजवा दिया गया है। वहीं लोगों से भी अपील की गई है कि अभय के बारे में जानकारी होते ही इसकी सूचना पुलिस को दें।
पीडीडीयू नगर। एक वर्ष पूर्व चार सितंबर 2021 को धीना थाना क्षेत्र के एक किशोर ने गेम खेलने से मना करने पर ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी थी। इमीलिया गांव निवासी इस्माइल के तीन पुत्रों में सबसे छोटा 17 वर्षीय कुतुबुद्दीन मोबाइल पर दिनभर पब्जी गेम खेलता था। किशोर को गेम खेलने से पिता ने नाराजगी जताई। इससे नाराज किशोर धीना रेलवे स्टेशन के पश्चिम की ओर स्थित डैना गांव के सामने अप लाइन पर ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी। संवाद
पीडीडीयू नगर। बदलते वक्त के साथ बच्चों का खेल खेलने का तरीका भी बदल गया। जहां आज से कुछ साल पहले तक बच्चे बाहर जाकर खेल खेलना पसंद करते थे। वहीं आजकल के बच्चों को फोन, कंप्यूटर पर वीडियो गेम खेलना ज्यादा पसंद होता है। कई बच्चों को वीडियो गेम खेलते खेलते इसकी लत लग जाती है और वो घंटों तक इसमें अपना समय बिताते हैं। वहीं कोरोना काल में ये समस्या और बढ़ गई। स्कूल बंद थे, बच्चे बाहर नहीं जा सकते थे। ऐसे में वो ज्यादा समय वीडियो गेम पर बिताने लगे। ऐसा ही एक वीडियो गेम है फ्री फायर । ये गेम देश में कई बच्चों की मौत का कारण तक बन रहा है। दरअसल, इस गेम की जाल में कुछ बच्चे इस तरह फंस जाते है कि वो अपनी जान तक दे देते हैं। इस खेल में वे इतने तल्लीन हो जाते हैं कि किसी की दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं करते।संवाद
इंटरनेट पर तमाम तरह की गेम अपलोड किए जा रहे हैं जिससे बच्चों को उसकी लत लग जा रही है। जैसे कोई नशे का आदी होता है वैसे बच्चे इसके आदि हो जा रहे हैं। वे सामाज से कट जा रहे हैैं और उनमें इससे बर्दाश्त करने की क्षमता भी कम हो जा रही है। गेम खेलने के दौरान रूकावट पर वे ऐसे खतरनाक कदम उठा रहे हैं। माता-पिता को काफी पहले ही बच्चों को इससे रोकना चाहिए। जब लत पड़ जाए तो डांटकर नहीं बल्कि धीरे-धीरे समझाकर और अन्य कोई मनोरंजक कार्य देकर इसे छुड़ाया जा सकता है।-
-डॉ. नितेश सिंह, मनोचिकित्सक, जिला अस्पताल, चंदौली