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Chandauli News: स्मार्ट क्लास के दावे बेमानी, 11 स्कूलों में अब तक नहीं पहुंची बिजली की रोशनी
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वभनियांव स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय। संवाद
पीडीडीयू नगर। विद्यालयों को स्मार्ट क्लास, डिजिटल शिक्षा, प्रोजेक्टर, टैबलेट और आधुनिक सुविधाओं से लैस करने का दावा किया जा रहा। लेकिन चंदौली जिले की जमीनी तस्वीर इन दावों से बिल्कुल अलग है। जिले के पांच विकासखंडों के 11 परिषदीय विद्यालय आज भी बिजली जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। ऐसे में डिजिटल शिक्षा तो दूर, बच्चों को भीषण गर्मी और उमस में बिना पंखे के पढ़ाई करनी पड़ रही है।
बिजली नहीं होने के कारण इन विद्यालयों में कंप्यूटर, स्मार्ट टीवी, प्रोजेक्टर और अन्य डिजिटल उपकरण केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। कई विद्यालयों में पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित होती है, क्योंकि मोटर नहीं चलने से पानी की उपलब्धता बाधित रहती है। बरसात और गर्मी के मौसम में स्थिति और भी मुश्किल हो जाती है। शिक्षा विभाग का कहना है कि अधिकांश विद्यालयों के लिए बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया पूरी कर दी गई है और आवेदन भी भेजे जा चुके हैं।
हालांकि कहीं बिजली के खंभे नहीं हैं, कहीं लाइन विस्तार नहीं हुआ है तो कहीं मीटर लगाने की प्रक्रिया अधूरी है। इन तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों के कारण अब तक विद्यालयों में बिजली नहीं पहुंच सकी है। स्थिति यह है कि सरकार बच्चों को डिजिटल शिक्षा देने की बात कर रही है, जबकि कई स्कूलों में आज भी शिक्षक प्राकृतिक रोशनी के भरोसे कक्षाएं संचालित करने को मजबूर हैं। बिजली नहीं होने से गर्मी में बच्चों का कक्षा में बैठना कठिन हो जाता है और बरसात के दिनों में भी परेशानी बढ़ जाती है।
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धानापुर के पांच प्राथमिक विद्यालयों में बिजली नहीं
सबसे अधिक प्रभावित विद्यालय धानापुर विकासखंड में हैं, जहां पांच उच्च प्राथमिक विद्यालय अब तक बिजली की सुविधा से वंचित हैं। इसके अलावा चकिया, चंदौली, नौगढ़ और शहाबगंज विकासखंड के विद्यालय भी वर्षों से बिजली कनेक्शन का इंतजार कर रहे हैं।
एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे विभाग
बेसिक शिक्षा विभाग और बिजली विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आ रहे हैं। जहां शिक्षा विभाग का कहना है कि कनेक्शन की प्रक्रिया पूरी कर दी गई है, वहीं बिजली विभाग मीटर और अन्य तकनीकी बाधाओं की बात कर रहा है। इस बीच सबसे अधिक नुकसान उन बच्चों का हो रहा है, जिन्हें बेहतर शिक्षा देने के दावे किए जा रहे हैं।
इनसेट-
इन विद्यालयों में नहीं है बिजली
-- प्राथमिक विद्यालय मझगांवा नवीन, चकिया
-- उच्च प्राथमिक विद्यालय हलुवा, चंदौली
-- -उच्च प्राथमिक विद्यालय वभनियाव, धानापुर
-- उच्च प्राथमिक विद्यालय महुजी,धानापुर
-- उच्च प्राथमिक विद्यालय जर्मुना,धानापुर
-- उच्च प्राथमिक विद्यालय फूलपुर प्रसाद,धानापुर
-- उच्च प्राथमिक विद्यालय नेकनामपुर, धानापुर
-- प्राथमिक विद्यालय पथरौरा, नौगढ़
-- उच्च प्राथमिक विद्यालय ठठवां, शहाबगंज
-- प्राथमिक विद्यालय तकिया महदौर, शहाबगंज
-- उच्च प्राथमिक विद्यालय रामशाला, शहाबगंज
इनसेट-
बिजली के बिना प्रभावित हो रही व्यवस्था
-- भीषण गर्मी में पंखे बंद रहने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित
स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर और डिजिटल उपकरणों का उपयोग ठप
-- प्रोजेक्टर और स्मार्ट टीवी धूल फांक रहे
-- पेयजल के लिए मोटर नहीं चलने से पानी की समस्या
-- ऑनलाइन गतिविधियां और डिजिटल मूल्यांकन प्रभावित
-- शिक्षकों को भी कार्य निष्पादन में परेशानी
स्मार्ट क्लास और डिजिटल पढ़ाई की बात किया जाता है, लेकिन हमारे गांव के स्कूल में आज तक बिजली की व्यवस्था नहीं हो सकी। गर्मी में बच्चे पसीने से तर होकर पढ़ाई करते हैं। सबसे पहले स्कूलों में बिजली जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। - -अंजनी सिंह, धानापुर
बिजली नहीं होने से स्कूल में न पंखा चलता है और न ही कंप्यूटर या स्मार्ट टीवी का उपयोग हो पाता है। बच्चे उमस और गर्मी में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। प्रशासन को जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करना चाहिए।-- पिंटू सिंह कमालपुर
जब करोड़ों रुपये खर्च कर शिक्षा व्यवस्था सुधारने की बात की जा रही है, तब बिजली जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव चिंताजनक है। बिना बिजली के डिजिटल शिक्षा केवल कागजों तक सीमित रह जाती है। गांव के प्राथमिक विद्यालय में अभी तक कनेक्शन नहीं है।-- -- अरविंद सिंह, बंहनियाव थाना
हमारे गांव के प्राथमिक विद्यालय में बिजली नहीं होने से पेयजल की भी दिक्कत रहती है। अगर स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं नहीं होंगी तो बच्चों की पढ़ाई कैसे बेहतर होगी? सरकार को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।-- राजेश सिंह, बभनीयाव
कोट-- -- -
जिले के सभी विद्यालयों में बिजली कनेक्शन है। कुछ विद्यालयों में अभी मीटर नहीं लगे हैं। बिजली निगम से बातचीत चल रही है। जल्द ही मीटर लगा दिया जाएगा।-- -- सचिन कुमार, बीएसए, चंदौली
विद्यालयों में बिजली कनेक्शन और मीटर नहीं होने के मामले में जांच किया जाएगा। जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। - जमीर सिंह, अधीक्षण अभियंता, विद्युत निगम
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बिजली नहीं होने के कारण इन विद्यालयों में कंप्यूटर, स्मार्ट टीवी, प्रोजेक्टर और अन्य डिजिटल उपकरण केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। कई विद्यालयों में पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित होती है, क्योंकि मोटर नहीं चलने से पानी की उपलब्धता बाधित रहती है। बरसात और गर्मी के मौसम में स्थिति और भी मुश्किल हो जाती है। शिक्षा विभाग का कहना है कि अधिकांश विद्यालयों के लिए बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया पूरी कर दी गई है और आवेदन भी भेजे जा चुके हैं।
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हालांकि कहीं बिजली के खंभे नहीं हैं, कहीं लाइन विस्तार नहीं हुआ है तो कहीं मीटर लगाने की प्रक्रिया अधूरी है। इन तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों के कारण अब तक विद्यालयों में बिजली नहीं पहुंच सकी है। स्थिति यह है कि सरकार बच्चों को डिजिटल शिक्षा देने की बात कर रही है, जबकि कई स्कूलों में आज भी शिक्षक प्राकृतिक रोशनी के भरोसे कक्षाएं संचालित करने को मजबूर हैं। बिजली नहीं होने से गर्मी में बच्चों का कक्षा में बैठना कठिन हो जाता है और बरसात के दिनों में भी परेशानी बढ़ जाती है।
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धानापुर के पांच प्राथमिक विद्यालयों में बिजली नहीं
सबसे अधिक प्रभावित विद्यालय धानापुर विकासखंड में हैं, जहां पांच उच्च प्राथमिक विद्यालय अब तक बिजली की सुविधा से वंचित हैं। इसके अलावा चकिया, चंदौली, नौगढ़ और शहाबगंज विकासखंड के विद्यालय भी वर्षों से बिजली कनेक्शन का इंतजार कर रहे हैं।
एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे विभाग
बेसिक शिक्षा विभाग और बिजली विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आ रहे हैं। जहां शिक्षा विभाग का कहना है कि कनेक्शन की प्रक्रिया पूरी कर दी गई है, वहीं बिजली विभाग मीटर और अन्य तकनीकी बाधाओं की बात कर रहा है। इस बीच सबसे अधिक नुकसान उन बच्चों का हो रहा है, जिन्हें बेहतर शिक्षा देने के दावे किए जा रहे हैं।
इनसेट-
इन विद्यालयों में नहीं है बिजली
इनसेट-
बिजली के बिना प्रभावित हो रही व्यवस्था
स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर और डिजिटल उपकरणों का उपयोग ठप
स्मार्ट क्लास और डिजिटल पढ़ाई की बात किया जाता है, लेकिन हमारे गांव के स्कूल में आज तक बिजली की व्यवस्था नहीं हो सकी। गर्मी में बच्चे पसीने से तर होकर पढ़ाई करते हैं। सबसे पहले स्कूलों में बिजली जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। - -अंजनी सिंह, धानापुर
बिजली नहीं होने से स्कूल में न पंखा चलता है और न ही कंप्यूटर या स्मार्ट टीवी का उपयोग हो पाता है। बच्चे उमस और गर्मी में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। प्रशासन को जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करना चाहिए।
जब करोड़ों रुपये खर्च कर शिक्षा व्यवस्था सुधारने की बात की जा रही है, तब बिजली जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव चिंताजनक है। बिना बिजली के डिजिटल शिक्षा केवल कागजों तक सीमित रह जाती है। गांव के प्राथमिक विद्यालय में अभी तक कनेक्शन नहीं है।
हमारे गांव के प्राथमिक विद्यालय में बिजली नहीं होने से पेयजल की भी दिक्कत रहती है। अगर स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं नहीं होंगी तो बच्चों की पढ़ाई कैसे बेहतर होगी? सरकार को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
कोट
जिले के सभी विद्यालयों में बिजली कनेक्शन है। कुछ विद्यालयों में अभी मीटर नहीं लगे हैं। बिजली निगम से बातचीत चल रही है। जल्द ही मीटर लगा दिया जाएगा।
विद्यालयों में बिजली कनेक्शन और मीटर नहीं होने के मामले में जांच किया जाएगा। जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। - जमीर सिंह, अधीक्षण अभियंता, विद्युत निगम