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चंदौली प्रशासन बना अंजान : जिला मुख्यालय के पास ही जलाई जा रही पराली, तीन मामलों के बाद की कार्रवाई नहीं

Thu, 05 Dec 2024 06:44 PM IST
नितीश कुमार पांडेय अमर उजाला नेटवर्क, चंदौली
अमर उजाला नेटवर्क, चंदौली Published by: नितीश कुमार पांडेय Updated Thu, 05 Dec 2024 06:44 PM IST
सार

पर्यावरण को लेकर प्रशासन अंजान बना हुआ है। वीडियो और तस्वीरों पर गौर करें तो जिला मुख्यालय के पास पराली जलाई जा रही है और इससे जुड़े तीन मामलों की शिकायत भी हो चुकी है। खेतों के धुएं से पर्यावरण प्रदूषण का खतरा बढ़ रहा है।
 

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Chandauli Administration remains unaware: Stubble is being burnt near the district headquarters no action tak
खेत में पराली जलते - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

पराली प्रबंधन को लेकर कृषि विभाग के तमाम दावें हवा-हवाई हो गए है। बृहस्पतिवार को जिला मुख्यालय से 500 मीटर दूर और कृषि विभाग कार्यालय के बगल के बिछियां कला गांव के खेतों में पराली जलाई गई। बीते एक सप्ताह में दो से तीन मामले सामने आ चुके है लेकिन विभाग की ओर से एक भी कार्रवाई नहीं की गई। जिला प्रशासन की ओर से अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में तहसील स्तर पर उप जिलाधिकारी की अध्यक्षता में सचल दस्ता गठित किया गया है, जो पराली जलाने की घटनाओं का निगरानी करेंगें।

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न्याय पंचायत स्तर पर कृषि विभाग के कर्मचारी एवं राजस्व विभाग के लेखपालों को भी निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिले में 5000 वेस्ट डीकंपोजर का वितरण किया गया। बावजूद इसके जिला प्रशासन के नाक के नीचे पराली जलाई गई। वायू प्रदूषण नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) का सख्त आदेश है कि पराली जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। जिले में दो एकड़ से कम क्षेत्र में पराली जलाने पर पांच हजार, दो से पांच एकड क्षेत्र के लिए दस और पांच एकड़ से अधिक के लिए 30 हजार रुपये वसूली का आदेश है।
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पराली जलाने से होने वाले नुकसान
पराली जलाने से उत्पन्न धुएं से सांस लेने में दिक्कत, एलर्जी, और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों, बुज़ुर्गों, और कमजोर रोगप्रतिरोधक क्षमता के मरीजों पर इसका ज्यादा असर पड़ता है। पराली जलाने से कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैसें निकलती हैं, जिससे वैश्विक तापमान बढ़ता है और जलवायु परिवर्तन होता है। पराली जलाने से मिट्टी की ऊपरी सतह के पोषक तत्व और सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरक क्षमता कम हो जाती है। उपनिदेश कृषि भीमसेन की माने तो अभी तक जिले में पराली जलाने का कोई मामला संज्ञान में नहीं आया है। किसानों को लगातार पराली प्रंबंधन के लिए जागरूक किया जा रहा है।

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