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परीक्षा में संतुलन और सकारात्मक सोच जरूरी : डॉ. अजय कुमार
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अलीनगर स्थित राधाकृष्ण इंटर कॉलेज में छात्र-छात्राओं को जागरूक करते मनोवैज्ञानिक डॉ.अजय कुमार।
- फोटो : 1
पीडीडीयू नगर। परीक्षा के दबाव और तनाव से विद्यार्थियों को राहत दिलाने के उद्देश्य से अमर उजाला की ओर से बुधवार को अलीनगर स्थित राधा कृष्ण इंटर कॉलेज में तनाव मुक्त परीक्षा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें विशेषज्ञों ने छात्र-छात्राओं को संतुलन और सकारात्मक सोच के साथ परीक्षा की तैयारी करने और तनाव से बचने के उपाय बताए।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बाबा कीनाराम मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार ने विद्यार्थियों से कहा कि तनाव पूरी तरह समाप्त करना संभव नहीं है और न यह जरूरी है। उन्होंने कहा कि सीमित और सकारात्मक तनाव व्यक्ति को लक्ष्य के प्रति सजग और सक्रिय बनाता है। हालांकि जब यही तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए घातक साबित होता है।
डॉ. अजय ने बताया कि अल्पकालिक तनाव हमें परीक्षा या किसी चुनौती के लिए तैयार करता है, जबकि दीर्घकालिक तनाव से शुगर, उच्च रक्तचाप, अनिद्रा जैसी बीमारियां हो सकती हैं। तनाव होने पर घबराने के बजाय शांत होकर उसके कारणों की पहचान करना जरूरी है। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने परीक्षा की तैयारी से जुड़े सवाल पूछे, जिनका डॉ. अजय ने उनका समाधान बताया। इस दौरान विद्यालय के प्रबंधक वैद्यनाथ यादव भी मौजूद रहे।
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मोबाइल से दूरी, नींद है जरूरी
डॉ. अजय ने कहा कि जरूरत से ज्यादा मोबाइल का इस्तेमाल गुस्से, चिड़चिड़ेपन, एकाग्रता में कमी और नींद की समस्या का कारण बनता है। परीक्षा के समय मोबाइल फोन से दूरी बनाए रखना विद्यार्थियों के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि मोबाइल से ध्यान भटकता है और याददाश्त पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे रोज 7 से 8 घंटे की नींद लें, क्योंकि नींद मस्तिष्क को तरोताजा रखने में अहम भूमिका निभाती है। साथ ही नियमित योग और प्राणायाम करने पर जोर दिया। भ्रामरी प्राणायाम को तनाव कम करने में अत्यंत प्रभावी बताते हुए इसे दिनचर्या में शामिल करने की अपील की।
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समस्या को मन में दबाने से बढ़ता है तनाव
डॉ. अजय कुमार ने कहा कि विद्यार्थियों को अपने मन की बात माता-पिता, शिक्षकों या किसी करीबी से साझा करनी चाहिए। समस्या को मन में दबाने से तनाव बढ़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई प्रश्न समझ में न आए तो बिना संकोच दूसरों से पूछना चाहिए, क्योंकि सीखने में अहंकार सबसे बड़ी बाधा बनता है। उन्होंने बताया कि संतुलित और पौष्टिक आहार से शरीर और दिमाग दोनों स्वस्थ रहते हैं। पढ़ाई के साथ लिखने की आदत डालनी चाहिए। इससे याद रखने की क्षमता बेहतर होती है। उन्होंने बताया कि हर व्यक्ति के मन में प्रतिदिन औसतन 60 हजार विचार आते हैं, जिन्हें नियंत्रित करना और सकारात्मक दिशा देना बेहद जरूरी है। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे नकारात्मक सोच से दूरी बनाकर समाधान पर केंद्रित रहें।
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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बाबा कीनाराम मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार ने विद्यार्थियों से कहा कि तनाव पूरी तरह समाप्त करना संभव नहीं है और न यह जरूरी है। उन्होंने कहा कि सीमित और सकारात्मक तनाव व्यक्ति को लक्ष्य के प्रति सजग और सक्रिय बनाता है। हालांकि जब यही तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए घातक साबित होता है।
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डॉ. अजय ने बताया कि अल्पकालिक तनाव हमें परीक्षा या किसी चुनौती के लिए तैयार करता है, जबकि दीर्घकालिक तनाव से शुगर, उच्च रक्तचाप, अनिद्रा जैसी बीमारियां हो सकती हैं। तनाव होने पर घबराने के बजाय शांत होकर उसके कारणों की पहचान करना जरूरी है। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने परीक्षा की तैयारी से जुड़े सवाल पूछे, जिनका डॉ. अजय ने उनका समाधान बताया। इस दौरान विद्यालय के प्रबंधक वैद्यनाथ यादव भी मौजूद रहे।
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मोबाइल से दूरी, नींद है जरूरी
डॉ. अजय ने कहा कि जरूरत से ज्यादा मोबाइल का इस्तेमाल गुस्से, चिड़चिड़ेपन, एकाग्रता में कमी और नींद की समस्या का कारण बनता है। परीक्षा के समय मोबाइल फोन से दूरी बनाए रखना विद्यार्थियों के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि मोबाइल से ध्यान भटकता है और याददाश्त पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे रोज 7 से 8 घंटे की नींद लें, क्योंकि नींद मस्तिष्क को तरोताजा रखने में अहम भूमिका निभाती है। साथ ही नियमित योग और प्राणायाम करने पर जोर दिया। भ्रामरी प्राणायाम को तनाव कम करने में अत्यंत प्रभावी बताते हुए इसे दिनचर्या में शामिल करने की अपील की।
समस्या को मन में दबाने से बढ़ता है तनाव
डॉ. अजय कुमार ने कहा कि विद्यार्थियों को अपने मन की बात माता-पिता, शिक्षकों या किसी करीबी से साझा करनी चाहिए। समस्या को मन में दबाने से तनाव बढ़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई प्रश्न समझ में न आए तो बिना संकोच दूसरों से पूछना चाहिए, क्योंकि सीखने में अहंकार सबसे बड़ी बाधा बनता है। उन्होंने बताया कि संतुलित और पौष्टिक आहार से शरीर और दिमाग दोनों स्वस्थ रहते हैं। पढ़ाई के साथ लिखने की आदत डालनी चाहिए। इससे याद रखने की क्षमता बेहतर होती है। उन्होंने बताया कि हर व्यक्ति के मन में प्रतिदिन औसतन 60 हजार विचार आते हैं, जिन्हें नियंत्रित करना और सकारात्मक दिशा देना बेहद जरूरी है। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे नकारात्मक सोच से दूरी बनाकर समाधान पर केंद्रित रहें।