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खटारा वाहनों से बढ़ रही दुर्घटनाएं, बिगड़ रहा पर्यावरण
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चंदौली। जिले में बगैर फिटनेस के संचालित खटारा वाहन पर्यावरण और आम जनमानस के लिए मुसीबत बन गए है। जबकि परिवहन विभाग द्वारा खटारा वाहनों पर लगाम लगाने के लिए बराबर अभियान चलाने का दावा किया जाता है। लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही है। परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार पांच सौ से अधिक वाहन स्वामियों को फिटनेस कराने के लिए नोटिस भेजा जा चुका है। लेकिन इसके बाद भी फिटनेस कराने वालों की तादात नाम मात्र है।
परिवहन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो प्रत्येक वर्ष 32 हजार प्राइवेट तथा ढाई हजार व्यावसायिक वाहनों का पंजीयन होता है। ऐसे में लगभग 13 हजार बड़े वाहन, 25 हजार छोटे चार पहिया वाहन परिवहन विभाग में पंजीकृत हो चुके हैं। यानी औसतन रोजाना 94 वाहन रोज सड़क बढ़ रहे हैं। जबकि जिले की सड़कों की हालत किसी से छुपी नहीं है। वहीं सड़कों पर संचालित खटारा वाहन कोढ़ में खाज का काम कर रहा है। एक ओर जहां पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर इन वाहनों से निकलने वाला जहरिला धूआं आम जनमानस को गंभीर बीमारियां बांट रहा है। जबकि ऐसे वाहनों पर रोक लगाने के लिए परिवहन विभाग द्वारा समय समय पर अभियान चलाकर कार्रवाई करने का दावा किया जाता है। लेकिन इसके बावजूद खटारा वाहनों पर पूरी तरह से लगाम लगाने में परिवाहन विभाग के अधिकारी भी नाकाम साबित हुए हैं। वहीं इन वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं के बाद जरूर जिला प्रशासन की नींद टूट जाती है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि खटारा वाहनों पर लगाम लगाने के बजाय जिला प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार है।
बगैर फिटनेस के संचालित वाहनों पर रोक लगाने के लिए बराबर अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे वाहनों के स्वामियों को नोटिस देकर फिटनेस कराने के लिए निर्देश दिया गया है। निर्धारित अवधि के भीतर फिटनेस नहीं कराने पर वाहनों का पंजीयन निलंबित कर दिया जाएगा। डा. दिलीप गुप्त, एआरटीओ प्रशासन।
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परिवहन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो प्रत्येक वर्ष 32 हजार प्राइवेट तथा ढाई हजार व्यावसायिक वाहनों का पंजीयन होता है। ऐसे में लगभग 13 हजार बड़े वाहन, 25 हजार छोटे चार पहिया वाहन परिवहन विभाग में पंजीकृत हो चुके हैं। यानी औसतन रोजाना 94 वाहन रोज सड़क बढ़ रहे हैं। जबकि जिले की सड़कों की हालत किसी से छुपी नहीं है। वहीं सड़कों पर संचालित खटारा वाहन कोढ़ में खाज का काम कर रहा है। एक ओर जहां पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर इन वाहनों से निकलने वाला जहरिला धूआं आम जनमानस को गंभीर बीमारियां बांट रहा है। जबकि ऐसे वाहनों पर रोक लगाने के लिए परिवहन विभाग द्वारा समय समय पर अभियान चलाकर कार्रवाई करने का दावा किया जाता है। लेकिन इसके बावजूद खटारा वाहनों पर पूरी तरह से लगाम लगाने में परिवाहन विभाग के अधिकारी भी नाकाम साबित हुए हैं। वहीं इन वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं के बाद जरूर जिला प्रशासन की नींद टूट जाती है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि खटारा वाहनों पर लगाम लगाने के बजाय जिला प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार है।
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बगैर फिटनेस के संचालित वाहनों पर रोक लगाने के लिए बराबर अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे वाहनों के स्वामियों को नोटिस देकर फिटनेस कराने के लिए निर्देश दिया गया है। निर्धारित अवधि के भीतर फिटनेस नहीं कराने पर वाहनों का पंजीयन निलंबित कर दिया जाएगा। डा. दिलीप गुप्त, एआरटीओ प्रशासन।
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