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दिव्यांगों को नहीं मिल पा रहा योजनाओं का लाभ

Thu, 03 Dec 2020 12:44 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 03 Dec 2020 12:44 AM IST
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Divyang is not getting the benefit of schemes
चंदौली। दिव्यांगों की मदद के लिए सरकार भले कई योजनाएं चलाने का दावा कर रही है, लेकिन इनका लाभ उन तक कितना पहुंच रहा है, इस पर गौर करने वाला कोई नहीं है। जिले में लगभग पच्चीस हजार दिव्यांग हैं। आंकड़ों के मुताबिक 11432 हजार दिव्यांगों के ही बैंक खाते में पांच सौ रुपये प्रति माह पेंशन भेजी जा रही है।
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बाकी दिव्यांग सरकारी पेंशन पाने को इधर-उधर भटक रहे हैं।
दिव्यांगों को राहत देने के लिए पेंशन, कृत्रिम अंग वितरण करने के साथ कई योजनाएं चला रही हैं। मगर इनका लाभ जरूरतमंदों को नहीं मिल पा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिले में लगभग 25 हजार से अधिक दिव्यांग पंजीकृत हैं। इनमें 11432 को विभाग से पांच रुपये प्रति माह पेंशन दिया जा रहा है। वहीं वर्तमान में विभागीय सुस्ती के चलते डाटा फीडिंग के बाद भी आठ सौ आवेदन लंबित हैं। अधिकारियों की मानें तो दिव्यांगों व परिजनों की शिथिलता के कारण आवेदन प्रक्रिया कम हो रही है। इससे अधिक से अधिक दिव्यांग योजनाओं से वंचित हैं। पिछले माह से सौ से अधिक आवेदन आए थे सभी आवेदनों को पेंशन के लिए भेज दिया गया है।
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दिव्यांगों को प्रोत्साहित करने के लिए 20 हजार तक की धनराशि निजी भूमि पर दुकान निर्माण के लिए दी जाती है। जिन दिव्यांग के पास अपनी भूमि नहीं है, उन्हें दुकान संचालन के लिए 10 हजार रुपये दिए जाते हैं। इसमें सरकार की तरफ से ढाई हजार रुपये का अनुदान है। बाकी रकम चार प्रतिशत ब्याज के साथ अदा करनी होती है। ये भी योजनाएं इसके अलावा भी सरकार की बहुत सी योजना है जो दिव्यांग के लिए है। जैसे दिव्यांग निवारण के लिए शल्य चिकित्सा के लिए अनुदान, राज्य परिवहन निगम की बसों में नि:शुल्क यात्रा, शासकीय सेवा में आरक्षण की व्यवस्था और विशिष्ट दिव्यांगों को राज्य स्तरीय पुरस्कार के साथ-साथ जलकर और हाउस टैक्स में दृष्टिहीन और दिव्यांग को सौ फीसदी से लेकर पचास फीसदी तक छूट प्रदान की भी व्यवस्था है। साथ ही दिव्यांगों के उपकरण वितरण व पेंशन सहित कई सुविधाएं हैं।
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दिव्यांगजनों को विभागीय सुविधाएं देने को समय-समय पर कैंप भी लगाए जा रहे हैं। पेंशन के लिए आवेदन प्राप्त कर उन्हें ऑनलाइन फीड कराया जाता है। ताकि अधिक से अधिक दिव्यांगों को शासन की योजनाओं का लाभ दिया जाए।- राजबहादुर सिंह, जिला विकलांग कल्याण अधिकारी

03-कभी पढ़ाई के लिए बेचते थे अख़बार, आज हैं यूपी के रोल मॉडल
बचपन में ही हो गया था पोलियो, एक हाथ और एक पैर से दिव्यांग हैं राकेश
पीडीडीयू नगर। ऐसे बहुत से दिव्यांग हैं, जो अपनी शारीरिक दिव्यांगता को अभिशाप मानकर बैठ जाते हैं। किंतु उनमें कुछ ऐसे भी होते हैं, जो अपनी विपरीत परिस्थितियों से लड़कर समाज में अपना स्थान बनाते हैं । ऐसे ही मारुफपुर निवासी राकेश रौशन दिव्यांगों में से एक हैं जो हाथ और पैर से दिव्यांग होने के बाद भी अपने हौशले से बीएचयू में पढ़ाई के लिए अखबार बेचा बल्कि मतदाता जागरूकता के रोल माडल भी बने। वर्ष 2016 में चुनाव आयोग ने इन्हें जनपद चंदौली का दिव्यांग स्वीप आईकॉन बनाया। विधानसभा चुनाव 2017, लोकसभा निर्वाचन 2019 में मतदान के लिए आगे बढ़कर काम किया। राकेश रौशन के संघर्षों को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने इन्हें वर्ष 2017 में अपने अति प्रतिष्ठित रोल मॉडल अवार्ड से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों इन्हें प्रदान कर सम्मानित किया। इसके अलावा बेस्ट इलेक्टोरल प्रैक्टिसेज अवार्ड दिया गया। राकेश का कहना है कि व्यक्ति तन से नहीं, मन से दिव्यांग होता है। यदि कोई व्यक्ति मन से कोई लक्ष्य पाने की ठान ले तो, तन की दिव्यांगता उसके मार्ग की बाधक नहीं बनती। उन्होंने बताया कि मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।
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