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Chandauli News: गरई नदी के पुल का निर्माण शुरू
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शिकारगंज। मिर्जापुर और चंदौली जनपद को जोड़ने वाली गरई नदी पर पुल निर्माण के लिए नौ वर्ष पहले शासन से मंजूरी मिली थी। लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद आधा-अधूरा पुल का ढांचा खड़ा है। क्षेत्रीय भाजपा विधायक कैलाश आचार्य ने विभागीय अभियंताओं को निर्माण पूरा कराने के मामले में पहल करने को कहा। जिसको पीडब्ल्यूडी वाराणसी ने संज्ञान में लिया है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर चंदौली के अधिकारियों ने 10 करोड़ 50 लाख रुपए का प्रस्ताव अधीक्षणअभियंता कार्यालय को सौंंपा। ऐसे में शासन से मंजूरी मिलते ही पुल निर्माण को गति मिलने की उम्मीद जग गई है।
गरई नदी पर बना पुराना पुल बरसात के दिनों में अहरौरा बांध से पानी बढ़ने पर आवागमन ठप कर देता है। क्षेत्र के नागरिकों और ग्रामीणों द्वारा समस्या को निजात दिलाने के लिए नौ वर्ष पूर्व तत्कालीन विधायक पूनम सोनकर ने शासन से अवगत कराकर नए पुल निर्माण के लिए मंजूरी दिलाने में भूमिका अदा की थी। शासन से लगभग चार करोड़ रुपए स्वीकृत हुए थे। कार्यदायी संस्था ने तीन पिलर और अन्य कार्य कराए लेकिन धनराशि की कमी और अधिकारियों की लापरवाही से निर्माण पूरा नहीं हो सका।
मामले को संज्ञान में लेते हुए क्षेत्रीय भाजपा विधायक कैलाश आचार्य ने पुल को फाइनल स्वरूप देने के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग के उच्च अधिकारियों से वार्ता की और आने वाली समस्याओं में सहयोग लेने का निर्देश दिया। जिसको पीडब्ल्यूडी विभाग वाराणसी के चीफ इंजीनियर अभिनेश कुमार ने संज्ञान में ले लिया। और चंदौली जनपद के विभागीय अधिकारियों को पुल निर्माण में आने वाली परेशानियों को अति शीघ्र दूर करने के अवगत कराने का निर्देश दे दिया। जिसके फल स्वरुप जनपद के विभागीय अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए गठित अवर अभियंता सुनील मौर्या, पंकज खेमका की टीम ने पुल निर्माण के लिए पुल की बढ़ी हुई लागत एवं उसके एप्रोच की लागत को जोड़ते हुए 10 करोड़ 50 लाख रुपए की पुनरिक्षित आगणन तैयार कर लिया और अधीक्षण अभियंता वाराणसी कार्यालय को प्रेषित किया।
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गरई नदी पर बना पुराना पुल बरसात के दिनों में अहरौरा बांध से पानी बढ़ने पर आवागमन ठप कर देता है। क्षेत्र के नागरिकों और ग्रामीणों द्वारा समस्या को निजात दिलाने के लिए नौ वर्ष पूर्व तत्कालीन विधायक पूनम सोनकर ने शासन से अवगत कराकर नए पुल निर्माण के लिए मंजूरी दिलाने में भूमिका अदा की थी। शासन से लगभग चार करोड़ रुपए स्वीकृत हुए थे। कार्यदायी संस्था ने तीन पिलर और अन्य कार्य कराए लेकिन धनराशि की कमी और अधिकारियों की लापरवाही से निर्माण पूरा नहीं हो सका।
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मामले को संज्ञान में लेते हुए क्षेत्रीय भाजपा विधायक कैलाश आचार्य ने पुल को फाइनल स्वरूप देने के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग के उच्च अधिकारियों से वार्ता की और आने वाली समस्याओं में सहयोग लेने का निर्देश दिया। जिसको पीडब्ल्यूडी विभाग वाराणसी के चीफ इंजीनियर अभिनेश कुमार ने संज्ञान में ले लिया। और चंदौली जनपद के विभागीय अधिकारियों को पुल निर्माण में आने वाली परेशानियों को अति शीघ्र दूर करने के अवगत कराने का निर्देश दे दिया। जिसके फल स्वरुप जनपद के विभागीय अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए गठित अवर अभियंता सुनील मौर्या, पंकज खेमका की टीम ने पुल निर्माण के लिए पुल की बढ़ी हुई लागत एवं उसके एप्रोच की लागत को जोड़ते हुए 10 करोड़ 50 लाख रुपए की पुनरिक्षित आगणन तैयार कर लिया और अधीक्षण अभियंता वाराणसी कार्यालय को प्रेषित किया।
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