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टूट गई आस, नहीं मिले पैसे
chandauli
Updated Sun, 18 Dec 2016 01:38 AM IST
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मुगलसराय स्थित एचडीएफसी एटीएम पर लाइन में लगे लोग।
- फोटो : chandauli
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लखनऊ में पांच हजार करोड़ रुपये ग्रामीण इलाकों के बैंकों के लिए पहुंचने और प्रधानमंत्री के आगमन के मद्देनजर वाराणसी के सभी एटीएम चालू होने के बाद जिले के लोगों को भी आस जगी कि शायद उन्हें पैसे मिल जाएं लेकिन आस धरी की धरी रह गई। बैंकों में कतार लगाने के बाद भी शनिवार को लोगों को जरूरत भर पैसे नहीं मिले।
नोटबंदी के 38 दिन बाद भी बैंकों में कैैश की किल्लत कम नहीं हुई है। पुराने नोट जमा कराने की सीमा भी खत्म होने को है। बावजूद इसके बैंकों में कैश की किल्लत खत्म नहीं हो रही है। बैंक मैनेजरों की माने तो एक दो सप्ताह के भीतर स्थिति कुछ हद तक सामान्य हो जाएगी। रविवार को बैंकों में छूट्टी रहेगी। ऐसे में पहलेेेही पैसे निकालने के लिए लोग शनिवार को बैंकों में पहुंचे लेकिन यहां उन्हें कुछ हजार से काम चलाना पड़ा। नगर के एसबीआई, यूनियन बैंक, पीएनबी, बैंक आफ बड़ौदा, बैंक आफ इंडिया, सेंट्रल बैंक, विजया बैंक सहित अन्य बैंकों से चौबीस हजार नहीं दिए गए। कहीं दो तो कहीं पांच और कहीं दस हजार रुपये ही मिले।ग्रामीण बैंकों और डाकघर में भी कैैश की किल्लत बनी रही। ग्रामीण इलाकों में स्थित काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक और डाकघरों से लोगों को पैसे नहीं मिले।
23 दिसंबर को प्रधानमंत्री के वाराणसी आगमन को देखते हुए शुक्रवार को बनारस के सभी एटीएम के चालू होने और पैसे भरे होने की खबर अखबारों में प्रकाशित हुई और सूचना मिली कि प्रदेश मे बैंकों में कैश की किल्लत को देखते हुए पांच हजार करोड़ रुपये लखनऊ में आ गए हैं और इन्हें ग्रामीण क्षेत्रों के बैंक में पहुंचाने का निर्देश दिया गया है। ऐसे मे लोगो को लगा कि आज उन्हे पैसे मिलेगा लेकिन बैंकों में स्थिति कुछ और ही मिली। बैंक आफ बड़ौदा में पैसे निकालने पहुंचे विजय कुमार ने बताया कि पिछले छह दिनों में उन्हें चौबीस हजार रुपये मिले और इसके लिए प्रतिदिन दो से तीन घंटे लाइन में लगना पड़ा। इसी तरह विजया बैंक की शाखा में पैसे निकालने पहुंचे संजीव शर्मा ने बताया कि अभी तक पूरे चौबीस हजार रुपये नहीं मिले हैं। वे टेंट व्यवसायी हैं और कामगारो को पैसे देने हैं लेकिन मुश्किल हो रही है। इसी तरह पीएनबी में पैसे निकालने पहुंचे राजकुमार ने बताया कि मां बीमार हैं, और पैसे निकालने के लिए परेशान होना पड़ा है।
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नोटबंदी के 38 दिन बाद भी बैंकों में कैैश की किल्लत कम नहीं हुई है। पुराने नोट जमा कराने की सीमा भी खत्म होने को है। बावजूद इसके बैंकों में कैश की किल्लत खत्म नहीं हो रही है। बैंक मैनेजरों की माने तो एक दो सप्ताह के भीतर स्थिति कुछ हद तक सामान्य हो जाएगी। रविवार को बैंकों में छूट्टी रहेगी। ऐसे में पहलेेेही पैसे निकालने के लिए लोग शनिवार को बैंकों में पहुंचे लेकिन यहां उन्हें कुछ हजार से काम चलाना पड़ा। नगर के एसबीआई, यूनियन बैंक, पीएनबी, बैंक आफ बड़ौदा, बैंक आफ इंडिया, सेंट्रल बैंक, विजया बैंक सहित अन्य बैंकों से चौबीस हजार नहीं दिए गए। कहीं दो तो कहीं पांच और कहीं दस हजार रुपये ही मिले।ग्रामीण बैंकों और डाकघर में भी कैैश की किल्लत बनी रही। ग्रामीण इलाकों में स्थित काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक और डाकघरों से लोगों को पैसे नहीं मिले।
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23 दिसंबर को प्रधानमंत्री के वाराणसी आगमन को देखते हुए शुक्रवार को बनारस के सभी एटीएम के चालू होने और पैसे भरे होने की खबर अखबारों में प्रकाशित हुई और सूचना मिली कि प्रदेश मे बैंकों में कैश की किल्लत को देखते हुए पांच हजार करोड़ रुपये लखनऊ में आ गए हैं और इन्हें ग्रामीण क्षेत्रों के बैंक में पहुंचाने का निर्देश दिया गया है। ऐसे मे लोगो को लगा कि आज उन्हे पैसे मिलेगा लेकिन बैंकों में स्थिति कुछ और ही मिली। बैंक आफ बड़ौदा में पैसे निकालने पहुंचे विजय कुमार ने बताया कि पिछले छह दिनों में उन्हें चौबीस हजार रुपये मिले और इसके लिए प्रतिदिन दो से तीन घंटे लाइन में लगना पड़ा। इसी तरह विजया बैंक की शाखा में पैसे निकालने पहुंचे संजीव शर्मा ने बताया कि अभी तक पूरे चौबीस हजार रुपये नहीं मिले हैं। वे टेंट व्यवसायी हैं और कामगारो को पैसे देने हैं लेकिन मुश्किल हो रही है। इसी तरह पीएनबी में पैसे निकालने पहुंचे राजकुमार ने बताया कि मां बीमार हैं, और पैसे निकालने के लिए परेशान होना पड़ा है।
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